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राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति

50 min read · Updated 5 Oct 2026

1. बीपीएससी की मांग और पढ़ने की राह

अधिक पूछे जाने वाले प्रश्न दोनों निर्वाचक मंडलों, मत-मूल्य, योग्यताओं, त्यागपत्र, शपथ, रिक्ति, पद से हटाने, विधेयक पर अनुमति, अध्यादेश और क्षमादान शक्ति की तुलना करते हैं। अनुच्छेद-क्रम याद करें, लेकिन कथनों को इन चार कसौटियों पर जाँचें:

2. अनुच्छेद मानचित्र

अनुच्छेदविषयस्मृति-संकेत
52–53राष्ट्रपति; संघ की कार्यपालिका शक्ति और रक्षा बलों का सर्वोच्च समादेश।पद + कार्यपालिका शक्ति
54–55निर्वाचक मंडल, मत-मूल्य, एकल संक्रमणीय मत द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व और गुप्त मतदान।राष्ट्रपति का चुनाव
56–62कार्यकाल, पुनर्निर्वाचन, योग्यता, पद की शर्तें, शपथ, महाभियोग और रिक्ति।राष्ट्रपति का पदकाल
63–65उपराष्ट्रपति, राज्यसभा की सभापतिता और राष्ट्रपति के रूप में कार्य/कृत्यों का निर्वहन।दो भूमिकाएँ
66–69उपराष्ट्रपति का चुनाव, योग्यता, कार्यकाल, पद से हटाना, रिक्ति और शपथ।उपराष्ट्रपति का पदकाल
70–71अन्य आकस्मिकताएँ; चुनाव-विवादों का उच्चतम न्यायालय द्वारा अंतिम निर्णय।निरंतरता + विवाद
72राष्ट्रपति की दया/क्षमादान शक्ति।सैन्य न्यायालय, संघ क्षेत्र, मृत्युदंड

3. संवैधानिक स्थिति: नाममात्र प्रमुख और संसदीय कार्यपालिका

अनुच्छेद 53 संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित करता है, जिसका प्रयोग संविधान के अनुसार होता है। अनुच्छेद 74 प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद को राष्ट्रपति की सहायता और सलाह के लिए रखता है। राष्ट्रपति किसी सलाह पर एक बार पुनर्विचार मांग सकता है, किंतु पुनर्विचार के बाद दी गई सलाह के अनुसार कार्य करना होता है। इसलिए राष्ट्रपति के नाम से व्यक्त शक्ति सामान्यतः व्यक्तिगत राष्ट्रपति शासन नहीं है।

अनुच्छेद 77 के अधीन भारत सरकार की सभी कार्यपालिका कार्रवाई राष्ट्रपति के नाम से व्यक्त होती है। अनुच्छेद 78 के अधीन प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद के निर्णय बताता और मांगी गई सूचना देता है। इससे राष्ट्रपति को सूचित रहने तथा परामर्श या चेतावनी देने की संवैधानिक भूमिका मिलती है, पर भारत राष्ट्रपति-शासन प्रणाली नहीं बनता।

4. राष्ट्रपति का चुनाव: अनुच्छेद 54–55

शामिलशामिल नहीं
लोकसभा और राज्यसभा के निर्वाचित सदस्यसंसद के किसी भी सदन के मनोनीत सदस्य
राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यराज्य विधान परिषदों के निर्वाचित और मनोनीत—दोनों प्रकार के सदस्य
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और पुडुचेरी विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यविधानसभाओं के मनोनीत सदस्य

5. मत-मूल्य: हर मतपत्र का संख्यात्मक मूल्य समान क्यों नहीं?

निर्वाचकसूत्र/नियमउद्देश्य
निर्वाचित विधायकराज्य की जनसंख्या ÷ विधानसभा के निर्वाचित सदस्य; प्राप्त भागफल में 1,000 के जितने पूरे गुणज हों, उतना मत-मूल्य। शेष कम-से-कम 500 हो तो एक और जोड़ें।जनसंख्या को महत्व देते हुए राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व की एकरूपता।
निर्वाचित सांसदसभी राज्यों के निर्वाचित विधायकों का कुल मत-मूल्य ÷ संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यों की कुल संख्या; आधे से अधिक भिन्न को एक और अन्य भिन्न को छोड़ दिया जाता है।समस्त राज्यों और संघ के बीच समतुल्यता।

6. राष्ट्रपति की योग्यता, नामांकन और पद की शर्तें

अनुच्छेद 58 के अनुसार प्रत्याशी भारत का नागरिक हो, 35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो, लोकसभा के सदस्य के रूप में चुने जाने योग्य हो और संघ, राज्य अथवा उनके नियंत्रण वाली स्थानीय/अन्य प्राधिकारी के अधीन लाभ का अयोग्यकारी पद न रखता हो। केवल राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यपाल या संघ/राज्य मंत्री होने के कारण व्यक्ति को इस नियम में लाभ का पद धारण करने वाला नहीं माना जाता।

चुनाव कानून और निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया के अनुसार वैध राष्ट्रपति-नामांकन के लिए कम-से-कम 50 निर्वाचक प्रस्तावक और अन्य 50 निर्वाचक समर्थक तथा ₹15,000 की जमानत राशि चाहिए। ये संख्या वैधानिक चुनाव-तथ्य हैं, अनुच्छेद 58 की संवैधानिक योग्यताएँ नहीं।

पद ग्रहण करने पर राष्ट्रपति संसद या राज्य विधानमंडल का सदस्य नहीं रह सकता; उसकी सीट रिक्त मानी जाती है। वह कोई अन्य लाभ का पद नहीं रख सकता। कार्यकाल में उसके वेतन और भत्ते घटाए नहीं जा सकते।

7. कार्यकाल, शपथ, त्यागपत्र और रिक्ति

बिंदुनियम
कार्यकालपद ग्रहण की तारीख से पाँच वर्ष; उत्तराधिकारी के पद ग्रहण तक पद पर बना रहता है।
पुनर्निर्वाचनअनुच्छेद 57 पुनर्निर्वाचन की अनुमति देता है; संविधान दो कार्यकाल की सीमा नहीं रखता।
त्यागपत्रउपराष्ट्रपति को लिखित त्यागपत्र; उपराष्ट्रपति उसे लोकसभा अध्यक्ष को सूचित करता है।
शपथभारत के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष, और अनुपस्थिति में उपलब्ध उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश के समक्ष; संविधान और विधि का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण तथा जनता की सेवा और कल्याण।
सामान्य रिक्तिवर्तमान कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव पूरा होना चाहिए।
आकस्मिक रिक्तियथाशीघ्र और अधिकतम छह माह में चुनाव; निर्वाचित व्यक्ति को पूरा पाँच वर्षीय कार्यकाल मिलता है, पूर्ववर्ती का शेष कार्यकाल नहीं।

8. राष्ट्रपति का महाभियोग: अनुच्छेद 61

9. राष्ट्रपति की शक्तियाँ

वर्गमुख्य शक्तियाँसीमा/आधार
कार्यपालिका और नियुक्तियाँप्रधानमंत्री और उसकी सलाह पर अन्य मंत्रियों की नियुक्ति; संबंधित अनुच्छेदों के अनुसार राज्यपाल, महान्यायवादी, नियंत्रक-महालेखापरीक्षक, न्यायाधीश और अन्य संवैधानिक पदों पर नियुक्ति।अनुच्छेद 53, 74–78 और संबंधित पदों के अनुच्छेद; सामान्यतः सहायता और सलाह पर।
विधायीसंसद का अंग; सदनों को बुलाना/सत्रावसान, लोकसभा भंग करना, संसद को संबोधित करना, राज्यसभा में 12 सदस्यों को मनोनीत करना, विधेयकों पर कार्रवाई और अध्यादेश।अनुच्छेद 79, 80, 85–87, 111 और 123।
वित्तीयवार्षिक वित्तीय विवरण रखवाना; अनुदान की मांग हेतु सिफारिश; निर्दिष्ट वित्तीय विधेयकों हेतु सिफारिश; वित्त आयोग की स्थापना।अनुच्छेद 112–117 और 280।
न्यायिक/दयाअनुच्छेद 72 के मामलों में क्षमा, प्रविलंबन, विराम, परिहार, निलंबन या लघुकरण।सैन्य न्यायालय; संघ की कार्यपालिका सीमा; प्रत्येक मृत्युदंड।
सैन्य और राजनयिकरक्षा बलों का सर्वोच्च समादेश राष्ट्रपति में निहित; औपचारिक राजनयिक कार्य संवैधानिक कार्यपालिका ढाँचे में।अनुच्छेद 53(2): सर्वोच्च समादेश का प्रयोग विधि द्वारा विनियमित।
आपातशर्तें पूरी होने पर अनुच्छेद 352, 356 और 360 की उद्घोषणाएँ।संसदीय और संवैधानिक सुरक्षा उपाय; विषय 7 में विस्तार।

10. विधेयकों पर अनुमति: अनुच्छेद 111

विधेयकसंवैधानिक स्थिति
साधारण विधेयकअनुमति देना, अनुमति रोकना या पुनर्विचार संदेश के साथ एक बार लौटाना। दोनों सदन संशोधन सहित या बिना फिर पारित करें तो राष्ट्रपति अनुमति नहीं रोक सकता।
धन विधेयकअनुमति दे या रोक सकता है, पर अनुच्छेद 111 के परंतुक के अधीन लौटा नहीं सकता।
अनुच्छेद 368 के अधीन विधिवत पारित संविधान संशोधन विधेयकराष्ट्रपति अनुमति देगा; साधारण विधेयक वाली लौटाने/रोकने की पसंद लागू नहीं।

11. अध्यादेश शक्ति: अनुच्छेद 123

बिंदुनियम
कब?जब दोनों सदन सत्र में न हों और तत्काल कार्रवाई आवश्यक हो। अर्थात एक या दोनों सदन सत्र में न हों।
प्रभावसंसद के अधिनियम जैसी शक्ति और प्रभाव, पर संवैधानिक सीमाओं के अधीन।
विधायी क्षमताजिस उपबंध को संसद संविधान के अनुसार नहीं बना सकती, अध्यादेश में वह उसी सीमा तक शून्य है।
संसदीय नियंत्रणदोनों सदनों के सामने रखा जाएगा; संसद के पुनः समवेत होने से छह सप्ताह बाद समाप्त, या दोनों सदनों की अस्वीकृति से पहले समाप्त।
पुनः समवेत होने की अलग तारीखेंछह सप्ताह बाद वाली तारीख से गिने जाते हैं।
वापसीसंसदीय कार्यपालिका ढाँचे में राष्ट्रपति किसी भी समय वापस ले सकता है।

12. दया शक्ति: अनुच्छेद 72

राष्ट्रपति तीन प्रकार के मामलों में क्षमा, प्रविलंबन, विराम या परिहार दे सकता अथवा दंडादेश को निलंबित, परिहारित या लघुकृत कर सकता है: (1) सैन्य न्यायालय का दंड या दंडादेश; (2) संघ की कार्यपालिका शक्ति की सीमा वाले विषय की विधि के विरुद्ध अपराध; और (3) मृत्युदंड का प्रत्येक मामला। क्षमा दोषसिद्धि से उत्पन्न दंड और अयोग्यता दोनों हटाती है; लघुकरण हल्के प्रकार का दंड देता है; परिहार दंड की प्रकृति बदले बिना अवधि घटाता है; विराम विशेष परिस्थिति के कारण हल्का दंड देता है; प्रविलंबन दंड के क्रियान्वयन को अस्थायी रूप से रोकता है।

मृत्युदंड पर राष्ट्रपति की शक्ति राज्यपाल की लागू विधि/अनुच्छेद 161 वाली शक्ति को समाप्त नहीं करती। दया शक्ति मंत्रिपरिषद की सलाह पर प्रयोग होने वाली संवैधानिक कार्यपालिका शक्ति है और दुर्भावना या अप्रासंगिक विचार जैसे मान्य आधारों पर सीमित न्यायिक समीक्षा के अधीन रहती है।

13. उपराष्ट्रपति: चुनाव, भूमिका और पद से हटाना

विशेषताराष्ट्रपतिउपराष्ट्रपति
निर्वाचक मंडलनिर्वाचित सांसद + राज्यों/दिल्ली/पुडुचेरी के निर्वाचित विधायक; मनोनीत सांसद बाहर।संसद के दोनों सदनों के सभी निर्वाचित और मनोनीत सदस्य; राज्य विधायक बाहर।
मत-मूल्यअनुच्छेद 55 के अधीन भारित मूल्य।प्रत्येक सांसद के मत का मूल्य एक।
न्यूनतम आयु35 वर्ष।35 वर्ष।
सदस्यता योग्यतालोकसभा के लिए चुने जाने योग्य।राज्यसभा के लिए चुने जाने योग्य।
नामांकन50 प्रस्तावक + 50 समर्थक; ₹15,000 जमानत।20 प्रस्तावक + 20 समर्थक; ₹15,000 जमानत।
त्यागपत्र किसे?उपराष्ट्रपति को।राष्ट्रपति को।
पद से हटनाकोई भी सदन आरंभ कर सकता; दोनों निर्णायक चरणों में कुल सदस्य-संख्या का दो-तिहाई।राज्यसभा आरंभ करती है: तत्कालीन सभी सदस्यों का बहुमत; लोकसभा की सहमति; कम-से-कम 14 दिन की सूचना।
शपथ किसके समक्ष?भारत के मुख्य न्यायाधीश या उपलब्ध वरिष्ठतम उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश।राष्ट्रपति या उसके द्वारा नियुक्त व्यक्ति।

उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति है, पर राज्यसभा का सदस्य नहीं। पीठासीन अधिकारी के रूप में वह प्रथम बार मतदान नहीं करता; मत बराबर हों तो निर्णायक मत देता है। राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते या उसके कृत्यों का निर्वहन करते समय वह सभापति का काम नहीं करता और सभापति का वेतन नहीं पाता।

राष्ट्रपति का पद मृत्यु, त्यागपत्र, हटाए जाने या अन्य कारण से रिक्त हो तो उपराष्ट्रपति नए निर्वाचित राष्ट्रपति के पद ग्रहण तक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है; वह राष्ट्रपति नहीं बन जाता। अनुपस्थिति, बीमारी या अन्य कारण से राष्ट्रपति अस्थायी रूप से कार्य न कर पाए तो उपराष्ट्रपति उसके लौटने तक कृत्यों का निर्वहन करता है। उस अवधि में उसे राष्ट्रपति की शक्तियाँ और उन्मुक्तियाँ मिलती हैं।

उपराष्ट्रपति की आकस्मिक रिक्ति का चुनाव यथाशीघ्र होता है; अनुच्छेद 68 राष्ट्रपति वाली छह माह की अधिकतम सीमा नहीं देता। नए उपराष्ट्रपति को पूरा पाँच वर्षीय कार्यकाल मिलता है। पद से हटाने को महाभियोग नहीं कहा जाता और अनुच्छेद 67 “संविधान का उल्लंघन” जैसा कोई आधार नहीं बताता।

14. चुनाव-विवाद और मतदान-अनुशासन

अनुच्छेद 71 के अधीन दोनों चुनावों से जुड़े सभी संदेह और विवादों का अंतिम निर्णय उच्चतम न्यायालय करता है। चुनाव बाद में शून्य घोषित हो जाए, तो निर्णय से पहले किए गए आधिकारिक कार्य केवल इस कारण अमान्य नहीं होते। दोनों चुनावों में गुप्त वरीयता-मतपत्र होता है; निर्वाचन आयोग के आधिकारिक निर्देश यह भी बताते हैं कि राजनीतिक दल इस मतदान के लिए सचेतक जारी नहीं कर सकते।

16. बिहार से संबंध

बिहार के निर्वाचित विधायक राष्ट्रपति के चुनाव में भाग लेते हैं, किंतु बिहार विधान परिषद के सदस्य नहीं। बिहार से संबंधित निर्वाचित लोकसभा और राज्यसभा सदस्य राष्ट्रपति के चुनाव में मतदान करते हैं; संसद के दोनों सदनों के सभी पदासीन सदस्य—मनोनीत राज्यसभा सदस्यों सहित—उपराष्ट्रपति का निर्वाचक मंडल बनाते हैं। निर्वाचन आयोग की 2022 राष्ट्रपति-चुनाव तालिका में बिहार की 243 निर्वाचित विधानसभा सीटें, प्रति विधायक मत-मूल्य 173 और कुल मूल्य 42,039 था। बिहार के राज्यपाल की नियुक्ति अनुच्छेद 155 के अधीन राष्ट्रपति करता है; यह बिहार के विधायकों द्वारा चुनाव नहीं है।

20. अभ्यास: ठीक 20 बीपीएससी प्रारंभिक परीक्षा-शैली बहुविकल्पीय प्रश्न