BPSC · Polity

संघ, राज्यक्षेत्र और नागरिकता

35 min read · Updated 5 Oct 2026

1. BPSC में क्या पूछा जा सकता है?

BPSC में सीधे अनुच्छेद–प्रावधान, कथन-आधारित प्रश्न, संसद और राज्य के अधिकार का अंतर, संवैधानिक नागरिकता और वैधानिक नागरिकता का भेद, तथा राज्य की राय बनाम राज्य की सहमति जैसे भ्रमक विकल्प पूछे जा सकते हैं। पहले संविधान का स्थायी नियम समझें, फिर नागरिकता अधिनियम, 1955 के केवल स्थिर शीर्षक याद करें।

2. एक नजर में संवैधानिक नक्शा

भागअनुच्छेदमुख्य प्रश्नस्मरण सूत्र
भाग I1–4भारत का राज्यक्षेत्र क्या है और राज्यों में परिवर्तन कौन कर सकता है?राज्यक्षेत्र और पुनर्गठन
भाग II5–11संविधान लागू होने के समय कौन नागरिक था?संवैधानिक नागरिकता प्रावधान
संसदीय कानूननागरिकता अधिनियम, 1955संविधान लागू होने के बाद नागरिकता कैसे नियंत्रित होती है?वर्तमान कानून/नियम आधिकारिक स्रोत से जाँचें

3. भाग I: संघ और उसका राज्यक्षेत्र (अनुच्छेद 1–4)

अनुच्छेद 1 का आरम्भ है: “भारत, अर्थात् इंडिया, राज्यों का संघ होगा।” संविधान में “राज्यों का परिसंघ” शब्द नहीं है। भारत के राज्यक्षेत्र में (i) राज्यों के राज्यक्षेत्र, (ii) प्रथम अनुसूची में विनिर्दिष्ट संघ राज्यक्षेत्र और (iii) भविष्य में अर्जित किए जाने वाले राज्यक्षेत्र शामिल हैं। इसीलिए राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों के नाम के लिए प्रथम अनुसूची महत्त्वपूर्ण है।

संघ शब्द यह संकेत देता है कि भारत राज्यों के स्वैच्छिक समझौते से बना ऐसा ढाँचा नहीं है जिससे राज्य अलग हो सकें। प्रारंभिक परीक्षा में सुरक्षित उत्तर वही मूल वाक्य है—“राज्यों का संघ”।

4. अनुच्छेद 2, 3 और 4 का अंतर

अनुच्छेदसंसद क्या कर सकती है?परीक्षा में सावधानी
2ऐसी शर्तों पर नए राज्यों को संघ में सम्मिलित कर सकती है या स्थापित कर सकती है जिन्हें वह उचित समझे।नए राज्य का प्रवेश/स्थापना = अनुच्छेद 2।
3नया राज्य बना सकती है; राज्य का क्षेत्र बढ़ा या घटा सकती है; सीमा या नाम बदल सकती है।विधेयक के लिए राष्ट्रपति की सिफारिश और प्रभावित राज्य विधानमंडल से उसकी राय माँगने की प्रक्रिया।
4अनुच्छेद 2 या 3 के कानून को लागू करने के लिए पूरक, आनुषंगिक और परिणामस्वरूप उपबंध कर सकती है; प्रथम और चतुर्थ अनुसूची में बदलाव भी कर सकती है।ऐसा कानून अनुच्छेद 368 के लिए संविधान संशोधन नहीं माना जाता।

अनुच्छेद 3 की प्रक्रिया, क्रम से

परीक्षा-जाल: “राज्य की सहमति अनिवार्य है”—यह कथन गलत है। “प्रभावित राज्य विधानमंडल को राय व्यक्त करने का अवसर दिया जाता है”—यह संवैधानिक रूप से सही कथन है।

5. भ्रम दूर करने वाली समयरेखा

6. भाग II: नागरिकता (अनुच्छेद 5–11)

भाग II का मुख्य उद्देश्य संविधान लागू होने के समय नागरिकता का निर्णय करना था, विशेषकर विभाजन की पृष्ठभूमि में। यह आज की नागरिकता का पूर्ण नियम-पुस्तक नहीं है। अनुच्छेद 11 संसद को नागरिकता प्राप्त करने, समाप्त होने और उससे जुड़े सभी विषयों पर कानून बनाने की शक्ति देता है।

अनुच्छेदमुख्य प्रावधानयाद रखने का संकेत
5संविधान लागू होने के समय भारत में अधिवासित व्यक्ति की नागरिकता, यदि जन्म, माता-पिता या सामान्य निवास की निर्धारित शर्त भी पूरी हो।अधिवास + संवैधानिक संबंध
6पाकिस्तान से भारत आए कुछ व्यक्तियों की नागरिकता के अधिकार।भारत की ओर प्रवास
7पाकिस्तान चले गए कुछ प्रवासियों की नागरिकता के अधिकार; पुनर्वास या स्थायी वापसी परमिट वाला संवैधानिक अपवाद भी है।पाकिस्तान की ओर प्रवास
8भारत के बाहर रहने वाले भारतीय मूल के कुछ व्यक्तियों की नागरिकता, भारतीय राजनयिक या कौंसलीय प्रतिनिधि के समक्ष पंजीकरण पर।विदेश में भारतीय मूल
9जो व्यक्ति स्वेच्छा से विदेशी राज्य की नागरिकता ले लेता है, वह अनुच्छेद 5, 6 या 8 के आधार पर नागरिक नहीं होगा।स्वैच्छिक विदेशी नागरिकता
10संसद के बनाए कानून के अधीन नागरिकता अधिकारों का जारी रहना।निरंतरता
11नागरिकता को विनियमित करने की संसद की शक्ति।आगे का कानून संसद बनाएगी

अनुच्छेद 5 का मूल सूत्र

संविधान लागू होने के समय व्यक्ति का भारत के राज्यक्षेत्र में अधिवास होना चाहिए था और साथ ही वह भारत में जन्मा हो, उसके माता या पिता में से कोई भारत में जन्मा हो, अथवा वह संविधान लागू होने से ठीक पहले कम-से-कम पाँच वर्ष भारत में सामान्यतः निवास करता रहा हो। इसलिए अनुच्छेद 5 का सबसे महत्त्वपूर्ण शब्द है—अधिवास।

अनुच्छेद 6 और 7 विभाजन-काल से जुड़े विशेष प्रावधान हैं। इन्हें हर आधुनिक प्रवास प्रश्न पर लागू नहीं करना चाहिए। आज की पात्रता के लिए लागू अधिनियम, नियम और आधिकारिक अधिसूचना देखना आवश्यक है।

7. नागरिकता अधिनियम, 1955: परीक्षा के लिए स्थिर ढाँचा

अनुच्छेद 11 के आधार पर संसद ने नागरिकता अधिनियम, 1955 बनाया। BPSC के आधारभूत प्रश्न के लिए नागरिकता प्राप्ति के प्रमुख वैधानिक तरीके याद रखें: जन्म से, वंश से, पंजीकरण से, देशीयकरण से और राज्यक्षेत्र के भारत में सम्मिलन से। पात्रता की अवधि, कट-ऑफ तिथि और नियमों में बदलाव हो सकता है; ऐसे विवरण लिखने से पहले वर्तमान आधिकारिक पाठ जाँचें।

शब्दइस अध्याय में अर्थपरीक्षा-जाल
भारतीय नागरिकवह व्यक्ति जिसे संविधान या कानून के अनुसार भारत का नागरिक माना गया है।नागरिकता एक संवैधानिक-कानूनी स्थिति है।
OCI कार्डधारकपात्र प्रवासी व्यक्तियों के लिए नागरिकता अधिनियम और नियमों के अधीन एक स्थिति।OCI दोहरी नागरिकता नहीं है और कार्ड मात्र से कोई भारतीय नागरिक नहीं बन जाता।
एकल नागरिकताभारत में भारत की एक नागरिकता है।कुछ संघीय देशों की तरह अलग राज्य और संघ नागरिकता न लिखें।
राज्यक्षेत्र का सम्मिलनभारत में राज्यक्षेत्र के सम्मिलन से जुड़ा वैधानिक नागरिकता तरीका।इसे अनुच्छेद 3 के आंतरिक राज्य-पुनर्गठन से न मिलाएँ।

9. बिहार विशेष

बिहार प्रथम अनुसूची में वर्णित राज्य है। यदि अनुच्छेद 3 के तहत कोई प्रस्ताव बिहार के क्षेत्र, सीमा या नाम को प्रभावित करे, तो राष्ट्रपति बिहार विधानमंडल से उसकी राय माँगेगा; कानून बनाने की शक्ति संसद के पास रहेगी। बिहार की कोई अलग नागरिकता नहीं है।

13. अभ्यास: 20 BPSC प्रारंभिक परीक्षा-स्तर के बहुविकल्पीय प्रश्न