बिरसा मुंडा और उलगुलान (1899–1900): BPSC प्रारंभिक परीक्षा नोट्स
BPSC प्रारंभिक परीक्षा की माँग
बिरसा आंदोलन को इस श्रृंखला से याद करें: मुंडा जनजाति → छोटानागपुर → भूमि और वन-अधिकार → उलगुलान → 1899–1900 → छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1908। बिरसा का जन्मस्थान, बिरसाइत धार्मिक पहचान, राँची जेल में मृत्यु और उलगुलान तथा संथाल हूल का अंतर भी पढ़ें।
कालक्रम
आंदोलन क्यों उठा?
इस आंदोलन में भूमि, वन, राजनीति, समाज और धर्म से जुड़े प्रश्न मिले हुए थे। आदिवासी/मुंडा समुदाय भूमि पर नियंत्रण खोने, महाजन और जमींदार के दबाव, औपनिवेशिक हस्तक्षेप और प्रथागत अधिकारों के क्षरण से जूझ रहे थे। सरकारी सामग्री में भारतीय वन अधिनियम, 1882 के कारण पारंपरिक वन-अधिकार सीमित होने का उल्लेख भी है। बिरसा के संदेश में नई जनजातीय चेतना, स्वशासन और मुंडा राज की कल्पना थी; इसे केवल धार्मिक या केवल आर्थिक कारण से नहीं समझना चाहिए।
शब्द और उनका सही अर्थ
शब्द / व्यक्ति
सही संबंध
बिरसा मुंडा
छोटानागपुर पठार क्षेत्र की मुंडा जनजाति के नेता।
उलगुलान
महान विद्रोह / महान उथल-पुथल; परीक्षा के सामान्य कालक्रम में बिरसा से जुड़ा 1899–1900 का आंदोलन।
बिरसाइत
बिरसा के सुधार और जनजातीय पहचान से जुड़ा धार्मिक आंदोलन/पंथ।
धरती आबा
“धरती के पिता”; बिरसा के लिए अनुयायियों में प्रचलित संबोधन।
मुंडा राज
स्वशासन और मुंडा अधिकारों की पुनर्स्थापना की आंदोलनकारी कल्पना।
छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम
1908 का छोटानागपुर क्षेत्र का जमींदार–किरायेदार संबंधी कानून; सरकारी स्रोत गैर-जनजातीयों को जनजातीय भूमि के हस्तांतरण पर रोक बताते हैं।
इन जनजातीय आंदोलनों को न मिलाएँ
विशेषता
संथाल हूल
बिरसा आंदोलन / उलगुलान
काल
1855–56
1899–1900 (मुख्य परीक्षा-कालक्रम)
समुदाय
संथाल
मुंडा
प्रमुख नेता
सिद्धू, कान्हू, चाँद, भैरव
बिरसा मुंडा
मुख्य क्षेत्र
दामिन-इ-कोह / राजमहल क्षेत्र
छोटानागपुर पठार
मुख्य परिणाम
संथाल परगना की व्यवस्था
बाद का छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1908; इसे 1900 का तत्काल परिणाम न लिखें।