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आपात उपबंध

45 min read · Updated 5 Oct 2026

1. बीपीएससी की मांग और पढ़ने की विधि

बीपीएससी स्तर के प्रश्न प्रायः अनुच्छेद और परिस्थिति का मिलान, अनुमोदन की समय-सीमा, अधिकतम अवधि, मूल अधिकारों पर प्रभाव या चवालीसवें संशोधन के सुरक्षा उपाय पूछते हैं। जब अनुच्छेद 352 का नियम अनुच्छेद 356 या 360 पर लागू कर दिया जाता है, तब कथन गलत हो जाता है। इस क्रम से पढ़ें:

2. तीनों आपात स्थितियाँ एक दृष्टि में

आपात स्थितिआधारसंसदीय अनुमोदनअनुमोदन के बाद अवधि
राष्ट्रीय आपात — अनुच्छेद 352युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह से भारत अथवा उसके किसी भाग की सुरक्षा को खतरा; आसन्न खतरा भी पर्याप्त है।एक माह के भीतर; प्रत्येक सदन में विशेष बहुमत।एक बार में छह माह; दोनों सदन आगे की छह-छह माह की अवधि के लिए बढ़ा सकते हैं। अनुच्छेद 352 कोई निश्चित अधिकतम सीमा नहीं देता।
राष्ट्रपति शासन — अनुच्छेद 356किसी राज्य की सरकार संविधान के अनुसार न चलाई जा सकने की स्थिति।दो माह के भीतर; दोनों सदनों के संकल्प।एक बार में छह माह; सामान्यतः अधिकतम तीन वर्ष। एक वर्ष से आगे बढ़ाने के लिए अनुच्छेद 356(5) की दोनों शर्तें चाहिए।
वित्तीय आपात — अनुच्छेद 360भारत अथवा उसके किसी भाग की वित्तीय स्थिरता या साख को खतरा।दो माह के भीतर; दोनों सदनों के संकल्प।अनुमोदन के बाद इसमें छह माह पर नवीनीकरण या अधिकतम अवधि का उपबंध नहीं है; निरस्त होने तक लागू रह सकता है।

3. राष्ट्रीय आपात: अनुच्छेद 352

राष्ट्रपति पूरे भारत या उसके किसी निर्दिष्ट भाग के लिए आपात उद्घोषणा कर सकता है, यदि युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह से सुरक्षा को गंभीर खतरा हो। वास्तविक घटना होने से पहले भी, उसके आसन्न खतरे पर उद्घोषणा की जा सकती है। अलग-अलग आधारों पर अलग उद्घोषणाएँ भी साथ-साथ लागू हो सकती हैं।

राष्ट्रपति ऐसी उद्घोषणा जारी या परिवर्तित नहीं कर सकता, जब तक संघ मंत्रिमंडल—प्रधानमंत्री और अनुच्छेद 75 के अधीन नियुक्त मंत्रिमंडल स्तर के मंत्री—का निर्णय लिखित रूप में उसे न भेजा गया हो। यह लिखित मंत्रिमंडलीय निर्णय संवैधानिक सुरक्षा उपाय है; अकेले प्रधानमंत्री की सलाह अनुच्छेद 352(3) की भाषा नहीं है।

चरणनियमपरीक्षा संकेत
आरंभिक अवधियदि निरस्त न हो, तो दोनों सदनों से अनुमोदन न मिलने पर एक माह बाद समाप्त हो जाती है।एक माह, दो माह नहीं।
अनुमोदन का बहुमतप्रत्येक सदन में कुल सदस्य-संख्या का बहुमत और उपस्थित तथा मतदान करने वालों का कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत।तीनों आपातों में यह विशेष बहुमत केवल यहाँ स्पष्ट है।
अनुमोदन के बाददूसरा/बाद वाला अनुमोदन-संकल्प पारित होने से छह माह; दोनों सदन छह-छह माह के लिए बढ़ा सकते हैं।अनुच्छेद 352 में तीन वर्ष की सीमा नहीं।
लोकसभा भंग होराज्यसभा का अनुमोदन इसे अस्थायी रूप से बनाए रख सकता है; पुनर्गठित लोकसभा की पहली बैठक से 30 दिन के भीतर उसका अनुमोदन चाहिए।लोकसभा भंग होने पर राज्यसभा का महत्व।
अस्वीकृतिलोकसभा उद्घोषणा या उसकी निरंतरता को अस्वीकार करे, तो राष्ट्रपति को उसे निरस्त करना होगा।अस्वीकृति की यह शक्ति लोकसभा की है।
विशेष बैठकलोकसभा की कुल सदस्य-संख्या के कम-से-कम दसवें भाग का लिखित नोटिस मिलने पर 14 दिन के भीतर विशेष बैठक होगी।1/10 सदस्य; 14 दिन।

4. राष्ट्रीय आपात के प्रभाव

क्षेत्रसंवैधानिक प्रभावअनुच्छेद
संघ की कार्यपालिका शक्तिसंघ किसी राज्य को उसकी कार्यपालिका शक्ति के प्रयोग की रीति पर निर्देश दे सकता है।353(क)
विधायी शक्तिसंसद आपात के दौरान राज्य सूची के विषयों पर कानून बना सकती है। केवल इस विशेष क्षमता पर आधारित कानून आपात समाप्त होने के छह माह बाद, उस असक्षमता की सीमा तक, प्रभावहीन हो जाता है; पूर्व में किए गए कार्य सुरक्षित रहते हैं।250 और 353(ख)
राजस्व-वितरणराष्ट्रपति अनुच्छेद 354 के अधीन निर्दिष्ट अवधि के लिए अनुच्छेद 268–279 की कार्यप्रणाली में अपवाद या परिवर्तन कर सकता है।354
लोकसभा/विधानसभा का कार्यकालसंसद कानून से एक बार में अधिकतम एक वर्ष की वृद्धि कर सकती है; आपात समाप्त होने के छह माह बाद तक से आगे नहीं।83(2), 172(1)
राज्य सरकारराष्ट्रीय आपात से राज्य मंत्रिपरिषद स्वतः पदच्युत या विधानसभा स्वतः भंग नहीं होती।356 से अंतर

5. मूल अधिकार: अनुच्छेद 358 और 359

बिंदुअनुच्छेद 358अनुच्छेद 359
विषयराज्य की शक्ति पर अनुच्छेद 19 के प्रतिबंधों की कार्यप्रणाली।राष्ट्रपति के आदेश में बताए गए भाग III के अधिकारों के प्रवर्तन हेतु न्यायालय जाने के अधिकार का निलंबन।
आपात का आधारकेवल युद्ध या बाह्य आक्रमण; सशस्त्र विद्रोह नहीं।राष्ट्रीय आपात के समय लागू हो सकता है; केवल आदेश में निर्दिष्ट अधिकार प्रभावित होते हैं।
राष्ट्रपति का पृथक आदेशअनुच्छेद 358 के लिए पृथक आदेश आवश्यक नहीं।राष्ट्रपति का आदेश आवश्यक है और उसे दोनों सदनों के समक्ष रखा जाता है।
अनुच्छेद 20 और 21अनुच्छेद 358 केवल अनुच्छेद 19 से जुड़ा है।अनुच्छेद 20 और 21 के प्रवर्तन को अनुच्छेद 359 के अधीन निलंबित नहीं किया जा सकता।
चवालीसवें संशोधन के बादसुरक्षा केवल उस आपात से संबंध बताने वाला कथन रखने वाले कानून और उसके अधीन की गई कार्यपालिका कार्रवाई को मिलती है।समान रूप से कानून में आपात से संबंध का कथन और उसके अधीन कार्रवाई आवश्यक है।

6. राष्ट्रपति शासन: अनुच्छेद 355–357 और 365

अनुच्छेद 355 संघ पर प्रत्येक राज्य को बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति से बचाने तथा राज्य की सरकार संविधान के अनुसार चलना सुनिश्चित करने का कर्तव्य रखता है। अनुच्छेद 356 के अधीन राष्ट्रपति राज्यपाल की रिपोर्ट मिलने पर या अन्यथा संतुष्ट होकर कार्रवाई कर सकता है कि राज्य सरकार संविधान के अनुसार नहीं चलाई जा सकती। इसलिए राज्यपाल की रिपोर्ट महत्वपूर्ण है, पर पाठ के अनुसार अनिवार्य और एकमात्र आधार नहीं।

उद्घोषणा राज्य सरकार के कार्य और राज्यपाल की शक्तियाँ ग्रहण कर सकती है तथा राज्य विधानमंडल की शक्तियाँ संसद या उसके प्राधिकार के अधीन प्रयोग किए जाने की घोषणा कर सकती है। यह राष्ट्रपति को उच्च न्यायालय की शक्तियाँ ग्रहण करने या उच्च न्यायालय से संबंधित संवैधानिक उपबंध निलंबित करने की अनुमति नहीं देती। अनुच्छेद 357 के अधीन संसद राज्य की विधायी शक्ति राष्ट्रपति को दे सकती है और प्रत्यायोजन की अनुमति दे सकती है। ऐसी विशेष क्षमता से बना कानून उद्घोषणा समाप्त होने के बाद भी सक्षम प्राधिकारी द्वारा बदले, निरस्त या संशोधित किए जाने तक लागू रह सकता है।

अनुच्छेद 365 संबंधित उपबंध है: यदि कोई राज्य संविधान के अधीन संघ द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन नहीं करता, तो राष्ट्रपति के लिए यह मानना वैध होगा कि राज्य की सरकार संविधान के अनुसार नहीं चलाई जा सकती। इसका अर्थ यह नहीं कि हर मतभेद से राष्ट्रपति शासन स्वतः लग जाता है।

प्रश्नउत्तर
संसद का अनुमोदन कब?दो माह के भीतर, दोनों सदनों के संकल्प द्वारा।
लोकसभा भंग हो तो?राज्यसभा अनुमोदन दे सकती है; पुनर्गठित लोकसभा की पहली बैठक से 30 दिन के भीतर लोकसभा का अनुमोदन चाहिए।
अनुमोदन के बाद कितनी अवधि?एक बार में छह माह; दोनों सदन आगे बढ़ाते हैं।
अधिकतम सीमा?वर्तमान सामान्य पाठ के अधीन तीन वर्ष।
एक वर्ष से आगे विस्तार?दोनों शर्तें आवश्यक: पूरे भारत या संबंधित राज्य के पूरे/किसी भाग में राष्ट्रीय आपात लागू हो, और निर्वाचन आयोग विधानसभा का आम चुनाव कराने में कठिनाई के कारण विस्तार को आवश्यक प्रमाणित करे।

7. न्यायिक नियंत्रण: एस. आर. बोम्मई सिद्धांत

उच्चतम न्यायालय के एस. आर. बोम्मई सिद्धांत के अनुसार अनुच्छेद 356 की उद्घोषणा न्यायिक समीक्षा के अधीन है। राष्ट्रपति की संतुष्टि वस्तुनिष्ठ सामग्री पर आधारित होनी चाहिए; अनुच्छेद 74(2) सलाह के आधार बनी सामग्री की जाँच को नहीं रोकता। विधानसभा का विघटन स्वतः परिणाम नहीं है और दोनों सदनों के अनुमोदन से पहले विघटन जैसी अपरिवर्तनीय कार्रवाई नहीं की जा सकती। उद्घोषणा अवैध हो तो न्यायालय पूर्व स्थिति, यहाँ तक कि विधानसभा, बहाल कर सकता है। ये नियम संघवाद को दलगत दुरुपयोग से बचाते हैं।

8. वित्तीय आपात: अनुच्छेद 360

जब भारत अथवा उसके किसी भाग की वित्तीय स्थिरता या साख को खतरा हो, तब अनुच्छेद 360 लागू हो सकता है। उद्घोषणा दोनों सदनों के समक्ष रखी जाती है और दो माह के भीतर अनुमोदन चाहिए। लोकसभा भंग होने पर अपवाद अनुच्छेद 356 जैसा है: राज्यसभा का अनुमोदन इसे पुनर्गठित लोकसभा की पहली बैठक के बाद 30 दिन तक बचा सकता है; उस अवधि में लोकसभा की स्वीकृति चाहिए। अनुच्छेद 352 और 356 के विपरीत, अनुच्छेद 360 में अनुमोदन के बाद छह माह पर नवीनीकरण का उपबंध नहीं है।

लक्ष्यनिर्देश/प्रभाव
सामान्य रूप से राज्यसंघ वित्तीय औचित्य के निर्दिष्ट मानकों का पालन और आवश्यक अन्य निर्देश दे सकता है।
राज्य कर्मचारीराज्य के कार्यों से जुड़े सभी या किसी वर्ग के व्यक्तियों के वेतन-भत्तों में कमी का निर्देश दिया जा सकता है।
राज्य के वित्तीय विधेयकराज्य विधानमंडल से पारित धन विधेयक और अनुच्छेद 207 के अंतर्गत आने वाले अन्य विधेयक राष्ट्रपति के विचार हेतु आरक्षित रखने का निर्देश दिया जा सकता है।
संघ कर्मचारी और न्यायाधीशराष्ट्रपति संघ के कार्यों से जुड़े व्यक्तियों के वेतन-भत्तों में कमी का निर्देश दे सकता है; इसमें उच्चतम और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश भी शामिल हैं।

9. सुरक्षा उपायों की समयरेखा: चवालीसवाँ संशोधन क्यों महत्वपूर्ण है?

11. बिहार से संबंध

यदि बिहार के लिए अनुच्छेद 356 पर विचार हो, तो यही संवैधानिक सुरक्षा उपाय लागू होंगे: राष्ट्रपति राज्यपाल की रिपोर्ट पर या अन्यथा कार्रवाई कर सकता है, निरंतरता पर संसद का नियंत्रण रहेगा, पटना उच्च न्यायालय की संवैधानिक शक्तियाँ ग्रहण नहीं की जा सकतीं और उद्घोषणा न्यायिक समीक्षा के अधीन रहेगी। राष्ट्रीय आपात में संसद बिहार से जुड़े राज्य सूची विषयों पर अस्थायी कानून बना सकती है, पर बिहार सरकार स्वतः पदच्युत नहीं होती। अनुच्छेद 360 में बिहार को वित्तीय औचित्य और निर्दिष्ट वित्तीय विधेयकों को राष्ट्रपति हेतु आरक्षित रखने के निर्देश मिल सकते हैं।

15. अभ्यास: ठीक 20 बीपीएससी प्रारंभिक परीक्षा-शैली बहुविकल्पीय प्रश्न