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प्रतिनिधित्व, मताधिकार और निर्वाचन सुधार

80 min read · Updated 5 Oct 2026

1. बीपीएससी की माँग

इसे छह जुड़े भागों में पढ़ें: वयस्क मताधिकार, समान निर्वाचक-नामावली, अनुसूचित जाति/जनजाति का प्रतिनिधित्व, परिसीमन, नोटा और 1950 बनाम 1951 का लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम। प्रश्नों में प्रायः कहा जाता है कि मतदान केवल मूल अधिकार है, आरक्षित क्षेत्र में अलग मतदाता होते हैं, नोटा चुनाव रद्द कर देता है, या 106वाँ संशोधन अभी से लागू है। प्रत्येक कथन गलत या अधूरा है।

2. संवैधानिक मानचित्र

अनुच्छेदमुख्य नियमपरीक्षा संकेत
325प्रत्येक प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र के लिए एक समान निर्वाचक-नामावली; केवल धर्म, मूलवंश, जाति या लिंग के आधार पर न तो नामावली से वंचित किया जा सकता है, न विशेष नामावली माँगी जा सकती है।समान नामावली, पृथक सांप्रदायिक निर्वाचक-मंडल नहीं।
326लोकसभा और विधानसभा के प्रत्यक्ष चुनाव वयस्क मताधिकार पर आधारित हैं: भारतीय नागरिकता, 18 वर्ष आयु और कानूनसम्मत निरर्हताओं की शर्त।मतदान आयु और पात्रता।
327संसद निर्वाचन, नामावली और परिसीमन पर कानून बना सकती है।केंद्रीय निर्वाचन कानून।
328संविधान और संसदीय कानून के अधीन राज्य विधानमंडल अपने सदन या सदनों के चुनाव पर कानून बना सकता है।राज्य की शक्ति अधीनस्थ है।
329खंड (क) परिसीमन/सीट-वितरण कानून को न्यायालय में चुनौती से बचाता है; खंड (ख) चुनाव को विधि द्वारा निर्धारित निर्वाचन याचिका से ही चुनौती देने का मार्ग देता है।इसे हर न्यायिक उपचार पर पूर्ण रोक न मानें।

3. सार्वभौम वयस्क मताधिकार

धन, शिक्षा, संपत्ति, कर-भुगतान, धर्म, जाति और लिंग लोकसभा या विधानसभा चुनाव में मतदाता बनने की योग्यता नहीं हैं। व्यक्ति भारतीय नागरिक हो, अर्हता तिथि को निर्धारित आयु पूरी करे, पंजीकरण के लिए उस क्षेत्र का मामूली तौर पर निवासी हो और किसी वैधानिक निरर्हता में न आए। 61वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1988 ने अनुच्छेद 326 में आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष की; यह 28 मार्च 1989 से प्रभावी हुआ। केवल आयु पूरी होने से मतदान नहीं किया जा सकता—नाम निर्वाचन क्षेत्र की निर्वाचक-नामावली में होना चाहिए।

4. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के नामावली नियम

धारानियम
16भारतीय नागरिक न होना; सक्षम न्यायालय द्वारा विकृतचित्त घोषित होना; या भ्रष्ट आचरण/संबंधित निर्वाचन अपराध के कारण वर्तमान निरर्हता—पंजीकरण से निरर्ह बनाते हैं।
17एक व्यक्ति का एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में पंजीकरण नहीं हो सकता।
18एक ही निर्वाचन क्षेत्र में एक व्यक्ति का नाम एक से अधिक बार दर्ज नहीं हो सकता।
19अर्हता तिथि को कम-से-कम 18 वर्ष और उस निर्वाचन क्षेत्र का मामूली तौर पर निवासी होना आवश्यक है।
20केवल मकान का स्वामित्व/कब्जा मामूली निवास सिद्ध नहीं करता; अस्थायी अनुपस्थिति मात्र से मामूली निवास समाप्त नहीं होता।

7. अनुसूचित जाति/जनजाति की आरक्षित सीटें: अलग मतदाता नहीं

बिंदुलोकसभाराज्य विधानसभा
आधारअनुच्छेद 330अनुच्छेद 332
व्यापक आवंटन नियमयथासंभव राज्य/संघ राज्य क्षेत्र या संबंधित भाग में समुदाय की जनसंख्या के अनुपात में।यथासंभव राज्य में समुदाय की जनसंख्या के अनुपात में।
मतदातानिर्वाचन क्षेत्र के सभी पात्र निर्वाचक।निर्वाचन क्षेत्र के सभी पात्र निर्वाचक।
आरक्षित तत्वउस सीट के प्रत्याशी की पात्रता।उस सीट के प्रत्याशी की पात्रता।

8. आरक्षित प्रतिनिधित्व की अवधि

9. महिला आरक्षण: 106वाँ संशोधन

प्रावधानअर्थ
330कलोकसभा की प्रत्यक्ष निर्वाचित सीटों में लगभग एक-तिहाई महिलाओं के लिए; इसमें अनुसूचित जाति/जनजाति आरक्षित सीटों का लगभग एक-तिहाई भी शामिल।
332कराज्य विधानसभाओं के लिए समान व्यवस्था।
334कसंशोधन के प्रारंभ के बाद होने वाली पहली जनगणना के प्रासंगिक आँकड़े प्रकाशित होने के बाद किए गए परिसीमन से प्रावधान प्रभावी होंगे।
चक्रानुक्रमसंसद के कानून के अनुसार प्रत्येक बाद के परिसीमन के पश्चात।
वर्तमान सावधानीआधिकारिक संविधान में इन प्रावधानों के प्रारंभ की तिथि अभी अधिसूचित होना दर्शाई गई है; वर्तमान लोकसभा या बिहार विधानसभा चुनाव में इसे पहले से लागू न मानें।

10. परिसीमन

परिसीमन प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएँ तय करता और संवैधानिक-विधिक ढाँचे में आरक्षित क्षेत्रों की पहचान करता है। इसका उद्देश्य मोटे तौर पर समान जनसंख्या प्रतिनिधित्व, भौगोलिक सघनता, प्रशासनिक सुविधा, संचार और संविधानसम्मत प्रतिनिधित्व है। पूर्ण गणितीय समानता हमेशा संभव नहीं, किंतु अस्पष्ट जनसंख्या-असमानता “एक व्यक्ति, एक मत, एक मूल्य” को कमजोर करती है।

11. स्थगन बनाम सीमा-पुनर्निर्धारण का आधार

प्रश्नस्थिति
लोकसभा आवंटन/पुनःसमायोजनअनुच्छेद 81 और 82, संवैधानिक स्थगन के अधीन।
विधानसभा आकार/पुनःसमायोजनअनुच्छेद 170, स्थगन के अधीन।
84वाँ संशोधनसंबंधित सीट-पुनःसमायोजन स्थगन को 2026 के बाद की पहली जनगणना के आँकड़े प्रकाशित होने तक जारी रखा।
87वाँ संशोधन2002 के परिसीमन में क्षेत्रीय सीमा-पुनर्निर्धारण और जुड़े आरक्षण-संदर्भ के लिए 1991 के स्थान पर 2001 की जनगणना रखी।

12. परिसीमन कालक्रम

14. बिहार की स्थिति

विषयसत्यापित आँकड़ा
विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र243
अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित38
अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित2
निर्वाचन आयोग द्वारा दर्शाया नवीनतम परिसीमन आदेश-वर्ष2008
आरक्षित क्षेत्र के मतदातासमान नामावली के सभी पंजीकृत निर्वाचक।

15. नोटा

पीयूसीएल बनाम भारत संघ (27 सितंबर 2013) में उच्चतम न्यायालय ने सभी प्रत्याशियों को अस्वीकार करने वाले मतदाता की गोपनीयता सुरक्षित की और “उपरोक्त में से कोई नहीं” सुविधा का निर्देश दिया। नोटा गुप्त अस्वीकृति दर्ज करता है; यह पूरे चुनाव को रद्द करने वाला बाध्यकारी अधिकार या प्रत्याह्वान नहीं है। नोटा सबसे अधिक हो तब भी वर्तमान लोकसभा/विधानसभा नियमों में प्रत्याशियों में सर्वाधिक मत पाने वाला प्रत्याशी विजयी होता है। प्रतिभूति की गणना में नोटा को प्रत्याशियों द्वारा प्राप्त वैध मतों में नहीं जोड़ा जाता।

16. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 बनाम 1951

1950 का अधिनियम1951 का अधिनियम
सीट आवंटन और परिसीमन ढाँचाचुनाव का वास्तविक संचालन
मतदाता योग्यता और निर्वाचक-नामावलीप्रत्याशी/सदस्य की योग्यता और निरर्हता
मामूली निवास और पंजीकरणनामांकन, मतदान, मतगणना और निर्वाचन विवाद
निर्वाचन मानचित्र और निर्वाचक-वर्गभ्रष्ट आचरण, अपराध और दल-पंजीकरण

17. निर्वाचन सुधार के साधन

समस्यासाधनउद्देश्य
नाम छूटना/दोहरावनिरंतर अद्यतन, चार अर्हता तिथियाँ, दावे और आपत्तियाँविधिसम्मत प्रक्रिया के साथ समावेशन और शुद्धता।
प्रत्याशी की छिपी पृष्ठभूमिशपथपत्र/प्रपत्र 26 और प्रकटीकरण कानूननिर्दिष्ट आपराधिक मामले, संपत्ति, देनदारी और शिक्षा की सूचना।
इलेक्ट्रॉनिक मतदान में अस्पष्टताईवीएम के साथ वीवीपैटमतदाता को दिखने वाला कागजी लेखा-पथ; 2019 लोकसभा में हर मतदान केंद्र पर उपयोग।
अस्वीकृति दर्ज न होनानोटाकिसी सूचीबद्ध प्रत्याशी को न चुनने की गुप्त अभिव्यक्ति।
धन/प्रलोभनव्यय निगरानी, लेखा, प्रेक्षक और प्रवर्तननिष्पक्षता और उत्तरदायित्व।
जनसंख्या असंतुलनस्वतंत्र वैधानिक परिसीमनअधिक समान क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व।

20. आधिकारिक पूर्व प्रश्न की स्थिति

नीचे किसी प्रश्न को आधिकारिक बीपीएससी पूर्व प्रश्न नहीं कहा गया है, क्योंकि उसका पूरा आधिकारिक कथन और विकल्प आयोग की पुस्तिका से सत्यापित नहीं किए गए। ये मौलिक बीपीएससी-शैली अभ्यास प्रश्न हैं।

22. बीपीएससी-शैली अभ्यास: ठीक 20 बहुविकल्पीय प्रश्न