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राजनीतिक दल, दल-बदल विरोधी कानून और विधायी दल

80 min read · Updated 5 Oct 2026

1. बीपीएससी की माँग

छह समूह तैयार करें: राजनीतिक दलों के कार्य और प्रकार; पंजीकरण तथा मान्यता का अंतर; आरक्षित चुनाव-चिह्न; मूल राजनीतिक दल तथा विधायी दल; दसवीं अनुसूची की निरर्हताएँ और अपवाद; अध्यक्ष/सभापति तथा न्यायिक समीक्षा। बिहार का विधानमंडल द्विसदनीय है, इसलिए अनुसूची विधानसभा और विधान परिषद दोनों पर लागू होती है। मान्यता-प्राप्त दलों की बदलती सूची नवीनतम निर्वाचन आयोग अधिसूचना देखे बिना याद न करें।

2. राजनीतिक दलों का महत्त्व

कार्यव्यावहारिक अर्थ
निर्वाचकीय विकल्पदल उम्मीदवार चुनते, कार्यक्रम रखते और सामाजिक हितों को नीतिगत विकल्पों में समेटते हैं।
सरकार गठनसदन का विश्वास रखने वाला दल या गठबंधन राजनीतिक कार्यपालिका बनाता है।
कानून और नीतिविधायक बहस तथा मतदान करते हैं; सत्तारूढ़ दल/गठबंधन संविधान और कानून के अधीन अपने कार्यक्रम को नीति में बदलता है।
विपक्षसरकार से प्रश्न, कानून और व्यय की जाँच तथा वैकल्पिक नीति प्रस्तुत करता है।
राजनीतिक लामबंदीनागरिकों, आंदोलनों, हित-समूहों और जनमत को संस्थाओं से जोड़ता है।
प्रतिनिधित्वक्षेत्रीय, सामाजिक और वैचारिक हितों को विधानमंडल तक लाता है; संघीय राजनीति में राज्य दलों का विशेष महत्त्व है।

3. चार शब्द अलग रखें

शब्दअर्थकानूनी महत्त्व
राजनीतिक दलविधानमंडल के बाहर और भीतर सक्रिय, चुनाव लड़ने तथा राजनीतिक कार्यक्रम आगे बढ़ाने वाला संगठन।1951 के अधिनियम की धारा 29A में पंजीकरण माँग सकता है।
मूल राजनीतिक दलदसवीं अनुसूची में वह राजनीतिक दल जिससे सदस्य अनुच्छेद 2 के प्रयोजन के लिए संबंधित है।दल-बदल और विलय में महत्त्वपूर्ण।
विधायी दलकिसी विशेष सदन में उस राजनीतिक दल से संबंधित सभी सदस्यों का समूह।दो-तिहाई विलय परीक्षा में इसी की संख्या ली जाती है।
गठबंधनचुनाव या सरकार के लिए दो या अधिक दलों का सहयोग।इससे अपने-आप उनके संगठन या विधायी दल विलय नहीं होते।

4. पंजीकरण मान्यता नहीं है

चरणआधारपरिणाम
पंजीकरणलोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A; आवेदन भारत निर्वाचन आयोग को।संगठन पंजीकृत राजनीतिक दल बनता है।
अनिवार्य निष्ठा उपबंधदल के संविधान में भारत के संविधान, समाजवाद, पंथनिरपेक्षता और लोकतंत्र के प्रति सच्ची आस्था तथा भारत की प्रभुता, एकता और अखंडता बनाए रखने का उपबंध।पंजीकरण की वैधानिक शर्त।
मान्यतानिर्वाचन चिह्न (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 के चुनावी प्रदर्शन मानदंड।मान्यता-प्राप्त राष्ट्रीय दल या राज्य दल।
गैर-मान्यता प्राप्त स्थितिपंजीकृत दल जो वर्तमान मान्यता शर्त पूरी नहीं करता।राष्ट्रीय/राज्य मान्यता के बिना भी पंजीकरण रह सकता है।

5. मान्यता के मानदंड: परीक्षा मानचित्र

स्तरवैकल्पिक मार्ग
राज्य दल(1) नवीनतम राज्य विधानसभा चुनाव में कम-से-कम 6% वैध मत और कम-से-कम 2 विधानसभा सीट; या (2) उस राज्य के नवीनतम लोकसभा चुनाव में 6% वैध मत और उस राज्य से कम-से-कम 1 लोकसभा सीट; या (3) विधानसभा की कम-से-कम 3% सीट अथवा 3 सीट—जो अधिक हो; या (4) राज्य को आवंटित प्रत्येक 25 लोकसभा सीट या उसके अंश पर कम-से-कम 1 लोकसभा सीट; या (5) नवीनतम विधानसभा या लोकसभा आम चुनाव में राज्य के कम-से-कम 8% वैध मत।
राष्ट्रीय दल(1) चार या अधिक राज्यों में नवीनतम लोकसभा अथवा संबंधित विधानसभा आम चुनाव में प्रत्येक राज्य में कम-से-कम 6% वैध मत और किसी राज्य/राज्यों से कुल कम-से-कम 4 लोकसभा सीट; या (2) लोकसभा की कम-से-कम 2% सीट और निर्वाचित सदस्य कम-से-कम 3 राज्यों से; या (3) कम-से-कम 4 राज्यों में राज्य दल की मान्यता।

6. चुनाव-चिह्न और दल की स्थिति

श्रेणीचिह्न की स्थिति
मान्यता-प्राप्त राष्ट्रीय दलचुनाव-चिह्न आदेश के अधीन उसका आरक्षित चिह्न सामान्यतः पूरे भारत में अनन्य होता है।
मान्यता-प्राप्त राज्य दलमान्यता वाले राज्य/राज्यों में आरक्षित चिह्न अनन्य; आदेश के अधीन बाहर सीमित रियायत मिल सकती है।
पंजीकृत गैर-मान्यता दल/अन्य उम्मीदवारसामान्यतः लागू प्रक्रिया में अधिसूचित मुक्त चिह्नों में से चुनते हैं; मान्यता-आधारित सामान्य आरक्षित-चिह्न अधिकार नहीं होता।

7. दल-बदल विरोधी कालक्रम

8. निरर्हता के आधार

सदस्यअनुच्छेद 2 के अधीन आधार
दल के टिकट पर निर्वाचित(क) स्वेच्छा से उस दल की सदस्यता त्यागे; या (ख) पूर्व अनुमति बिना सदन में अधिकृत दलीय निर्देश के विरुद्ध मतदान/मतदान से विरत रहे और दल 15 दिन में उसे क्षमा न करे।
निर्दलीय निर्वाचित सदस्यचुनाव के बाद किसी राजनीतिक दल में सम्मिलित हो।
नामनिर्देशित सदस्यसदन में स्थान ग्रहण करने की तारीख से छह माह बीतने के बाद राजनीतिक दल में सम्मिलित हो। पहले छह माह में जुड़ने पर यह आधार लागू नहीं।

9. सचेतक और 15 दिन की अवधि

“सचेतक” दल का पदाधिकारी भी है और सामान्य प्रयोग में मतदान अनुशासन के लिए भेजा गया निर्देश भी। अनुच्छेद 2(1)(ख) सदन में राजनीतिक दल या उसके अधिकृत व्यक्ति/प्राधिकारी के निर्देश के विपरीत मतदान अथवा मतदान से विरत रहने पर लागू होता है। पूर्व अनुमति होने पर उल्लंघन नहीं; अन्यथा दल मतदान/विरत रहने की तारीख से 15 दिन के भीतर उसे क्षमा कर सकता है।

संवैधानिक पाठ निरर्हता कराने वाले निर्देश को केवल विश्वास या धन विधेयक तक सीमित नहीं करता। व्यवहार में विश्वास मत, आपूर्ति और प्रमुख विधेयकों पर सचेतक विशेष महत्त्व रखता है। सुभाष देसाई में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि सचेतक नियुक्त करने की शक्ति राजनीतिक दल की है—विधायी दल के किसी गुट की नहीं।

10. विलय: बचा हुआ अपवाद

नियमअर्थ
मूल दल का विलयअनुच्छेद 4 सदस्य के मूल राजनीतिक दल के किसी अन्य दल में विलय से संबंधित है।
दो-तिहाई परीक्षाइस प्रयोजन के लिए विलय तभी माना जाता है जब संबंधित विधायी दल के कम-से-कम दो-तिहाई सदस्य सहमत हों।
संरक्षित विकल्पअर्ह सदस्य दूसरे/नए दल का भाग बन सकते हैं; विलय न मानने वाले सदस्य अलग समूह के रूप में काम करने का विकल्प चुन सकते हैं।
विभाजन बचाव नहींअनुच्छेद 3 का पुराना एक-तिहाई विभाजन अपवाद 91वें संशोधन ने हटा दिया।

11. पीठासीन अधिकारी का अपवाद

स्थितिअनुच्छेद 5 की सुरक्षा
निर्दिष्ट पीठासीन पद पर चुनावलोकसभा/विधानसभा अध्यक्ष या उपाध्यक्ष, राज्यसभा उपसभापति, विधान परिषद सभापति या उपसभापति उस पद के कारण दल छोड़ सकता है, यदि पद पर रहते दूसरे दल से न जुड़े।
पद छोड़ने के बादपीठासीन पद के कारण छोड़े गए पुराने दल में वापस सम्मिलित हो सकता है।

13. निर्णय कौन करता है? मार्ग न मिलाएँ

प्रश्नप्रथम प्राधिकारी
दसवीं अनुसूची का दल-बदलअनुच्छेद 6 के अधीन अध्यक्ष/सभापति; स्वयं उस पर आरोप हो तो सदन द्वारा चुना सदस्य।
संसद की अनुच्छेद 102(1) वाली अन्य निरर्हताअनुच्छेद 103 के अधीन निर्वाचन आयोग की राय लेकर राष्ट्रपति।
राज्य विधानमंडल की अनुच्छेद 191(1) वाली अन्य निरर्हताअनुच्छेद 192 के अधीन निर्वाचन आयोग की राय लेकर राज्यपाल।
दल पंजीकरण/मान्यता/चिह्न विवाद1951 अधिनियम और चुनाव-चिह्न आदेश के अधीन भारत निर्वाचन आयोग।

15. परिणाम और 91वाँ संशोधन

परिणामनियम
सदन की सदस्यताअनुसूची में निरर्ह पाया सदस्य उस सदन की सदस्यता खोता है।
मंत्री पदअनुच्छेद 75(1B) और 164(1B) अनुच्छेद 2 में निरर्ह सदस्य को मूल कार्यकाल की समाप्ति या उससे पहले चुनाव लड़कर निर्वाचित घोषित होने तक मंत्री बनने से रोकते हैं।
लाभकारी राजनीतिक पदअनुच्छेद 361B कार्यकाल समाप्ति या पहले पुनर्निर्वाचन तक ऐसा ही प्रतिबंध लगाता है।
मंत्रिपरिषद का आकारइसी 91वें संशोधन ने संघ और राज्य मंत्रिपरिषद को संबंधित निचले सदन/विधानसभा के 15% तक सीमित किया; राज्य में न्यूनतम 12 मंत्री।

16. विधायी समूह और विपक्ष

अभिव्यक्तिसही प्रयोग
विधायी दलदसवीं अनुसूची में उस विशेष सदन के भीतर दल के सभी सदस्यों का विधिक रूप से परिभाषित समूह।
संसदीय दल/समूहदल के सांसदों, उनके आंतरिक नेतृत्व और समन्वय के लिए प्रचलित राजनीतिक अभिव्यक्ति; इसे अनुसूची की सटीक परिभाषा का स्थान न दें।
गठबंधन समूहअलग दलों का सहयोग; हर दल सामान्यतः अपनी पहचान, संगठन और सचेतक रखता है।
विपक्ष का नेता1977 अधिनियम के अनुसार सदन में सरकार-विरोधी सर्वाधिक सदस्य-संख्या वाले दल का अध्यक्ष/सभापति द्वारा मान्यता-प्राप्त नेता। अधिनियम स्वयं “10%” शर्त नहीं लिखता।

17. बिहार विशेष

बिंदुबिहार में प्रयोग
द्विसदनीय लागू क्षेत्रदसवीं अनुसूची बिहार विधानसभा और विधान परिषद में अलग-अलग लागू; विधानसभा में अध्यक्ष और परिषद में सभापति निर्णय करते हैं।
विधायी दल की संख्यादो-तिहाई की गणना संबंधित सदन में उस दल के सदस्यों से होती है, पूरे बिहार या भारत की दल-सदस्यता से नहीं।
गठबंधन राजनीतिसरकारी गठबंधन में शामिल होना या उससे निकलना अपने-आप अनुच्छेद 4 का विलय नहीं; सदस्य के आचरण और सदन के मतदान को ठीक आधारों पर जाँचना होगा।
दल की स्थितिकोई दल वर्तमान में बिहार में मान्यता-प्राप्त राज्य दल है या नहीं, इसे नवीनतम आयोग अधिसूचना से सत्यापित करें; केवल विधानसभा सीटों से अनुमान न लगाएँ।

20. आधिकारिक पूर्व प्रश्न स्थिति

नीचे किसी प्रश्न को आधिकारिक बीपीएससी पूर्व प्रश्न नहीं कहा गया, क्योंकि आयोग की पुस्तिका से उसका पूर्ण शब्दांकन और विकल्प सत्यापित नहीं हुए। ये सभी मौलिक बीपीएससी-शैली अभ्यास प्रश्न हैं।

22. बीपीएससी-शैली अभ्यास: ठीक 20 बहुविकल्पीय प्रश्न