BPSC · Polity

पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक अधिकार

115 min read · Updated 5 Oct 2026

1. BPSC की माँग: सही समस्या के लिए सही उपाय पहचानें

सूचना का अधिकार आवेदन किसी लोक प्राधिकारी के पास उपलब्ध या उसके नियंत्रण में रखी सूचना माँगता है; सामान्यतः वह अधिकारी को नया स्पष्टीकरण बनाने के लिए बाध्य नहीं करता। लोकपाल और लोकायुक्त अपने अधिकार-क्षेत्र के भ्रष्टाचार आरोपों की जाँच करते हैं। सामाजिक अंकेक्षण में समुदाय अभिलेखों और धरातल पर हुए काम का मिलान करता है। नागरिक अधिकार-पत्र सेवा-मानक घोषित करता है, किंतु सामान्यतः किसी अलग कानून का आधार मिलने पर ही वह प्रवर्तनीय कानूनी गारंटी बनता है। बिहार का लोक सेवाओं का अधिकार कानून अधिसूचित सेवाओं से संबंधित है, जबकि बिहार का लोक शिकायत कानून सुनवाई और कारणयुक्त निवारण का मार्ग देता है।

हर व्यवस्था में छह बातें पूछें—स्रोत, उपयोगकर्ता, उपाय, समय-सीमा, सक्षम प्राधिकारी और निर्णय का कानूनी प्रभाव। BPSC इनमें से केवल एक बात बदलकर कथन को गलत बना सकता है।

2. शासन की मूल अवधारणाएँ

अवधारणाअर्थप्रमुख साधन
पारदर्शितानिर्णय, अभिलेख, मानक और व्यय इस प्रकार खुले हों कि उनकी जाँच हो सके।स्वतः प्रकटीकरण, सूचना का अधिकार, मुक्त आँकड़े
जवाबदेहीप्राधिकारी अपने आचरण का कारण बताए और सुधार, अपील, दंड या संस्थागत जाँच का सामना करे।विधायिका, अंकेक्षण, न्यायालय, आयोग, लोकपाल
भागीदारीलोग निष्क्रिय लाभार्थी न रहकर सार्वजनिक निर्णयों को प्रभावित करें या उनकी निगरानी करें।ग्राम सभा, परामर्श, सामाजिक अंकेक्षण
उत्तरदायित्वपूर्ण प्रतिक्रियाप्रशासन आवश्यकता और शिकायत का उत्तर उचित या निर्धारित समय में दे।नागरिक अधिकार-पत्र, शिकायत व्यवस्था, सेवा-गारंटी कानून
विधि का शासनलोक शक्ति ज्ञात कानून, समानता और समीक्षा के अधीन प्रयुक्त हो।कारणयुक्त आदेश, अपील, न्यायिक पुनरावलोकन

3. महत्त्वपूर्ण कालक्रम

तिथिघटना
1975उत्तर प्रदेश राज्य बनाम राज नारायण में उच्चतम न्यायालय ने खुले शासन को जनता के जानने के अधिकार से जोड़ा।
1997प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग ने संघीय प्रशासन में नागरिक अधिकार-पत्र पहल का समन्वय किया।
12 अक्तूबर 2005सूचना का अधिकार अधिनियम के अधिकांश कार्यकारी प्रावधान लागू हुए।
15 अगस्त 2011बिहार लोक सेवाओं का अधिकार अधिनियम लागू हुआ।
16 जनवरी 2014लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 लागू हुआ।
5 जून 2016बिहार की लोक शिकायत निवारण व्यवस्था लागू की गई।
24 अक्तूबर 2019सूचना का अधिकार संशोधन अधिनियम लागू हुआ; 2019 के नियम सूचना आयुक्तों के लिए तीन वर्ष का कार्यकाल निर्धारित करते हैं।
13 नवंबर 2025डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम की धारा 44(3) लागू हुई और सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(j) बदली गई।
1 जुलाई 2026VB–G RAM G अधिनियम, 2025 पूरे भारत में लागू हुआ और मनरेगा निरस्त हो गया।

4. जानने का अधिकार और सूचना का अधिकार की नींव

प्रावधानपरीक्षोपयोगी अर्थ
अनुच्छेद 19(1)(a)उच्चतम न्यायालय ने सूचना पाने या जानने के अधिकार को वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का भाग माना है। यह अधिकार निरपेक्ष नहीं है।
धारा 3अधिनियम के अधीन सभी नागरिकों को सूचना का अधिकार है।
धारा 2(f): सूचनाकिसी भी रूप में सामग्री—अभिलेख, दस्तावेज, ई-मेल, मत, सलाह, आदेश, संविदा, प्रतिवेदन, नमूना, मॉडल और इलेक्ट्रॉनिक आँकड़े; साथ ही ऐसी निजी संस्था की सूचना जिसे कोई लोक प्राधिकारी किसी अन्य कानून के अधीन प्राप्त कर सकता है।
धारा 2(h): लोक प्राधिकारीसंविधान, संसद या राज्य के कानून अथवा सरकारी अधिसूचना/आदेश से स्थापित निकाय; सरकार के स्वामित्व, नियंत्रण या पर्याप्त वित्त-पोषण वाले निकाय और पर्याप्त वित्त-पोषित गैर-सरकारी संगठन भी शामिल।
धारा 2(j): सूचना का अधिकारकार्य, दस्तावेज और अभिलेख का निरीक्षण; प्रमाणित प्रति या उद्धरण; सामग्री का प्रमाणित नमूना; तथा इलेक्ट्रॉनिक रूप में सूचना।

5. धारा 4: आवेदन से पहले पारदर्शिता

कर्तव्यविषय
अभिलेख प्रबंधनअभिलेखों की सूची और अनुक्रमण तैयार करना; संसाधनों के अनुसार उपयुक्त अभिलेखों का संगणकीकरण और नेटवर्क से जुड़ाव।
धारा 4(1)(b)संगठन/कार्य, शक्तियाँ/कर्तव्य, निर्णय-प्रक्रिया, मानदंड, नियम-पुस्तिकाएँ, दस्तावेज-वर्ग, परामर्श, मंडल/समितियाँ, निर्देशिका, पारिश्रमिक, बजट, अनुदान, रियायतें, इलेक्ट्रॉनिक सूचना और लोक सूचना अधिकारी सहित सत्रह श्रेणियों का प्रकाशन।
अद्यतननिर्धारित संस्थागत जानकारियों को प्रत्येक वर्ष अद्यतन किया जाना है।
धारा 4(2)विभिन्न माध्यमों से नियमित रूप से अधिकतम सूचना देना, ताकि व्यक्तिगत आवेदनों की आवश्यकता न्यूनतम हो।
कारण बतानाप्रभावित व्यक्तियों को प्रशासनिक या अर्ध-न्यायिक निर्णयों के कारण दिए जाने चाहिए।

7. अपवाद, लोकहित और पृथक्करणीयता

प्रावधानमुख्य नियम
धारा 8(1)संप्रभुता/सुरक्षा, न्यायालय द्वारा निषिद्ध सामग्री, विशेषाधिकार, वाणिज्यिक गोपनीयता, वैश्वासिक सामग्री, विदेशी सरकार से गोपनीय सूचना, व्यक्ति/स्रोत की सुरक्षा, अन्वेषण, मंत्रिमंडलीय कागजात और व्यक्तिगत सूचना जैसे निर्दिष्ट हितों की रक्षा।
धारा 8(2)राजकीय गुप्त बात अधिनियम और धारा 8 के अपवादों के बावजूद, यदि प्रकटीकरण का लोकहित संरक्षित हित को होने वाली हानि से अधिक हो तो सूचना दी जा सकती है।
धारा 10अपवर्जित अंश को उचित रूप से अलग किया जा सके तो शेष गैर-अपवर्जित भाग पृथक्करण की सूचना के साथ देना होगा।
धारा 24सूचीबद्ध आसूचना/सुरक्षा संगठन सामान्यतः बाहर हैं, किंतु भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप अपवाद हैं। मानवाधिकार सूचना के लिए आयोग की स्वीकृति और 45 दिन की सीमा है।

9. शिकायत, अपील और दंड

मार्गनियम
धारा 18 की शिकायतलोक सूचना अधिकारी की नियुक्ति न होना, आवेदन लेने से इनकार, सूचना से मना करना, उत्तर न देना, अनुचित शुल्क, अधूरी/भ्रामक सूचना या अन्य बाधा की शिकायत आयोग सुन सकता है।
प्रथम अपीलसामान्यतः 30 दिनों में लोक सूचना अधिकारी से वरिष्ठ अधिकारी के समक्ष; निस्तारण 30 दिन में, लिखित कारण से अधिकतम 45 दिन।
द्वितीय अपीलसामान्यतः 90 दिनों में केंद्रीय या राज्य सूचना आयोग के समक्ष; पर्याप्त कारण पर विलंब क्षम्य।
प्रमाण का भारअपील में अस्वीकृति उचित थी, यह सिद्ध करने का भार लोक सूचना अधिकारी पर है।
धारा 20आवेदन मिलने या सूचना देने तक ₹250 प्रतिदिन, अधिकतम ₹25,000; पहले सुनवाई का उचित अवसर। निरंतर विफलता पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति हो सकती है।

10. केंद्रीय और राज्य सूचना आयोग

बिंदुकेंद्रीय आयोगराज्य आयोग
संरचनामुख्य सूचना आयुक्त + अधिकतम 10 सूचना आयुक्तराज्य मुख्य सूचना आयुक्त + अधिकतम 10 राज्य सूचना आयुक्त
नियुक्तिराष्ट्रपतिराज्यपाल
संस्तुति समितिप्रधानमंत्री (अध्यक्ष), लोकसभा में विपक्ष के नेता, प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्रिमंडल का मंत्रीमुख्यमंत्री (अध्यक्ष), विधानसभा में विपक्ष के नेता, मुख्यमंत्री द्वारा नामित राज्य मंत्रिमंडल का मंत्री
योग्यताविधि, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, समाज सेवा, प्रबंधन, पत्रकारिता, जनसंचार, प्रशासन या शासन में व्यापक ज्ञान/अनुभव वाला प्रतिष्ठित व्यक्ति
प्रतिबंधसांसद/विधायक, लाभ का पद, राजनीतिक दल से संबंध, व्यापार या पेशा नहीं
कार्यकाल2019 के नियमों के अनुसार तीन वर्ष; 65 वर्ष की वैधानिक अधिकतम आयु बनी हुई है

11. लोकपाल: संरचना, नियुक्ति और कार्यकाल

बिंदु2013 के अधिनियम का नियम
प्रकृतिसंघ स्तर की वैधानिक भ्रष्टाचार-रोधी संस्था; संवैधानिक निकाय नहीं।
संरचनाअध्यक्ष और अधिकतम आठ सदस्य।
प्रतिनिधित्वसदस्यों में 50% न्यायिक सदस्य; कम-से-कम 50% सदस्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और महिलाओं में से।
नियुक्तिचयन समिति की संस्तुति पर राष्ट्रपति।
चयन समितिप्रधानमंत्री (अध्यक्ष), लोकसभा अध्यक्ष, लोकसभा में विपक्ष के नेता, भारत के मुख्य न्यायाधीश या उनके द्वारा नामित उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश, और विधि के अनुसार नामित प्रतिष्ठित विधिवेत्ता।
कार्यकालपद ग्रहण से पाँच वर्ष या 70 वर्ष की आयु, जो पहले हो।
तंत्रजाँच शाखा और अभियोजन शाखा; व्यय भारत की संचित निधि पर भारित।

12. लोकपाल का अधिकार-क्षेत्र और सुरक्षाएँ

क्षेत्रनियम
दायराअधिनियम की शर्तों के अधीन प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सांसद, संघ के समूह A से D तक के लोक सेवक और सार्वजनिक/विदेशी धन पाने वाले निर्दिष्ट व्यक्ति या संस्थाएँ।
प्रधानमंत्री से जुड़े अपवर्जित विषयअंतरराष्ट्रीय संबंध, बाहरी/आंतरिक सुरक्षा, लोक व्यवस्था, परमाणु ऊर्जा या अंतरिक्ष से संबंधित आरोपों की जाँच नहीं।
प्रधानमंत्री के लिए विशेष प्रक्रियाअन्य जाँच पर पूर्ण पीठ विचार करेगी और कम-से-कम दो-तिहाई सदस्य स्वीकृति देंगे; कार्यवाही बंद कक्ष में होगी और खारिज शिकायत के अभिलेख प्रकाशित नहीं होंगे।
सांसद की सुरक्षासंसद में कही बात या दिए गए मत से जुड़ा विषय अनुच्छेद 105(2) के कारण लोकपाल जाँच से बाहर।
समय-सीमाकथित अपराध की तिथि से सात वर्ष बाद की गई शिकायत पर जाँच नहीं।
प्रतिवेदनवार्षिक प्रतिवेदन राष्ट्रपति को और फिर संसद के दोनों सदनों के समक्ष; सलाह न मानने पर कारण।

13. लोकपाल, राज्य लोकायुक्त और सूचना आयोग

बिंदुलोकपाललोकायुक्तकेंद्रीय/राज्य सूचना आयोग
मुख्य विषयसंघ स्तर का निर्दिष्ट भ्रष्टाचारराज्य कानून में निर्धारित भ्रष्टाचार/कुशासनसूचना तक पहुँच
स्रोत2013 का अधिनियमसंबंधित राज्य कानूनसूचना का अधिकार अधिनियम, 2005
प्रकृतिवैधानिकवैधानिकवैधानिक
एकरूपताकेंद्रीय स्वरूपराज्य के अनुसार भिन्नअधिनियम में केंद्रीय/राज्य संरचना

15. सामाजिक अंकेक्षण और वित्तीय अंकेक्षण

सामाजिक अंकेक्षणवित्तीय/अनुपालन अंकेक्षण
समुदाय और लाभार्थी सरकारी अभिलेख का सेवा तथा धरातलीय स्थिति से मिलान करते हैं।पेशेवर/वैधानिक अंकेक्षक लेखे, नियमितता, अनुपालन और निष्पादन जाँचते हैं।
हाजिरी-पंजी, बिल, रसीद, माप पुस्तिका, स्थल-जाँच और सार्वजनिक चर्चा का उपयोग।अंकेक्षण साक्ष्य और मानकों का उपयोग; अंत में संस्थागत प्रतिवेदन।
भागीदारी और स्थानीय जवाबदेही पर बल।स्वतंत्र तकनीकी जाँच पर बल।
वैधानिक अंकेक्षण, अन्वेषण या मुकदमे का स्थान नहीं लेता।सामुदायिक सत्यापन का स्थान नहीं लेता।

17. नागरिक अधिकार-पत्र, सेवोत्तम और CPGRAMS

व्यवस्थापरीक्षोपयोगी नियम
नागरिक अधिकार-पत्रदृष्टि/ध्येय, कार्य, उपयोगकर्ता, सेवाएँ, मानक/समय-सीमा, शिकायत मार्ग और उपयोगकर्ता से अपेक्षाओं की सार्वजनिक प्रतिबद्धता। यह अपने-आप प्रवर्तनीय वैधानिक अधिकार नहीं बनता।
सेवोत्तमतीन भाग—नागरिक/सेवार्थी अधिकार-पत्र, लोक शिकायत निवारण और सेवा-प्रदान क्षमता।
CPGRAMSपंजीकरण संख्या, स्थिति-जाँच, प्रतिक्रिया और अपील सुविधा वाला चौबीसों घंटे उपलब्ध केंद्रीय ऑनलाइन शिकायत मंच।
परामर्शी समय-सीमा2024 के दिशा-निर्देश 21 दिनों में निवारण की सलाह देते हैं; अधिक समय लगे तो कारण और अपेक्षित समय वाला अंतरिम उत्तर। अपील सामान्यतः 30 दिनों में।
बाहर के विषयसूचना का अधिकार, न्यायालयाधीन/न्यायालय संबंधी, धार्मिक और निर्दिष्ट सरकारी कर्मचारी सेवा-विषय।

19. नागरिक किस द्वार पर जाए?

आवश्यकताउपयुक्त मार्ग
पहले से उपलब्ध स्वीकृति आदेश की प्रमाणित प्रतिसूचना का अधिकार
बिहार में अधिसूचित प्रमाणपत्र समय पर पानाबिहार लोक सेवाओं का अधिकार
बिहार की निर्धारित शिकायत की सुनवाई और कारणयुक्त निवारणबिहार लोक शिकायत कानून
संघ के अधिकार-क्षेत्र वाले पदाधिकारी पर भ्रष्टाचार आरोपलोकपाल
हाजिरी-पंजी और कार्यस्थल का सामुदायिक मिलानग्राम सभा का सामाजिक अंकेक्षण
केंद्रीय विभाग की सामान्य सेवा शिकायतCPGRAMS

24. BPSC-शैली अभ्यास: ठीक 20 बहुविकल्पीय प्रश्न