BPSC · Polity

मौलिक अधिकार

45 min read · Updated 5 Oct 2026

1. BPSC की माँग और पढ़ने की योजना

आधिकारिक BPSC पाठ्यक्रम में सामान्य अध्ययन के अंतर्गत भारतीय राजनीति और देश की राजनीतिक व्यवस्था का ज्ञान अपेक्षित है। मौलिक अधिकार से अनुच्छेद-मिलान, नागरिक और व्यक्ति का अंतर, युक्तियुक्त निर्बंधन, संस्था-प्रकार की तुलना, रिट/उपचार और संशोधन-आधारित भ्रमक प्रश्न महत्त्वपूर्ण हैं।

2. भाग III एक नजर में

समूहअनुच्छेदमूल विचार
सामान्य उपबंध12–13“राज्य” का अर्थ; मौलिक अधिकारों के असंगत कानून।
समता का अधिकार14–18समता, भेदभाव-निषेध, अवसर की समता, अस्पृश्यता और उपाधियों का अंत।
स्वतंत्रता का अधिकार19–22छह स्वतंत्रताएँ, आपराधिक विधि सुरक्षा, जीवन और दैहिक स्वतंत्रता, शिक्षा, गिरफ्तारी/निरोध।
शोषण के विरुद्ध अधिकार23–24मानव दुर्व्यापार, बेगार, बलात् श्रम और बाल सुरक्षा।
धर्म की स्वतंत्रता25–28अंतःकरण, धार्मिक आचरण, कर और धार्मिक शिक्षा।
सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार29–30भाषा/लिपि/संस्कृति और अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाएँ।
संवैधानिक उपचार32मौलिक अधिकार लागू कराने के लिए उच्चतम न्यायालय जाना।
विशेष उपबंध33–35बल, मार्शल लॉ और कुछ मामलों में संसद की विशेष विधायी शक्ति।

3. प्रवेश-द्वार अनुच्छेद: 12 और 13

अनुच्छेद 12 भाग III के लिए “राज्य” को परिभाषित करता है। इसमें भारत सरकार और संसद; प्रत्येक राज्य की सरकार और विधानमंडल; तथा भारत के राज्यक्षेत्र में या भारत सरकार के नियंत्रणाधीन सभी स्थानीय या अन्य प्राधिकारी शामिल हैं। इससे पता चलता है कि मौलिक अधिकार का दावा सामान्यतः किन सार्वजनिक प्राधिकारियों के विरुद्ध किया जा सकता है।

अनुच्छेद 13 मौलिक अधिकारों के ऊपर असंगत कानून को प्रधान नहीं रहने देता। संविधान-पूर्व कानून यदि भाग III से असंगत हो, तो वह असंगति की सीमा तक शून्य है। राज्य ऐसा कानून नहीं बनाएगा जो इन अधिकारों को छीनता या कम करता हो; ऐसा कानून उल्लंघन की सीमा तक शून्य है। “कानून” में अध्यादेश, आदेश, उपविधि, नियम, विनियम, अधिसूचना, रूढ़ि या प्रथा भी आ सकती है यदि उसमें कानून का बल हो।

4. समता का अधिकार: अनुच्छेद 14–18

अनुच्छेदक्या सुरक्षा देता है?याद रखने योग्य अंतर
14विधि के समक्ष समता और भारत में विधियों का समान संरक्षण।किसी भी व्यक्ति को, केवल नागरिक को नहीं।
15धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर केवल नागरिक के विरुद्ध भेदभाव निषिद्ध।लोक-स्थलों तक पहुँच और अनुमत विशेष उपबंध कथन-आधारित प्रश्नों में आते हैं।
16राज्य के अधीन नियोजन या पद के विषय में सभी नागरिकों के लिए अवसर की समता।लोक नियोजन; हर निजी नौकरी नहीं।
17अस्पृश्यता का अंत और किसी भी रूप में उसका आचरण निषिद्ध।उससे उपजी निर्योग्यता को लागू करना कानून द्वारा दंडनीय अपराध है।
18उपाधियों का अंत।राज्य द्वारा दी जाने वाली सैनिक और विद्या संबंधी उपाधियाँ अपवाद हैं।

अनुच्छेद 14 में दो जुड़े वाक्यांश हैं: विधि के समक्ष समता और विधियों का समान संरक्षण। प्रारंभिक परीक्षा के लिए यह न मानें कि हर अलग परिस्थिति वाले व्यक्ति के साथ बिल्कुल एक जैसा व्यवहार ही होगा। संविधान मनमाने भेदभाव को स्वीकार नहीं करता।

अनुच्छेद 15 नागरिक-केंद्रित है। यह राज्य को सूचीबद्ध आधारों पर केवल भेदभाव करने से रोकता है। इसके खंड महिलाओं, बच्चों और संवैधानिक रूप से मान्य वंचित वर्गों के लिए कुछ विशेष उपबंधों की अनुमति भी देते हैं। वर्तमान आरक्षण-विवाद में उत्तर लिखने से पहले वर्तमान संवैधानिक पाठ जाँचें।

अनुच्छेद 16 लोक नियोजन के लिए है। यह राज्य के अधीन नियोजन या नियुक्ति के मामले में सभी नागरिकों को अवसर की समता देता है। इसलिए “हर निजी नौकरी का अधिकार” वाला विकल्प गलत होगा।

5. स्वतंत्रता का अधिकार: अनुच्छेद 19–22

खंडस्वतंत्रतानिर्बंधन का संकेत
19(1)(a)वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रतानिर्बंधन केवल संविधान में लिखे आधारों पर, जैसे भारत की प्रभुता और अखंडता, राज्य की सुरक्षा, लोक व्यवस्था, शिष्टाचार या सदाचार।
19(1)(b)शांतिपूर्वक और निरायुध सभा करने की स्वतंत्रता“शांतिपूर्वक” और “निरायुध” मूल पाठ के शब्द हैं।
19(1)(c)संगम, संघ या सहकारी समितियाँ बनाने की स्वतंत्रतासंघ बनाने का अधिकार हर अपेक्षित परिणाम की गारंटी नहीं देता।
19(1)(d)भारत के राज्यक्षेत्र में स्वतंत्रतापूर्वक घूमने की स्वतंत्रतासामान्य जनता के हित या अनुसूचित जनजातियों के हित में युक्तियुक्त निर्बंधन हो सकता है।
19(1)(e)भारत के किसी भाग में निवास और बसने की स्वतंत्रताघूमने की स्वतंत्रता जैसे व्यापक निर्बंधन-आधार।
19(1)(g)कोई वृत्ति, उपजीविका, व्यापार या कारोबार करने की स्वतंत्रतापेशेवर अर्हताएँ और राज्य का व्यापार/कारोबार महत्त्वपूर्ण अपवाद हैं।

अनुच्छेद 19 की स्वतंत्रताएँ निरपेक्ष नहीं हैं। परीक्षा में विकल्प तब अधिक सही होता है जब उसमें युक्तियुक्त निर्बंधन और उसका संवैधानिक आधार हो। अनुच्छेद 19 केवल नागरिकों का अधिकार है, जबकि अनुच्छेद 20 और 21 में “कोई व्यक्ति” शब्द है।

अनुच्छेदसुरक्षापरीक्षा-योग्य तथ्य
20अपराध के लिए दोषसिद्धि संबंधी संरक्षण।पश्चात्वर्ती आपराधिक दोषसिद्धि/अधिक दंड नहीं; एक अपराध के लिए दो बार अभियोजन और दंड नहीं; स्वयं के विरुद्ध साक्षी बनने को बाध्य नहीं।
21जीवन और दैहिक स्वतंत्रता।विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही किसी व्यक्ति को इससे वंचित किया जा सकता है।
21Aशिक्षा का अधिकार।राज्य विधि द्वारा निर्धारित रीति से 6–14 वर्ष के सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देगा। 86वाँ संशोधन अधिनियम, 2002; प्रभावी 1 अप्रैल 2010।
22कुछ दशाओं में गिरफ्तारी और निरोध के विरुद्ध संरक्षण।गिरफ्तारी का आधार, अपनी पसंद के विधि-व्यवसायी से परामर्श, और यात्रा-समय छोड़कर 24 घंटे में निकटतम मजिस्ट्रेट के समक्ष पेशी—निर्धारित अपवादों के अधीन।

अनुच्छेद 20: क्रम से तीन कवच याद करें—पश्चात्वर्ती आपराधिक दोषसिद्धि/अधिक दंड नहीं, दोहरे दंड से सुरक्षा, और अपने विरुद्ध साक्षी बनने के लिए बाध्य न किया जाना। यह केवल नागरिक को नहीं, व्यक्ति को मिलता है।

अनुच्छेद 22: सामान्य गिरफ्तारी की सुरक्षा शत्रु विदेशी या निवारक निरोध के कानून के अधीन गिरफ्तार/निरुद्ध व्यक्ति पर उसी रूप में लागू नहीं होती। यह न लिखें कि अनुच्छेद 22 निवारक निरोध को समाप्त कर देता है; यह उसके लिए संवैधानिक शर्तें रखता है।

6. शोषण, धर्म, संस्कृति और शिक्षा: अनुच्छेद 23–30

अनुच्छेदनियमसामान्य भ्रम
23मानव दुर्व्यापार, बेगार और अन्य ऐसे बलात् श्रम का प्रतिषेध।राज्य लोक प्रयोजन के लिए निर्दिष्ट आधारों पर भेदभाव किए बिना अनिवार्य सेवा लगा सकता है।
2414 वर्ष से कम आयु के बालक को कारखाने, खान या परिसंकटमय नियोजन में नहीं लगाया जाएगा।संवैधानिक शब्द और आयु याद रखें; किसी दूसरे कानून की श्रेणी से न बदलें।
25अंतःकरण की स्वतंत्रता तथा धर्म को मानने, आचरण करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता।लोक व्यवस्था, सदाचार, स्वास्थ्य और भाग III के अन्य उपबंधों के अधीन।
26हर धार्मिक संप्रदाय या उसके विभाग को धार्मिक विषयों के प्रबंध के अधिकार।लोक व्यवस्था, सदाचार और स्वास्थ्य के अधीन।
27किसी व्यक्ति को ऐसे कर के भुगतान के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता जिसकी आय किसी विशेष धर्म/संप्रदाय को बढ़ावा देने या बनाए रखने के लिए विशेष रूप से विनियोजित हो।यह उसी विशेष विनियोजन वाले कर की बात है।
28कुछ शिक्षा-संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा/उपासना।पूर्णतः राज्य निधि से पोषित संस्था में धार्मिक शिक्षा नहीं; राज्य द्वारा प्रशासित, पर न्यास/विन्यास से स्थापित संस्था का नियम अलग है।
29विशिष्ट भाषा, लिपि या संस्कृति का संरक्षण; राज्य-पोषित/सहायता-प्राप्त संस्थाओं में प्रवेश पर निर्दिष्ट भेदभाव से सुरक्षा।अनुच्छेद 29(1) केवल अल्पसंख्यक के लिए नहीं, नागरिकों के किसी वर्ग के लिए है।
30धार्मिक या भाषाई अल्पसंख्यक अपनी पसंद की शिक्षा-संस्थाएँ स्थापित और प्रशासित कर सकते हैं।अनुच्छेद 29 और 30 एक ही बात नहीं हैं।

7. उपचार और विशेष उपबंध: अनुच्छेद 32–35

अनुच्छेद 32 भाग III के अधिकार लागू कराने के लिए उपयुक्त कार्यवाही द्वारा उच्चतम न्यायालय जाने के अधिकार की गारंटी देता है। उच्चतम न्यायालय बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, अधिकार-पृच्छा और उत्प्रेषण जैसे निर्देश, आदेश या रिट जारी कर सकता है। रिटों की विस्तृत तुलना अगले “रिट” अध्याय में है; यहाँ अनुच्छेद 32 का संबंध याद रखें।

अनुच्छेद 33 संसद को कानून द्वारा यह तय करने देता है कि सशस्त्र बलों, लोक व्यवस्था बनाए रखने वाले बलों, गुप्तचर/प्रतिगुप्तचर संगठनों और संबंधित व्यवस्थाओं पर मौलिक अधिकार किस सीमा तक लागू होंगे, ताकि कर्तव्य और अनुशासन बना रहे। अनुच्छेद 34 किसी क्षेत्र में मार्शल लॉ लागू होने पर अधिकारों के निर्बंधन से जुड़ा है। अनुच्छेद 35 कुछ निर्दिष्ट भाग III मामलों में विधि बनाने की शक्ति संसद को देता है; उन मामलों में राज्य विधानमंडल कानून नहीं बना सकता।

8. संशोधन और पुनरावृत्ति समयरेखा

10. बिहार विशेष

ये अधिकार बिहार में भी उसी प्रकार लागू होते हैं जैसे पूरे भारत में। बिहार सरकार, बिहार विधानमंडल, स्थानीय प्राधिकारी और अन्य योग्य सार्वजनिक प्राधिकारी भाग III के लिए अनुच्छेद 12 की व्यवस्था में आते हैं। शासन से जुड़े प्रश्न में मौलिक अधिकार लागू कराने के दावे और किसी राज्य नीति की प्राथमिकता में अंतर करें। किसी स्थानीय या बिहार-विशेष मामले में संविधान का नियम यही रहेगा, पर उसके तथ्य और लागू कानून अलग से सत्यापित करने होंगे।

14. अभ्यास: 20 BPSC प्रारंभिक परीक्षा-स्तर के बहुविकल्पीय प्रश्न