BPSC में निकट दिखने वाले अंतरों पर प्रश्न बनते हैं: नियुक्ति में राष्ट्रपति बनाम राज्यपाल; संवैधानिक कार्यकाल बनाम कानून में निर्धारित कार्यकाल; संसद-संबद्ध प्रक्रिया से हटाना बनाम सर्वोच्च न्यायालय की जाँच के बाद राष्ट्रपति का आदेश; भारित व्यय बनाम मतदान योग्य व्यय; और संघीय निकाय बनाम राज्य का समकक्ष। वर्तमान पदधारियों के नाम समय-संवेदी हैं, इसलिए उन्हें स्थायी तथ्य के रूप में नहीं दिया गया है।
हर निकाय को इस क्रम में पढ़ें: संवैधानिक स्रोत → संरचना → नियुक्ति → कार्यकाल → हटाना → स्वतंत्रता की सुरक्षा → कार्य → प्रतिवेदन/जवाबदेही → बिहार से संबंध। किसी निकाय के संवैधानिक होने का अर्थ यह नहीं कि उसके सभी संचालन-विवरण संविधान में ही हों; संसद का कानून या विनियम भी विवरण दे सकते हैं।
2. एक सारणी में संवैधानिक मानचित्र
निकाय
मुख्य अनुच्छेद
नियुक्ति प्राधिकारी
मुख्य संवैधानिक उद्देश्य
भारत निर्वाचन आयोग
324–329
वर्तमान संसदीय कानून के अधीन राष्ट्रपति
संसद, राज्य विधानमंडल, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के लिए मतदाता सूची तथा चुनाव
भारत का नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG)
148–151
अपने हस्ताक्षर और मुहर सहित अधिपत्र द्वारा राष्ट्रपति
संविधान और संसदीय कानून के अधीन स्वतंत्र सार्वजनिक लेखापरीक्षा
UPSC / राज्य लोक सेवा आयोग / संयुक्त आयोग
315–323
संघ/संयुक्त के लिए राष्ट्रपति; राज्य के लिए राज्यपाल
परीक्षाएँ तथा लोक सेवा भर्ती और सेवा मामलों पर परामर्श
वित्त आयोग
280–281
राष्ट्रपति गठन और नियुक्ति करता है
संघ–राज्य कर-वितरण, अनुदान और निर्दिष्ट राजकोषीय विषयों पर अनुशंसा
3. भारत निर्वाचन आयोग: संवैधानिक रचना
बिंदु
नियम
अनुच्छेद 324(1)
मतदाता सूची तैयार करने और निर्दिष्ट चुनाव कराने का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण आयोग में निहित है।
निर्वाचन-क्षेत्र
संसद, प्रत्येक राज्य विधानमंडल तथा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पद।
संरचना
मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा राष्ट्रपति द्वारा समय-समय पर तय अन्य निर्वाचन आयुक्तों की संख्या, यदि कोई हो; यह संसदीय कानून के अधीन है।
प्रादेशिक आयुक्त
जब किसी चुनाव के लिए आवश्यक समझा जाए, आयोग से परामर्श के बाद राष्ट्रपति नियुक्त कर सकता है।
कर्मचारी सहायता
आयोग के अनुरोध पर अनुच्छेद 324(6) के अंतर्गत राष्ट्रपति या राज्यपाल आवश्यक कर्मचारी उपलब्ध कराता है।
इसके कार्यक्षेत्र में नहीं
पंचायत और नगरपालिका चुनाव अनुच्छेद 243K और 243ZA के अंतर्गत राज्य निर्वाचन आयोग के हैं।
5. निर्वाचन आयोग: कार्यकाल, वेतन और हटाने की सुरक्षा
विशेषता
वर्तमान सत्यापित नियम
कार्यकाल
पदग्रहण से छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो पहले हो।
पुनर्नियुक्ति
पुनर्नियुक्ति के पात्र नहीं; यदि निर्वाचन आयुक्त बाद में मुख्य निर्वाचन आयुक्त बने तो दोनों पदों पर कुल सेवा छह वर्ष से अधिक नहीं।
वेतन
2023 के अधिनियम की धारा 10 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के वेतन के बराबर।
त्यागपत्र
राष्ट्रपति को संबोधित लिखित पत्र।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाना
केवल सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान रीति और समान आधार पर।
अन्य निर्वाचन आयुक्त
मुख्य निर्वाचन आयुक्त की अनुशंसा के बिना नहीं हटाए जा सकते।
नियुक्ति के बाद शर्तें
अनुच्छेद 324 मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सेवा-शर्तों को उसके अहित में बदलने से रोकता है।
6. निर्वाचन आयोग के कार्य और सीमाएँ
निर्वाचन प्रशासन के भीतर
महत्त्वपूर्ण सीमा
कानून के अधीन मतदाता सूची तैयार/संशोधित करने का पर्यवेक्षण
नागरिकता का निर्धारण नागरिकता कानून से होता है; आयोग नागरिकता नहीं बनाता।
चुनाव कार्यक्रम, मतदान, मतगणना और परिणाम-प्रक्रिया का पर्यवेक्षण
न्यायालय और निर्वाचन याचिका कानून की अपनी संवैधानिक/वैधानिक भूमिका बनी रहती है।
वैध कानूनी आदेशों के अंतर्गत दल की मान्यता और चुनाव-चिह्न
किसी दल का पंजीकरण और राष्ट्रीय/राज्य दल के रूप में मान्यता दो अलग प्रश्न हैं।
आदर्श आचार संहिता का संचालन और स्वतंत्र-निष्पक्ष चुनाव के लिए निर्देश
आदर्श आचार संहिता स्वयं संसदीय अधिनियम नहीं है; कानूनी उल्लंघन को लागू कानून से जोड़ना होगा।
अनुच्छेद 103 और 192 के निर्दिष्ट अयोग्यता प्रश्नों में परामर्श
औपचारिक निर्णय क्रमशः राष्ट्रपति या राज्यपाल का है, जो संवैधानिक व्यवस्था में आयोग की राय के अनुसार कार्य करता है।
7. CAG: नियुक्ति और स्वतंत्रता
विशेषता
संवैधानिक/वैधानिक नियम
अनुच्छेद 148
भारत का एक नियंत्रक-महालेखापरीक्षक होगा।
नियुक्ति
राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुहर सहित अधिपत्र द्वारा।
शपथ
राष्ट्रपति या राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त व्यक्ति के समक्ष, तीसरी अनुसूची के प्रारूप में।
1971 के अधिनियम के अंतर्गत कार्यकाल
छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो पहले हो।
त्यागपत्र
राष्ट्रपति को संबोधित लिखित पत्र।
हटाना
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान रीति और समान आधार पर।
वेतन
CAG के कर्तव्य, शक्तियाँ और सेवा-शर्त अधिनियम, 1971 के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के वेतन के बराबर।
पद छोड़ने के बाद
संघ या किसी राज्य सरकार के अधीन आगे किसी पद के लिए अपात्र।
8. CAG की सुरक्षा: कार्यपालिका की लेखापरीक्षा कैसे स्वतंत्र रहती है?
सुरक्षा
अर्थ
कठिन हटाने की प्रक्रिया
कार्यपालिका अपनी इच्छा से CAG को नहीं हटा सकती।
अहितकारी परिवर्तन निषिद्ध
नियुक्ति के बाद वेतन और अन्य सेवा-शर्तें CAG के अहित में नहीं बदली जा सकतीं।
बाद में सरकारी पद नहीं
भावी पद के लिए कार्यपालिका को प्रसन्न करने का प्रोत्साहन घटता है।
भारित व्यय
CAG कार्यालय का प्रशासनिक व्यय भारत की संचित निधि पर भारित होता है।
विभागीय स्वतंत्रता
संविधान और संसदीय कानून के अधीन, भारतीय लेखा और लेखापरीक्षा विभाग के कर्मचारियों की सेवा-शर्तें तथा CAG की प्रशासनिक शक्तियाँ CAG से परामर्श के बाद राष्ट्रपति के नियमों से निर्धारित होती हैं।
9. CAG के कर्तव्य, लेखे और प्रतिवेदन
अनुच्छेद / कानून
परीक्षोपयोगी बिंदु
अनुच्छेद 149
संसद संघ/राज्य के लेखों और अन्य प्राधिकरण/निकाय के संबंध में कर्तव्य और शक्तियाँ निर्धारित करती है; मुख्य कानून 1971 का CAG अधिनियम है।
अनुच्छेद 150
संघ और राज्य के लेखे राष्ट्रपति द्वारा CAG की सलाह पर निर्धारित प्रारूप में रखे जाते हैं।
अनुच्छेद 151(1)
संघ संबंधी लेखापरीक्षा प्रतिवेदन राष्ट्रपति को, जो उन्हें संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाता है।
अनुच्छेद 151(2)
राज्य संबंधी प्रतिवेदन राज्यपाल को, जो उसे राज्य विधानमंडल के समक्ष रखवाता है।
1971 का अधिनियम
व्यय, प्राप्तियों, भंडार, पर्याप्त रूप से वित्तपोषित निकायों, अनुदान/ऋण और निर्दिष्ट सरकारी कंपनियों/निगमों की लेखापरीक्षा।
लेखापरीक्षा के प्रकार
वित्तीय, अनुपालन और निष्पादन लेखापरीक्षा क्रमशः शुद्धता/प्रस्तुति, वैधता/नियम-पालन तथा मितव्ययिता-दक्षता-प्रभावशीलता पूछती हैं।
10. लोक सेवा आयोग: अनुच्छेद 315–323
अनुच्छेद
विषय
315
संघ के लिए UPSC, प्रत्येक राज्य के लिए SPSC; दो या अधिक राज्यों की सहमति पर संसदीय कानून से संयुक्त राज्य आयोग।
316
सदस्यों की नियुक्ति, कार्यकाल और कार्यवाहक अध्यक्ष।
317
हटाना और निलंबन।
318
सदस्यों और कर्मचारियों की सेवा-शर्तों के विनियम।
319
कार्यकाल के बाद रोजगार संबंधी प्रतिबंध।
320
कार्य और परामर्श।
321
संसद/राज्य विधानमंडल कानून से कार्य बढ़ा सकता है।
322
उचित संचित निधि पर भारित व्यय।
323
वार्षिक प्रतिवेदन और सलाह न मानने पर स्पष्टीकरण ज्ञापन।
11. UPSC, SPSC और संयुक्त आयोग: नियुक्ति और कार्यकाल
विशेषता
UPSC
SPSC
संयुक्त आयोग
अध्यक्ष/सदस्यों की नियुक्ति
राष्ट्रपति
राज्यपाल
राष्ट्रपति
सरकारी सेवा अनुभव नियम
यथासंभव लगभग आधे सदस्यों ने कम-से-कम दस वर्ष सरकारी पद धारण किया हो; अनुच्छेद के अनुसार संविधान-पूर्व की पात्र राजकीय सेवा भी गिनी जाती है।
कार्यकाल
छह वर्ष या आयु 65, जो पहले हो
छह वर्ष या आयु 62, जो पहले हो
छह वर्ष या आयु 62, जो पहले हो
त्यागपत्र किसे
राष्ट्रपति
राज्यपाल
राष्ट्रपति
उसी पद पर पुनर्नियुक्ति
कार्यकाल पूरा करने वाला सदस्य उसी पद पर पुनर्नियुक्त नहीं हो सकता; अनुच्छेद 319 अलग से निर्दिष्ट उच्चतर/अन्य नियुक्ति की अनुमति देता है।
कार्यवाहक अध्यक्ष
राष्ट्रपति सदस्यों में से नियुक्त करता है
राज्यपाल सदस्यों में से नियुक्त करता है
राष्ट्रपति सदस्यों में से नियुक्त करता है
13. UPSC और SPSC के कार्य
अनुच्छेद 320 का कार्य
अर्थ
परीक्षा आयोजित करना
संघ सेवाओं के लिए UPSC और राज्य सेवाओं के लिए SPSC।
संयुक्त भर्ती में सहायता
दो या अधिक राज्यों के अनुरोध पर UPSC उनकी संयुक्त भर्ती योजना बनाने/चलाने में सहायता कर सकता है।
भर्ती-पद्धति
नियुक्ति, पदोन्नति और स्थानांतरण की पद्धति और सिद्धांतों पर परामर्श।
अभ्यर्थी की उपयुक्तता
नियुक्ति, पदोन्नति और एक सेवा से दूसरी में स्थानांतरण पर परामर्श।
अनुशासनिक विषय
सिविल सेवकों को प्रभावित करने वाले निर्दिष्ट अनुशासनिक मामलों, अभ्यावेदन/याचिका सहित, पर परामर्श।
विधिक खर्च और सेवा-चोट पेंशन दावे
आधिकारिक कार्य या सेवा में चोट से जुड़े निर्दिष्ट दावों पर परामर्श।
14. लोक सेवा आयोग की सुरक्षा और प्रतिवेदन
सुरक्षा/जवाबदेही
UPSC
SPSC
व्यय
भारत की संचित निधि पर भारित
राज्य की संचित निधि पर भारित
नियुक्ति के बाद सेवा-शर्त
सदस्य के अहित में नहीं बदली जा सकती।
वार्षिक प्रतिवेदन
राष्ट्रपति को
राज्यपाल को
विधानमंडल के समक्ष रखना
राष्ट्रपति संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखता है
राज्यपाल राज्य विधानमंडल के समक्ष रखता है
सलाह न मानी गई हो
उन मामलों और कारणों का स्पष्टीकरण ज्ञापन प्रतिवेदन के साथ रखा जाता है।
हटाने का प्राधिकारी
राष्ट्रपति; कदाचार के लिए सर्वोच्च न्यायालय की जाँच वाली सुरक्षा।
15. अनुच्छेद 319: आयोग पद के बाद अनुमत मार्ग
छोड़ा गया पद
आगे क्या हो सकता है
UPSC अध्यक्ष
संघ या राज्य सरकार के अधीन आगे कोई रोजगार नहीं।
SPSC अध्यक्ष
UPSC अध्यक्ष/सदस्य या किसी अन्य SPSC का अध्यक्ष बन सकता है; अन्य सरकारी रोजगार नहीं।
UPSC का अध्यक्ष से अलग सदस्य
UPSC अध्यक्ष या किसी SPSC का अध्यक्ष बन सकता है; अन्य सरकारी रोजगार नहीं।
SPSC का अध्यक्ष से अलग सदस्य
UPSC अध्यक्ष/सदस्य या उसी/किसी अन्य SPSC का अध्यक्ष बन सकता है; अन्य सरकारी रोजगार नहीं।
16. वित्त आयोग: संरचना और कार्य
विशेषता
अनुच्छेद 280 का नियम
स्वरूप
समय-समय पर गठित संवैधानिक आयोग; स्थायी रूप से बैठा निकाय नहीं।
गठन
राष्ट्रपति हर पाँचवें वर्ष या आवश्यकता हो तो पहले गठित करता है।
संरचना
राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त एक अध्यक्ष और चार अन्य सदस्य।
ऊर्ध्वाधर वितरण
विभाज्य शुद्ध कर-आय को संघ और राज्यों में बाँटने की अनुशंसा।
क्षैतिज वितरण
राज्यों के हिस्से को अलग-अलग राज्यों में बाँटने की अनुशंसा।
अनुदान
भारत की संचित निधि से राज्यों के राजस्व को सहायता-अनुदान देने वाले सिद्धांतों की अनुशंसा।
स्थानीय निकाय
राज्य वित्त आयोग की अनुशंसाओं के आधार पर पंचायतों और नगरपालिकाओं के संसाधन बढ़ाने हेतु राज्य की संचित निधि बढ़ाने के उपाय।
अन्य विषय
सुदृढ़ वित्त के हित में राष्ट्रपति द्वारा भेजा गया कोई अन्य विषय।
17. वित्त आयोग: योग्यता, शक्ति और प्रतिवेदन
बिंदु
सत्यापित नियम
अध्यक्ष की योग्यता
लोक कार्यों का अनुभव।
चार सदस्यों की योग्यता का समूह
उच्च न्यायालय का न्यायाधीश/उसके लिए योग्य; सरकारी वित्त और लेखों का विशेष ज्ञान; वित्त और प्रशासन का व्यापक अनुभव; या अर्थशास्त्र का विशेष ज्ञान।
अपात्रता
1951 का अधिनियम विकृतचित्तता, अनुन्मोचित दिवालियापन, नैतिक अधमता वाले अपराध में दोषसिद्धि और कार्य को हानिकारक ढंग से प्रभावित करने वाले हित को समेटता है।
प्रक्रिया
आयोग अपनी प्रक्रिया निर्धारित करता है।
दीवानी न्यायालय जैसी शक्तियाँ
गवाह बुलाने, दस्तावेज प्रस्तुत कराने और सार्वजनिक अभिलेख मँगाने जैसे निर्दिष्ट विषयों में।
अनुच्छेद 281
राष्ट्रपति हर अनुशंसा और उस पर की गई कार्रवाई का स्पष्टीकरण ज्ञापन संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखता है।
प्रभाव
अनुशंसाएँ अपने-आप धन-विनियोग नहीं बनतीं; प्रतिवेदन और कार्रवाई ज्ञापन संवैधानिक पारदर्शिता देते हैं।
18. चार निकायों की परीक्षोपयोगी तुलना
आधार
निर्वाचन आयोग
CAG
UPSC/SPSC
वित्त आयोग
मुख्य परिणाम
चुनाव पर्यवेक्षण/निर्देश
लेखापरीक्षा प्रतिवेदन
परीक्षा और परामर्श
राजकोषीय अनुशंसाएँ
निरंतर या आवधिक
निरंतर संस्था
निरंतर पद
निरंतर आयोग
हर पाँच वर्ष या पहले गठित
हटाने का आधार
मुख्य आयुक्त: सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश जैसी रीति/आधार; अन्य आयुक्त: मुख्य आयुक्त की अनुशंसा
सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश जैसी रीति/आधार
राष्ट्रपति; कदाचार में सर्वोच्च न्यायालय जाँच
1951 के अधिनियम की सदस्यता/अपात्रता व्यवस्था, सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश वाला सूत्र नहीं
प्रतिवेदन-पथ
अनुच्छेद 151/323/281 जैसा वार्षिक प्रतिवेदन-पथ निर्दिष्ट नहीं
राष्ट्रपति/राज्यपाल → विधानमंडल
राष्ट्रपति/राज्यपाल → विधानमंडल
राष्ट्रपति → कार्रवाई ज्ञापन सहित संसद के दोनों सदन
बिहार में भूमिका
लोकसभा/विधानमंडल/राष्ट्रपति–उपराष्ट्रपति चुनाव प्रक्रिया
बिहार सरकार के लेखापरीक्षा प्रतिवेदन
BPSC भर्ती/परामर्श
बिहार को प्रभावित करने वाला कर-वितरण और अनुदान
19. बिहार के लिए प्रासंगिकता
संस्था
बिहार से संबंध
भारत निर्वाचन आयोग बनाम बिहार राज्य निर्वाचन आयोग
भारत निर्वाचन आयोग लोकसभा और बिहार विधानमंडल चुनाव करता है; बिहार राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत, ग्राम कचहरी और नगरीय स्थानीय निकाय चुनाव कराता है।
CAG
बिहार के लेखों से संबंधित प्रतिवेदन अनुच्छेद 151(2) के अंतर्गत राज्यपाल को दिए और बिहार विधानमंडल के समक्ष रखे जाते हैं।
BPSC
पूर्व संयुक्त व्यवस्था से अलग होने पर बिहार लोक सेवा आयोग 1 अप्रैल 1949 को अस्तित्व में आया; 26 जनवरी 1950 से अनुच्छेद 315 का संवैधानिक राज्य आयोग है।
BPSC के कार्य
राज्य प्रतियोगिता परीक्षा, भर्ती-पद्धति पर सलाह, पदोन्नति/स्थानांतरण की उपयुक्तता और अनुच्छेद 320–321 के निर्दिष्ट अनुशासनिक परामर्श।
संघ वित्त आयोग
उसका कर-वितरण और अनुदान बिहार के वित्त को प्रभावित करता है; किसी पुरस्कार-अवधि का सही हिस्सा वर्तमान आयोग प्रतिवेदन से जाँचें।
बिहार राज्य वित्त आयोग
राज्य–स्थानीय निकाय वित्त की समीक्षा हेतु अनुच्छेद 243I के अंतर्गत राज्यपाल द्वारा गठित अलग निकाय; उसकी अनुशंसाएँ अनुच्छेद 280 के स्थानीय निकाय खंड के लिए आधार बनती हैं।
22. आधिकारिक पिछले प्रश्नों की स्थिति
नीचे किसी प्रश्न को BPSC का आधिकारिक पिछला प्रश्न नहीं कहा गया, क्योंकि उसका पूरा कथन और विकल्प आधिकारिक BPSC प्रश्न-पुस्तिका से सत्यापित नहीं हुए। ये संविधान, वर्तमान केंद्रीय अधिनियमों और आधिकारिक संस्थागत स्रोतों पर आधारित मौलिक BPSC-शैली अभ्यास प्रश्न हैं।