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संविधान-निर्माण, संविधान सभा और प्रस्तावना

35 min read · Updated 5 Oct 2026

संविधान-निर्माण, संविधान सभा और प्रस्तावना

BPSC प्रारंभिक परीक्षा की मांग

इस अध्याय को पूरी राजव्यवस्था की नींव समझें। BPSC स्तर के प्रश्नों में संवैधानिक घटनाओं का क्रम, संविधान सभा के पदाधिकारी, संविधान अंगीकृत होने और लागू होने का अंतर, प्रस्तावना के सटीक शब्द तथा 42वें संशोधन के परिवर्तन पूछे जा सकते हैं। तथ्यों को जोड़ी में याद रखें: 9 दिसम्बर 1946—पहली सभा; 29 अगस्त 1947—प्रारूप समिति; 26 नवम्बर 1949—अंगीकरण; 26 जनवरी 1950—प्रवर्तन।

यहाँ अवधारणाओं का आधार NCERT है। संविधान के सटीक शब्द और तिथियों के लिए संविधान-पाठ तथा संसद के संविधान सभा अभिलेख देखे गए हैं। ऐतिहासिक तथ्य और वर्तमान संवैधानिक स्थिति को एक जैसा न मानें।

1. किसी देश को संविधान की आवश्यकता क्यों होती है?

NCERT के अनुसार संविधान उन बुनियादी नियमों का सर्वोच्च ढाँचा है, जिनके अनुसार नागरिक और सरकार चलती है। वह केवल संस्थाओं का वर्णन नहीं करता। वह सार्वजनिक शक्ति की सीमा तय करता है, संस्थाओं के बीच अधिकार बाँटता है, अधिकारों के माध्यम से लोगों की रक्षा करता है और विविध समाज को साझा दिशा देता है।

2. 1946 से पहले की जरूरी संवैधानिक पृष्ठभूमि

3. संविधान सभा: गठन और कार्य

बिंदुसही समझभ्रम से बचें
आधारसंविधान सभा कैबिनेट मिशन योजना, 1946 के अंतर्गत बनी।यह माउंटबेटन योजना के अंतर्गत नहीं बनी थी।
चुनाव की विधिब्रिटिश भारतीय प्रांतों के प्रतिनिधि प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से चुने गए; रियासतों के प्रतिनिधित्व की व्यवस्था अलग थी।इसे सार्वभौम वयस्क मताधिकार से प्रत्यक्ष चुनी सभा न कहें।
पहली बैठक9 दिसम्बर 1946, संविधान भवन, नई दिल्ली।26 जनवरी 1950 संविधान लागू होने की तिथि है, पहली बैठक की नहीं।
अस्थायी अध्यक्षडॉ. सच्चिदानंद सिन्हा।वे स्थायी अध्यक्ष नहीं थे।
स्थायी अध्यक्षडॉ. राजेन्द्र प्रसाद।डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने संविधान सभा नहीं, प्रारूप समिति की अध्यक्षता की थी।
प्रारूप समिति29 अगस्त 1947 को गठित; अध्यक्ष डॉ. बी. आर. अम्बेडकर।इस तिथि को 1946 या 1949 से न मिलाएँ।

4. संविधान-निर्माण का कालक्रम: तिथियाँ अलग नहीं, क्रम में पढ़ें

5. उद्देश्य प्रस्ताव का महत्व

जवाहरलाल नेहरू ने 13 दिसम्बर 1946 को उद्देश्य प्रस्ताव रखा और 22 जनवरी 1947 को यह स्वीकार किया गया। जन-संप्रभुता, न्याय, समानता, स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के संरक्षण जैसी इसकी धारणाओं ने प्रस्तावना के दर्शन को आकार दिया। वस्तुनिष्ठ प्रश्न में उद्देश्य प्रस्ताव को जवाहरलाल नेहरू से जोड़ें, प्रारूप समिति के अध्यक्ष से नहीं।

6. प्रस्तावना: भारत की संवैधानिक पहचान

प्रस्तावना “हम भारत के लोग” से आरंभ होती है। इसका अर्थ है कि संविधान का अधिकार-स्रोत जनता है, न कि कोई सम्राट, संसद, न्यायालय या विदेशी शक्ति। यह भारत को सम्पूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक, गणराज्य बताती है और न्याय, स्वतंत्रता, समता तथा बंधुता के लक्ष्य घोषित करती है।

7. 42वाँ संशोधन और प्रस्तावना

42वें संशोधन से पहले42वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 के बादयाद रखें
“सम्पूर्ण प्रभुत्व-संपन्न लोकतंत्रात्मक गणराज्य”“सम्पूर्ण प्रभुत्व-संपन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य”समाजवादी और पंथनिरपेक्ष जोड़े गए।
“राष्ट्र की एकता”“राष्ट्र की एकता और अखंडता”अखंडता जोड़ी गई।

8. बिहार का संबंध

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, जो आगे चलकर स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति बने, संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष थे। बिहार से जुड़े डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा ने पहली बैठक में अस्थायी अध्यक्ष की भूमिका निभाई। ये दोनों बिहार-विशेष संवैधानिक तथ्य हैं। इन्हें डॉ. बी. आर. अम्बेडकर से न मिलाएँ, जो प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे।

20 BPSC प्रारंभिक परीक्षा-स्तर बहुविकल्पीय प्रश्न