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संथाल विद्रोह / संथाल हूल (1855–56): BPSC प्रारंभिक परीक्षा नोट्स

8 min read · Updated 13 Sep 2026

संथाल विद्रोह / संथाल हूल (1855–56): BPSC प्रारंभिक परीक्षा नोट्स

BPSC प्रारंभिक परीक्षा की माँग

BPSC के लिए इस विद्रोह को वर्ष, स्थान, नेता, कारण और परिणाम से याद करें: 1855–56; भोगनाडीह; सिद्धू, कान्हू, चाँद और भैरव; औपनिवेशिक अधिकारी, पुलिस, महाजन और जमींदारों का शोषण; तथा संथाल परगना की अलग प्रशासनिक व्यवस्था। आधुनिक भूगोल और उन्नीसवीं सदी के इतिहास को सावधानी से अलग रखें।

कालक्रम

कारण: इसे केवल एक कारण तक सीमित न करें

संथालों के सामने शोषण की मिली-जुली व्यवस्था थी। सरकारी विवरण में औपनिवेशिक शासन और पुलिस, महाजन, जमींदार तथा राज के अन्य एजेंट बताए गए हैं। बहुत अधिक ब्याज पर ऋण, जमीन छिनना, बंधुआ या जबरन श्रम, राजस्व का दबाव, अवैध वसूली और झूठे मुकदमे उनकी पीड़ा बढ़ाते थे। उत्तर में केवल एक समूह को दोष देने के बजाय औपनिवेशिक शासन और उसके स्थानीय बिचौलिये लिखें।

नेता और महत्वपूर्ण शब्द

विषयसही संबंध
सिद्धू और कान्हू मुर्मूप्रमुख नेता; भोगनाडीह के भाई।
चाँद और भैरवसरकारी विवरण में सिद्धू और कान्हू के साथ नेतृत्व से जुड़े नाम।
हूलविद्रोह या उभार; संथाल आंदोलन के लिए प्रयुक्त शब्द।
दिकूसरकारी विवरण में विद्रोहियों द्वारा निशाना बनाए गए बाहरी/शोषक लोगों के लिए प्रयुक्त शब्द।
दामिन-इ-कोहसंथाल बसावट और आंदोलन के केंद्र से जुड़ा क्षेत्र।
परवानानेताओं द्वारा अधिकारियों और जमींदारों को भेजा गया आदेश/घोषणा-पत्र।

संथाल हूल और 1857 का विद्रोह

बिंदुसंथाल हूल1857 का विद्रोह
समय1855–56, 1857 से पहले।1857–58।
मुख्य क्षेत्रदामिन-इ-कोह / राजमहल क्षेत्र और निकटवर्ती इलाके।उत्तर और मध्य भारत के कई केंद्र।
इस नोट के प्रमुख नेतासिद्धू, कान्हू, चाँद, भैरव।क्षेत्रानुसार अलग नेता, जैसे बिहार में कुँवर सिंह।
मुख्य शिकायतऔपनिवेशिक शासन और बिचौलियों द्वारा आदिवासी किसान-शोषण।सैनिक, राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक कारणों का व्यापक मेल।

प्रारंभिक परीक्षा के जाल

  • मुख्य संथाल विद्रोह के लिए 1855–56 सबसे सुरक्षित प्रयोग है; कुछ स्रोत 1855–57 भी लिखते हैं। प्रश्न में दिए वर्ष को ध्यान से पढ़ें।
  • भोगनाडीह आज झारखंड के साहिबगंज में है, वर्तमान बिहार में नहीं।
  • चार नाम सिद्धू, कान्हू, चाँद और भैरव हैं; इनकी जगह बिरसा मुंडा न लिखें।
  • हूल का अर्थ विद्रोह/उभार है, यह कोई भूमि-राजस्व व्यवस्था नहीं है।
  • दामिन-इ-कोह आंदोलन का केंद्रीय क्षेत्र है; इसे दक्कन या पंजाब से न बदलें।
  • विद्रोह 1857 से पहले हुआ, पर यह 1857 का वही विद्रोह नहीं है।

20 BPSC प्रारंभिक परीक्षा बहुविकल्पीय प्रश्न