BPSC के प्रश्न प्रायः किसी एक शब्द को बदलकर पूछे जाते हैं: प्रस्तुत बनाम पारित, सिफारिश बनाम संशोधन, चर्चा बनाम मतदान और सत्रावसान बनाम विघटन। हर कथन को चार कसौटियों पर परखें: इसे किस सदन में आरंभ किया जा सकता है? दूसरा सदन क्या कर सकता है? राष्ट्रपति की सिफारिश किस चरण पर चाहिए? लोकसभा के विघटन पर क्या होगा?
संवैधानिक आधार अनुच्छेद 107–117 हैं। अनुच्छेद 118–122 सदनों के नियम, वित्तीय कार्य की प्रक्रिया, भाषा, न्यायाधीशों के आचरण पर चर्चा की सीमा और केवल प्रक्रियागत अनियमितता के आधार पर संसदीय कार्यवाही को न्यायालय में चुनौती से संरक्षण बताते हैं। इसके बाद सदन के नियम और परंपराएँ प्रश्नकाल, शून्यकाल, कटौती प्रस्ताव तथा समिति-जाँच जैसे साधन देती हैं।
2. अनुच्छेद मानचित्र: 107–122
अनुच्छेद
विषय
परीक्षा-संकेत
107
विधेयकों का प्रस्तुत होना, पारित होना और व्यपगत होने के नियम।
सामान्यतः कोई भी सदन; विघटन महत्त्वपूर्ण।
108
निर्धारित विधायी गतिरोध में संयुक्त बैठक।
धन विधेयक के लिए नहीं।
109–110
धन विधेयक की विशेष प्रक्रिया और परिभाषा।
लोकसभा की प्रधानता; अध्यक्ष का प्रमाणपत्र।
111
विधेयकों पर राष्ट्रपति की अनुमति।
केवल गैर-धन विधेयक लौटाया जा सकता है।
112–116
वार्षिक वित्तीय विवरण, प्राक्कलन, विनियोग, अनुपूरक/अधिक अनुदान और विशेष अनुदान।
बजट की संरचना।
117
वित्त विधेयकों के संबंध में विशेष उपबंध।
दो अलग श्रेणियाँ।
118–120
सदन के नियम, वित्तीय कार्य का विनियमन और भाषा।
प्रक्रिया और संचालन।
121–122
न्यायाधीशों के आचरण की चर्चा पर रोक; प्रक्रियागत अनियमितता के आधार पर न्यायिक हस्तक्षेप से संरक्षण।
दोनों में से कोई भी असीमित उन्मुक्ति नहीं देता।
3. विधेयकों की चार श्रेणियाँ
श्रेणी
आरंभ और सिफारिश
राज्यसभा की शक्ति
संयुक्त बैठक
साधारण विधेयक
किसी भी सदन में; केवल साधारण होने के कारण अनुच्छेद 117 की विशेष सिफारिश नहीं चाहिए।
संशोधित या अस्वीकार कर सकती है; दोनों सदनों को समान पाठ पारित करना होता है।
अनुच्छेद 108 की गतिरोध-स्थितियों में संभव।
धन विधेयक, अनुच्छेद 110
केवल लोकसभा में; अनुच्छेद 117(1) के अनुसार प्रस्तुत करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश।
14 दिनों में केवल परिवर्तन की सिफारिश; लोकसभा स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है।
कभी नहीं।
वित्त विधेयक श्रेणी I, अनुच्छेद 117(1)
अनुच्छेद 110(1)(क)–(च) के एक या अधिक विषयों के साथ अन्य विषय भी; केवल लोकसभा में, राष्ट्रपति की सिफारिश पर।
यह धन विधेयक नहीं, इसलिए संशोधन या अस्वीकृति की पूर्ण शक्ति।
संभव।
वित्त विधेयक श्रेणी II, अनुच्छेद 117(3)
अधिनियम बनने पर भारत की संचित निधि से व्यय होगा; किसी भी सदन में आरंभ हो सकता है। उस सदन द्वारा पारित करने से पहले राष्ट्रपति की सिफारिश आवश्यक।
पूर्ण विधायी शक्ति।
संभव।
4. साधारण विधेयक की विधायी यात्रा
5. लंबित विधेयक कब व्यपगत होता है
स्थिति
परिणाम
किसी सदन का सत्रावसान
केवल सत्रावसान के कारण लंबित विधेयक व्यपगत नहीं होता।
लोकसभा के विघटन के समय विधेयक राज्यसभा में लंबित है और लोकसभा ने उसे पारित नहीं किया
व्यपगत नहीं होता।
लोकसभा के विघटन के समय विधेयक लोकसभा में लंबित है
व्यपगत हो जाता है।
लोकसभा से पारित, राज्यसभा में लंबित विधेयक के दौरान लोकसभा का विघटन
अनुच्छेद 108 की संयुक्त-बैठक अधिसूचना वाली विशेष स्थिति को छोड़कर व्यपगत हो जाता है।
राष्ट्रपति संयुक्त बैठक बुलाने की मंशा पहले ही अधिसूचित कर चुका है
विघटन के बाद भी संयुक्त बैठक हो सकती है; अनुच्छेद 108 प्रक्रिया को बचाता है।
6. संयुक्त बैठक: अनुच्छेद 108
राष्ट्रपति संयुक्त बैठक की मंशा अधिसूचित कर सकता है जब एक सदन गैर-धन विधेयक को अस्वीकार कर दे, दोनों सदन संशोधनों पर अंतिम रूप से असहमत हों, अथवा दूसरा सदन विधेयक मिलने के बाद छह महीने से अधिक समय तक उसे पारित न करे। छह महीने की गणना में वह अवधि नहीं जुड़ती जब संबंधित सदन का सत्रावसान हो या वह लगातार चार दिनों से अधिक के लिए स्थगित हो। लागू नियमों के अनुसार लोकसभा अध्यक्ष अध्यक्षता करता है। लोकसभा की संख्या उसे सामान्यतः बढ़त देती है, किंतु निर्णय दोनों सदनों के उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों से होता है।
धन विधेयक के लिए संयुक्त बैठक नहीं होती। संविधान संशोधन विधेयक के लिए भी अनुच्छेद 108 का मार्ग नहीं है, क्योंकि अनुच्छेद 368 में प्रत्येक सदन द्वारा अलग-अलग निर्धारित बहुमत आवश्यक है। संयुक्त बैठक गतिरोध दूर करने का उपाय है, कोई नियमित तीसरा सदन नहीं।
संसद की सत्यापित संयुक्त बैठकें
7. धन विधेयक: परिभाषा और मार्ग
भाग
नियम
कर
किसी कर का अधिरोपण, उन्मूलन, परिहार, परिवर्तन या विनियमन।
उधार
भारत सरकार का उधार, प्रत्याभूति और संघ की वित्तीय बाध्यताओं से संबंधित विधि में संशोधन।
निधियाँ
भारत की संचित निधि या आकस्मिकता निधि की अभिरक्षा, उनमें धन जमा करना अथवा निकालना।
विनियोग
भारत की संचित निधि से धन का विनियोग।
भारित व्यय
किसी व्यय को भारित घोषित करना अथवा ऐसा व्यय बढ़ाना।
प्राप्ति और लेखापरीक्षा
संचित निधि या लोक लेखा में धन की प्राप्ति, अभिरक्षा, निर्गमन और संघ या राज्य के लेखों की लेखापरीक्षा।
आनुषंगिक विषय
सूचीबद्ध विषयों में से किसी के आनुषंगिक विषय।
प्रमाणन
प्रश्न उठने पर अध्यक्ष का निर्णय अंतिम; राज्यसभा और राष्ट्रपति को भेजते समय अध्यक्ष का हस्ताक्षरित प्रमाणपत्र लगता है।
8. राष्ट्रपति की अनुमति: तुलना में छिपा भ्रम
विधेयक और अधिनियम को एक न मानें। पारित विधेयक संवैधानिक रूप से आवश्यक अनुमति और लागू होने की व्यवस्था के बाद ही अधिनियम बनता है।
9. बजट की शब्दावली
शब्द
अर्थ
नियंत्रण
वार्षिक वित्तीय विवरण, अनुच्छेद 112
वित्त वर्ष के लिए भारत सरकार की अनुमानित प्राप्तियाँ और व्यय; भारित तथा अन्य व्यय और राजस्व तथा अन्य व्यय अलग दिखाए जाते हैं।
राष्ट्रपति इसे दोनों सदनों के समक्ष रखवाता है।
भारित व्यय
भारत की संचित निधि पर संविधान द्वारा भारित; उदाहरणों में राष्ट्रपति की उपलब्धियाँ, ऋण-भार और संविधान में निर्दिष्ट न्यायपालिका/CAG व्यय।
चर्चा हो सकती है, मतदान नहीं।
मतदान योग्य व्यय
अन्य व्यय, जो अनुदानों की माँगों के रूप में रखा जाता है।
लोकसभा माँग स्वीकार, अस्वीकार या कम कर सकती है।
विनियोग अधिनियम
संचित निधि से मतदान द्वारा स्वीकृत अनुदान और भारित राशि निकालने का कानूनी अधिकार।
अनुदानों की माँगें पारित होने के बाद।
वित्त विधेयक
कर प्रस्तावों को लागू करता है; नाम देखकर हर “वित्त विधेयक” की समान प्रक्रिया न मानें, उसकी वास्तविक संवैधानिक विषय-वस्तु देखें।
अनुच्छेद 110 पूरा करने पर सामान्यतः धन विधेयक की प्रक्रिया।
11. कटौती प्रस्ताव और गिलोटिन
प्रस्ताव
माँगी गई कमी
उद्देश्य
नीति कटौती
माँग घटाकर 1 रुपया।
माँग के आधार वाली नीति के प्रति असहमति व्यक्त करना।
मितव्ययिता कटौती
माँग में एक निश्चित राशि की कमी।
संभव बचत बताना; किसी मद या एकमुश्त राशि को लक्ष्य बनाया जा सकता है।
सांकेतिक कटौती
माँग में 100 रुपये की कमी।
संघ के उत्तरदायित्व के क्षेत्र की किसी विशिष्ट शिकायत को सामने लाना।
12. मूल बजट के अतिरिक्त अनुदान
अनुदान
कब प्रयोग होता है
स्मृति-संकेत
अनुपूरक अनुदान
किसी सेवा के लिए स्वीकृत राशि अपर्याप्त हो।
वही सेवा, अधिक धन।
अतिरिक्त अनुदान
वार्षिक वित्तीय विवरण में न सोची गई नई सेवा की आवश्यकता हो।
नई सेवा।
अधिक अनुदान
उस वर्ष किसी सेवा पर स्वीकृत राशि से अधिक धन पहले ही खर्च हो चुका हो।
व्यय के बाद नियमितीकरण।
लेखानुदान
पूरी बजट प्रक्रिया पूरी होने तक वित्त वर्ष के एक भाग के लिए अग्रिम अनुदान।
सामान्य अंतरिम व्यय-सेतु।
प्रत्ययानुदान
अनपेक्षित माँग का स्वरूप या परिमाण इतना अनिश्चित हो कि सामान्य विवरण देना संभव न हो।
असाधारण, अनिश्चित माँग।
अपवादानुदान
विशेष उद्देश्य के लिए, जो किसी वित्त वर्ष की चालू सेवा का भाग न हो।
चालू सेवा से बाहर।
13. संसदीय समितियाँ
समिति
संरचना/कार्यकाल
मुख्य जाँच
लोक लेखा समिति
22: लोकसभा 15 + राज्यसभा 7; एक वर्ष।
विनियोग/लेखे और CAG प्रतिवेदन; धन अनुदान-सीमा तथा निर्धारित उद्देश्य के अनुसार खर्च हुआ या नहीं।
प्राक्कलन समिति
30, सभी लोकसभा से; एक वर्ष।
प्राक्कलनों में मितव्ययिता, दक्षता, प्रशासनिक सुधार और वैकल्पिक नीतियाँ।
लोक उपक्रम समिति
22: लोकसभा 15 + राज्यसभा 7; एक वर्ष।
लोक उपक्रमों के प्रतिवेदन/लेखे और संबंधित CAG प्रतिवेदन; दक्षता तथा स्वस्थ व्यावसायिक सिद्धांत।
विभाग-संबंधी स्थायी समितियाँ
24 समितियाँ; प्रत्येक में 31: लोकसभा 21 + राज्यसभा 10; कार्यकाल अधिकतम एक वर्ष।
अनुदान-माँगें, भेजे गए विधेयक, वार्षिक प्रतिवेदन और दीर्घकालीन नीति-दस्तावेज; प्रतिवेदन सिफारिशी होते हैं।
14. संसदीय नियंत्रण के साधन
साधन
मुख्य विशेषता
मतदान?
प्रश्नकाल
सामान्यतः पहला घंटा; तारांकित प्रश्न का मौखिक उत्तर और पूरक प्रश्न, अतारांकित का लिखित उत्तर, अल्प-सूचना प्रश्न अत्यावश्यक सार्वजनिक विषय पर।
निर्णय के लिए मतदान नहीं।
शून्यकाल
प्रश्नकाल/पत्र रखने के बाद अत्यावश्यक विषय उठाने की अवधि; भारतीय संसदीय परंपरा, नियमों में औपचारिक मान्यता नहीं।
स्वतः मतदान नहीं।
ध्यानाकर्षण
सदस्य मंत्री का ध्यान अत्यावश्यक सार्वजनिक विषय पर दिलाता है; मंत्री वक्तव्य देता है और संक्षिप्त स्पष्टीकरण होता है। भारतीय नवाचार।
मतदान नहीं।
अल्पकालिक चर्चा
लोकसभा नियम 193 के अंतर्गत अत्यावश्यक सार्वजनिक विषय पर, बिना औपचारिक प्रस्ताव के चर्चा।
मतदान नहीं।
स्थगन प्रस्ताव
निश्चित और अत्यावश्यक सार्वजनिक विषय पर सामान्य कार्य रोकने वाला लोकसभा का साधन; ग्राह्यता अध्यक्ष तय करता है।
पारित होने पर निंदा माना जाता है।
अविश्वास प्रस्ताव
जाँचता है कि मंत्रिपरिषद को लोकसभा का सामूहिक विश्वास है या नहीं; कारण बताना आवश्यक नहीं और केवल एक मंत्री के विरुद्ध नहीं।
हाँ; पराजय पर मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है।
निंदा प्रस्ताव
निर्दिष्ट नीतियों/कार्यों की आलोचना करता और कारण बताता है।
हाँ, ग्राह्य प्रस्ताव के अनुसार।
धन्यवाद प्रस्ताव
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा में सरकारी नीति की व्यापक समीक्षा।
संशोधन और प्रस्ताव मतदान हेतु रखे जाते हैं।
15. अनुच्छेद 118–122: प्रक्रियागत सुरक्षा और सीमाएँ
16. बिहार से संबंध
18. प्रारंभिक परीक्षा के भ्रम-बिंदु
19. आधिकारिक पिछले प्रश्न की स्थिति
इस विषय पर किसी प्रश्न का पूरा पाठ और विकल्प आधिकारिक BPSC पुस्तिका से सत्यापित नहीं किए गए, इसलिए यहाँ किसी प्रश्न को आधिकारिक पिछले वर्ष का प्रश्न नहीं कहा गया है। नीचे दिए प्रश्न मौलिक BPSC-शैली अभ्यास प्रश्न हैं।