पाँच जुड़े हुए भाग तैयार करें: अनुच्छेद 324–329; निर्वाचन आयोग की संरचना और सुरक्षा; निर्वाचक नामावली तथा मताधिकार; सर्वाधिक मत प्रणाली और आनुपातिक प्रतिनिधित्व; निर्वाचन विधि तथा बिहार विधानसभा के तथ्य। प्रश्नों में अक्सर गलत जोड़ियाँ दी जाती हैं—निर्वाचन आयोग और नगरपालिका चुनाव, अनुच्छेद 325 और मतदान आयु, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और भ्रष्ट आचरण, या आनुपातिक प्रतिनिधित्व और लोकसभा। वर्तमान पदाधिकारी और चुनाव कार्यक्रम बदलते हैं, इसलिए यहाँ स्थायी संवैधानिक तथा वैधानिक ढाँचे पर बल है।
2. संवैधानिक अनुच्छेद मानचित्र
अनुच्छेद
मुख्य प्रावधान
परीक्षा संकेत
324
संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव तथा उनकी निर्वाचक नामावली का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण भारत निर्वाचन आयोग में निहित।
पंचायत और नगरपालिका चुनाव नहीं।
325
हर प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र के लिए एक सामान्य निर्वाचक नामावली; केवल धर्म, मूलवंश, जाति या लिंग के आधार पर निष्कासन या विशेष नामावली का दावा नहीं।
सामान्य मतदाता सूची, मतदान आयु नहीं।
326
लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनाव वयस्क मताधिकार पर; भारतीय नागरिक की आयु कम-से-कम 18 वर्ष, वैध निरर्हताओं के अधीन।
61वें संशोधन ने आयु 21 से 18 की।
327
संसद निर्वाचन, नामावली और परिसीमन सहित संसद तथा राज्य विधानमंडल चुनावों पर कानून बना सकती है।
केंद्रीय निर्वाचन विधि का आधार।
328
जहाँ संसद ने प्रावधान न किया हो, राज्य विधानमंडल संविधान के अधीन अपने सदन/सदनों के चुनाव पर कानून बना सकता है।
शक्ति सीमित और संसदीय कानून के अधीन।
329
निर्दिष्ट परिसीमन/स्थान-वितरण कानूनों को चुनौती पर रोक और चुनाव को सामान्यतः निर्वाचन याचिका से चुनौती देने का मार्ग।
चुनाव प्रक्रिया सामान्यतः बीच में नहीं रोकी जाती।
3. भारत निर्वाचन आयोग का क्षेत्र
अनुच्छेद 324 के अनुसार आयोग लोकसभा, राज्यसभा, राज्य विधानसभाओं, राज्य विधान परिषदों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों के लिए उत्तरदायी है। पंचायत और नगरपालिका चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग अनुच्छेद 243K तथा 243ZA के अंतर्गत कराता है। दोनों संवैधानिक संस्थाएँ हैं, किंतु उनके चुनाव-क्षेत्र अलग हैं।
भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना 25 जनवरी 1950 को हुई। यह स्थायी संवैधानिक निकाय है—न मंत्रालय, न अधिकरण और न केवल वैधानिक आयोग। अनुच्छेद 324 मुख्य निर्वाचन आयुक्त, राष्ट्रपति द्वारा समय-समय पर निर्धारित संख्या में अन्य निर्वाचन आयुक्त, और आयोग से परामर्श के बाद नियुक्त किए जा सकने वाले प्रादेशिक आयुक्तों की व्यवस्था करता है।
4. वर्तमान कानून के अधीन नियुक्ति
चरण
नियम
पात्रता
भारत सरकार के सचिव के समकक्ष पद धारण करने वाला या कर चुका व्यक्ति, जिसमें सत्यनिष्ठा और चुनाव के प्रबंधन तथा संचालन का ज्ञान एवं अनुभव हो।
खोज समिति
केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अध्यक्ष तथा सचिव पद से नीचे न होने वाले दो सदस्य; पाँच व्यक्तियों का पैनल तैयार करती है।
चयन समिति
प्रधानमंत्री अध्यक्ष; लोकसभा में विपक्ष के नेता—मान्यता न होने पर सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता; और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय मंत्रिमंडलीय मंत्री।
नियुक्ति
राष्ट्रपति चयन समिति की सिफारिश पर अपने हस्ताक्षर और मुहर सहित अधिपत्र द्वारा मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा अन्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त करते हैं।
कार्यकाल
पद ग्रहण से छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु—जो पहले हो; पुनर्नियुक्ति नहीं। निर्वाचन आयुक्त बाद में मुख्य निर्वाचन आयुक्त बने तो दोनों पदों का कुल कार्यकाल छह वर्ष से अधिक नहीं।
वेतन
2023 के अधिनियम के अनुसार उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के वेतन के बराबर।
5. पद से हटाना और स्वतंत्रता
पद
सुरक्षा
मुख्य निर्वाचन आयुक्त
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के समान रीति और समान आधारों पर ही हटाया जा सकता है।
अन्य निर्वाचन आयुक्त
मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश के बिना नहीं हटाया जा सकता।
प्रादेशिक आयुक्त
मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश के बिना नहीं हटाया जा सकता।
6. आयोग के प्रमुख कार्य
क्षेत्र
भूमिका
निर्वाचक नामावली
संविधान, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और नियमों के अधीन तैयारी, पुनरीक्षण तथा सुधार का अधीक्षण।
चुनाव कार्यक्रम
चरण और कार्यक्रम तय करना; नामांकन, संवीक्षा, नाम वापसी, मतदान, मतगणना और परिणाम की विधि अनुसार निगरानी।
दल और चुनाव-चिह्न
1951 के अधिनियम के अंतर्गत दलों का पंजीकरण और निर्वाचन चिह्न (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 का प्रयोग।
समान अवसर
प्रेक्षक नियुक्ति, चुनाव व्यय तथा माध्यम संबंधी प्रक्रिया की निगरानी और लागू कानूनों के साथ आदर्श आचार संहिता का पालन।
सुधारात्मक निर्देश
कानून की अनुमति और चुनाव की शुचिता की आवश्यकता होने पर पुनर्मतदान या अन्य उपाय।
परामर्श
अनुच्छेद 103 और 192 के निर्दिष्ट सदस्य-निरर्हता मामलों में राष्ट्रपति या राज्यपाल को राय।
8. निर्वाचक नामावली और मताधिकार
नियम
अर्थ
नागरिकता
केवल भारतीय नागरिक निर्वाचक के रूप में पंजीकृत हो सकता है।
आयु
कानून में लागू अर्हक तिथि को कम-से-कम 18 वर्ष।
मामूली निवास
पंजीकरण मामूली निवास से जुड़ा है; केवल मकान का स्वामित्व अपने-आप इसे सिद्ध नहीं करता।
एक पंजीकरण
एक व्यक्ति एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में या एक ही क्षेत्र में एक से अधिक बार पंजीकृत नहीं हो सकता।
निरर्हता
लागू संविधान/कानून के अनुसार अनिवास, विकृतचित्तता, अपराध या भ्रष्ट/अवैध आचरण आधार हो सकते हैं।
अधिकार का स्वरूप
वयस्क मताधिकार अनुच्छेद 326 में संवैधानिक है; वास्तविक पंजीकरण और मतदान विधियों तथा नियमों के माध्यम से होता है।
9. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और 1951
कानून
मुख्य क्षेत्र
स्मृति-सूत्र
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950
सीटों का आवंटन, निर्वाचन क्षेत्र, मतदाता की अर्हताएँ और निर्वाचक नामावली की तैयारी।
“सीट और सूची।”
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951
चुनाव संचालन; सदस्यता की अर्हता/निरर्हता; भ्रष्ट आचरण और अपराध; विवाद तथा निर्वाचन याचिकाएँ।
“उम्मीदवारी, संचालन और चुनौती।”
10. सर्वाधिक मत और आनुपातिक प्रतिनिधित्व
बिंदु
सर्वाधिक मत से विजय (FPTP)
एकल संक्रमणीय मत से आनुपातिक प्रतिनिधित्व
मूल नियम
सबसे अधिक वैध मत पाने वाला उम्मीदवार जीतता है; पूर्ण बहुमत अनिवार्य नहीं।
मतदाता वरीयता क्रम देता है; लागू नियमों के अनुसार कोटा और मतों का अंतरण होता है।
प्रमुख प्रयोग
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं का प्रत्यक्ष चुनाव।
राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यसभा और विधान परिषद के निर्दिष्ट चुनाव।
परिणाम का आधार
सामान्यतः प्रादेशिक क्षेत्र से एक प्रतिनिधि।
निर्वाचक मंडल या बहुसदस्यीय चुनाव में वरीयताओं का उपयोग।
मुख्य भ्रम
विजेता को 50 प्रतिशत पार करना जरूरी नहीं।
हर पद का निर्वाचक मंडल एक जैसा नहीं होता।
12. आरक्षित सीट और परिसीमन
विषय
सही समझ
अनुसूचित जाति/जनजाति आरक्षण
अनुच्छेद 330 और 332 लोकसभा तथा विधानसभाओं में आरक्षित सीट देते हैं; पात्र वर्ग का उम्मीदवार चुनाव लड़ता है, पर क्षेत्र के सभी निर्वाचक मतदान करते हैं।
परिसीमन
सीमाएँ और सीट-आवंटन संवैधानिक/वैधानिक ढाँचे से तय होते हैं, आयोग की निरंकुश इच्छा से नहीं।
अनुच्छेद 329(a)
अनुच्छेद 327–328 के अधीन बनाए गए या बनाए गए माने जाने वाले निर्दिष्ट परिसीमन/स्थान-वितरण कानूनों को न्यायालय में चुनौती से सुरक्षा।
आरक्षण और पृथक निर्वाचन
आरक्षण उम्मीदवार की पात्रता बदलता है; अनुच्छेद 325 एक सामान्य निर्वाचक नामावली बनाए रखता है।
13. भारत निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग
बिंदु
भारत निर्वाचन आयोग
राज्य निर्वाचन आयोग
अनुच्छेद
324
पंचायत—243K; नगरपालिका—243ZA।
क्षेत्र
संसद, राज्य विधानमंडल, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति।
राज्य के ग्रामीण और नगरीय स्थानीय निकाय।
प्रमुख की नियुक्ति
वर्तमान केंद्रीय कानून के अधीन राष्ट्रपति मुख्य/अन्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त करते हैं।
राज्यपाल राज्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त करता है।
बिहार उदाहरण
बिहार के लोकसभा और विधानसभा चुनाव।
बिहार के पंचायत और नगरपालिका चुनाव।
14. बिहार विशेष
तथ्य
सत्यापित स्थिति
बिहार विधानसभा
243 निर्वाचित निर्वाचन क्षेत्र।
आरक्षित सीटें
38 अनुसूचित जाति और 2 अनुसूचित जनजाति; 203 अनारक्षित।
मतदान प्रणाली
हर निर्वाचन क्षेत्र सर्वाधिक मत प्रणाली से एक सदस्य चुनता है।
प्राधिकारी
विधानसभा चुनाव भारत निर्वाचन आयोग; स्थानीय निकाय चुनाव बिहार राज्य निर्वाचन आयोग।
परिवर्तनशील आँकड़े
नामावली संख्या, मतदान प्रतिशत, कार्यक्रम, उम्मीदवार और पदाधिकारी वर्तमान आयोग/बिहार मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के प्रकाशन से जाँचें।
15. आदर्श आचार संहिता
आदर्श आचार संहिता दलों और उम्मीदवारों के लिए सहमति से विकसित मानकों का समूह है। आयोग के अनुसार यह चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से चुनाव प्रक्रिया की समाप्ति तक लागू रहती है। यह प्रचार, सभा, जुलूस, मतदान-दिवस के व्यवहार और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग को नियंत्रित करती है। हर उल्लंघन को अपने-आप अलग वैधानिक अपराध न मानें; यदि वही आचरण लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम या दूसरे कानून का भी उल्लंघन है, तो अपराध और दंड उस कानून से आते हैं, जबकि आयोग चुनावी अनुशासन के लिए संवैधानिक तथा प्रशासनिक शक्ति का प्रयोग करता है।
16. स्मृति-कालक्रम
19. आधिकारिक पूर्व प्रश्न स्थिति
नीचे किसी प्रश्न को आधिकारिक बीपीएससी पूर्व प्रश्न नहीं कहा गया है, क्योंकि आयोग की पुस्तिका से उसका पूरा शब्दांकन और विकल्प सत्यापित नहीं हुए। सभी बीपीएससी-शैली के मौलिक अभ्यास प्रश्न हैं।
21. बीपीएससी-शैली अभ्यास: ठीक 20 बहुविकल्पीय प्रश्न