BPSC · Polity

संवैधानिक निकाय–I

95 min read · Updated 5 Oct 2026

1. BPSC की मांग

BPSC में निकट दिखने वाले अंतरों पर प्रश्न बनते हैं: नियुक्ति में राष्ट्रपति बनाम राज्यपाल; संवैधानिक कार्यकाल बनाम कानून में निर्धारित कार्यकाल; संसद-संबद्ध प्रक्रिया से हटाना बनाम सर्वोच्च न्यायालय की जाँच के बाद राष्ट्रपति का आदेश; भारित व्यय बनाम मतदान योग्य व्यय; और संघीय निकाय बनाम राज्य का समकक्ष। वर्तमान पदधारियों के नाम समय-संवेदी हैं, इसलिए उन्हें स्थायी तथ्य के रूप में नहीं दिया गया है।

हर निकाय को इस क्रम में पढ़ें: संवैधानिक स्रोत → संरचना → नियुक्ति → कार्यकाल → हटाना → स्वतंत्रता की सुरक्षा → कार्य → प्रतिवेदन/जवाबदेही → बिहार से संबंध। किसी निकाय के संवैधानिक होने का अर्थ यह नहीं कि उसके सभी संचालन-विवरण संविधान में ही हों; संसद का कानून या विनियम भी विवरण दे सकते हैं।

2. एक सारणी में संवैधानिक मानचित्र

निकायमुख्य अनुच्छेदनियुक्ति प्राधिकारीमुख्य संवैधानिक उद्देश्य
भारत निर्वाचन आयोग324–329वर्तमान संसदीय कानून के अधीन राष्ट्रपतिसंसद, राज्य विधानमंडल, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के लिए मतदाता सूची तथा चुनाव
भारत का नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG)148–151अपने हस्ताक्षर और मुहर सहित अधिपत्र द्वारा राष्ट्रपतिसंविधान और संसदीय कानून के अधीन स्वतंत्र सार्वजनिक लेखापरीक्षा
UPSC / राज्य लोक सेवा आयोग / संयुक्त आयोग315–323संघ/संयुक्त के लिए राष्ट्रपति; राज्य के लिए राज्यपालपरीक्षाएँ तथा लोक सेवा भर्ती और सेवा मामलों पर परामर्श
वित्त आयोग280–281राष्ट्रपति गठन और नियुक्ति करता हैसंघ–राज्य कर-वितरण, अनुदान और निर्दिष्ट राजकोषीय विषयों पर अनुशंसा

3. भारत निर्वाचन आयोग: संवैधानिक रचना

बिंदुनियम
अनुच्छेद 324(1)मतदाता सूची तैयार करने और निर्दिष्ट चुनाव कराने का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण आयोग में निहित है।
निर्वाचन-क्षेत्रसंसद, प्रत्येक राज्य विधानमंडल तथा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पद।
संरचनामुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा राष्ट्रपति द्वारा समय-समय पर तय अन्य निर्वाचन आयुक्तों की संख्या, यदि कोई हो; यह संसदीय कानून के अधीन है।
प्रादेशिक आयुक्तजब किसी चुनाव के लिए आवश्यक समझा जाए, आयोग से परामर्श के बाद राष्ट्रपति नियुक्त कर सकता है।
कर्मचारी सहायताआयोग के अनुरोध पर अनुच्छेद 324(6) के अंतर्गत राष्ट्रपति या राज्यपाल आवश्यक कर्मचारी उपलब्ध कराता है।
इसके कार्यक्षेत्र में नहींपंचायत और नगरपालिका चुनाव अनुच्छेद 243K और 243ZA के अंतर्गत राज्य निर्वाचन आयोग के हैं।

5. निर्वाचन आयोग: कार्यकाल, वेतन और हटाने की सुरक्षा

विशेषतावर्तमान सत्यापित नियम
कार्यकालपदग्रहण से छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो पहले हो।
पुनर्नियुक्तिपुनर्नियुक्ति के पात्र नहीं; यदि निर्वाचन आयुक्त बाद में मुख्य निर्वाचन आयुक्त बने तो दोनों पदों पर कुल सेवा छह वर्ष से अधिक नहीं।
वेतन2023 के अधिनियम की धारा 10 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के वेतन के बराबर।
त्यागपत्रराष्ट्रपति को संबोधित लिखित पत्र।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटानाकेवल सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान रीति और समान आधार पर।
अन्य निर्वाचन आयुक्तमुख्य निर्वाचन आयुक्त की अनुशंसा के बिना नहीं हटाए जा सकते।
नियुक्ति के बाद शर्तेंअनुच्छेद 324 मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सेवा-शर्तों को उसके अहित में बदलने से रोकता है।

6. निर्वाचन आयोग के कार्य और सीमाएँ

निर्वाचन प्रशासन के भीतरमहत्त्वपूर्ण सीमा
कानून के अधीन मतदाता सूची तैयार/संशोधित करने का पर्यवेक्षणनागरिकता का निर्धारण नागरिकता कानून से होता है; आयोग नागरिकता नहीं बनाता।
चुनाव कार्यक्रम, मतदान, मतगणना और परिणाम-प्रक्रिया का पर्यवेक्षणन्यायालय और निर्वाचन याचिका कानून की अपनी संवैधानिक/वैधानिक भूमिका बनी रहती है।
वैध कानूनी आदेशों के अंतर्गत दल की मान्यता और चुनाव-चिह्नकिसी दल का पंजीकरण और राष्ट्रीय/राज्य दल के रूप में मान्यता दो अलग प्रश्न हैं।
आदर्श आचार संहिता का संचालन और स्वतंत्र-निष्पक्ष चुनाव के लिए निर्देशआदर्श आचार संहिता स्वयं संसदीय अधिनियम नहीं है; कानूनी उल्लंघन को लागू कानून से जोड़ना होगा।
अनुच्छेद 103 और 192 के निर्दिष्ट अयोग्यता प्रश्नों में परामर्शऔपचारिक निर्णय क्रमशः राष्ट्रपति या राज्यपाल का है, जो संवैधानिक व्यवस्था में आयोग की राय के अनुसार कार्य करता है।

7. CAG: नियुक्ति और स्वतंत्रता

विशेषतासंवैधानिक/वैधानिक नियम
अनुच्छेद 148भारत का एक नियंत्रक-महालेखापरीक्षक होगा।
नियुक्तिराष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुहर सहित अधिपत्र द्वारा।
शपथराष्ट्रपति या राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त व्यक्ति के समक्ष, तीसरी अनुसूची के प्रारूप में।
1971 के अधिनियम के अंतर्गत कार्यकालछह वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो पहले हो।
त्यागपत्रराष्ट्रपति को संबोधित लिखित पत्र।
हटानासर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान रीति और समान आधार पर।
वेतनCAG के कर्तव्य, शक्तियाँ और सेवा-शर्त अधिनियम, 1971 के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के वेतन के बराबर।
पद छोड़ने के बादसंघ या किसी राज्य सरकार के अधीन आगे किसी पद के लिए अपात्र।

8. CAG की सुरक्षा: कार्यपालिका की लेखापरीक्षा कैसे स्वतंत्र रहती है?

सुरक्षाअर्थ
कठिन हटाने की प्रक्रियाकार्यपालिका अपनी इच्छा से CAG को नहीं हटा सकती।
अहितकारी परिवर्तन निषिद्धनियुक्ति के बाद वेतन और अन्य सेवा-शर्तें CAG के अहित में नहीं बदली जा सकतीं।
बाद में सरकारी पद नहींभावी पद के लिए कार्यपालिका को प्रसन्न करने का प्रोत्साहन घटता है।
भारित व्ययCAG कार्यालय का प्रशासनिक व्यय भारत की संचित निधि पर भारित होता है।
विभागीय स्वतंत्रतासंविधान और संसदीय कानून के अधीन, भारतीय लेखा और लेखापरीक्षा विभाग के कर्मचारियों की सेवा-शर्तें तथा CAG की प्रशासनिक शक्तियाँ CAG से परामर्श के बाद राष्ट्रपति के नियमों से निर्धारित होती हैं।

9. CAG के कर्तव्य, लेखे और प्रतिवेदन

अनुच्छेद / कानूनपरीक्षोपयोगी बिंदु
अनुच्छेद 149संसद संघ/राज्य के लेखों और अन्य प्राधिकरण/निकाय के संबंध में कर्तव्य और शक्तियाँ निर्धारित करती है; मुख्य कानून 1971 का CAG अधिनियम है।
अनुच्छेद 150संघ और राज्य के लेखे राष्ट्रपति द्वारा CAG की सलाह पर निर्धारित प्रारूप में रखे जाते हैं।
अनुच्छेद 151(1)संघ संबंधी लेखापरीक्षा प्रतिवेदन राष्ट्रपति को, जो उन्हें संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाता है।
अनुच्छेद 151(2)राज्य संबंधी प्रतिवेदन राज्यपाल को, जो उसे राज्य विधानमंडल के समक्ष रखवाता है।
1971 का अधिनियमव्यय, प्राप्तियों, भंडार, पर्याप्त रूप से वित्तपोषित निकायों, अनुदान/ऋण और निर्दिष्ट सरकारी कंपनियों/निगमों की लेखापरीक्षा।
लेखापरीक्षा के प्रकारवित्तीय, अनुपालन और निष्पादन लेखापरीक्षा क्रमशः शुद्धता/प्रस्तुति, वैधता/नियम-पालन तथा मितव्ययिता-दक्षता-प्रभावशीलता पूछती हैं।

10. लोक सेवा आयोग: अनुच्छेद 315–323

अनुच्छेदविषय
315संघ के लिए UPSC, प्रत्येक राज्य के लिए SPSC; दो या अधिक राज्यों की सहमति पर संसदीय कानून से संयुक्त राज्य आयोग।
316सदस्यों की नियुक्ति, कार्यकाल और कार्यवाहक अध्यक्ष।
317हटाना और निलंबन।
318सदस्यों और कर्मचारियों की सेवा-शर्तों के विनियम।
319कार्यकाल के बाद रोजगार संबंधी प्रतिबंध।
320कार्य और परामर्श।
321संसद/राज्य विधानमंडल कानून से कार्य बढ़ा सकता है।
322उचित संचित निधि पर भारित व्यय।
323वार्षिक प्रतिवेदन और सलाह न मानने पर स्पष्टीकरण ज्ञापन।

11. UPSC, SPSC और संयुक्त आयोग: नियुक्ति और कार्यकाल

विशेषताUPSCSPSCसंयुक्त आयोग
अध्यक्ष/सदस्यों की नियुक्तिराष्ट्रपतिराज्यपालराष्ट्रपति
सरकारी सेवा अनुभव नियमयथासंभव लगभग आधे सदस्यों ने कम-से-कम दस वर्ष सरकारी पद धारण किया हो; अनुच्छेद के अनुसार संविधान-पूर्व की पात्र राजकीय सेवा भी गिनी जाती है।
कार्यकालछह वर्ष या आयु 65, जो पहले होछह वर्ष या आयु 62, जो पहले होछह वर्ष या आयु 62, जो पहले हो
त्यागपत्र किसेराष्ट्रपतिराज्यपालराष्ट्रपति
उसी पद पर पुनर्नियुक्तिकार्यकाल पूरा करने वाला सदस्य उसी पद पर पुनर्नियुक्त नहीं हो सकता; अनुच्छेद 319 अलग से निर्दिष्ट उच्चतर/अन्य नियुक्ति की अनुमति देता है।
कार्यवाहक अध्यक्षराष्ट्रपति सदस्यों में से नियुक्त करता हैराज्यपाल सदस्यों में से नियुक्त करता हैराष्ट्रपति सदस्यों में से नियुक्त करता है

13. UPSC और SPSC के कार्य

अनुच्छेद 320 का कार्यअर्थ
परीक्षा आयोजित करनासंघ सेवाओं के लिए UPSC और राज्य सेवाओं के लिए SPSC।
संयुक्त भर्ती में सहायतादो या अधिक राज्यों के अनुरोध पर UPSC उनकी संयुक्त भर्ती योजना बनाने/चलाने में सहायता कर सकता है।
भर्ती-पद्धतिनियुक्ति, पदोन्नति और स्थानांतरण की पद्धति और सिद्धांतों पर परामर्श।
अभ्यर्थी की उपयुक्ततानियुक्ति, पदोन्नति और एक सेवा से दूसरी में स्थानांतरण पर परामर्श।
अनुशासनिक विषयसिविल सेवकों को प्रभावित करने वाले निर्दिष्ट अनुशासनिक मामलों, अभ्यावेदन/याचिका सहित, पर परामर्श।
विधिक खर्च और सेवा-चोट पेंशन दावेआधिकारिक कार्य या सेवा में चोट से जुड़े निर्दिष्ट दावों पर परामर्श।

14. लोक सेवा आयोग की सुरक्षा और प्रतिवेदन

सुरक्षा/जवाबदेहीUPSCSPSC
व्ययभारत की संचित निधि पर भारितराज्य की संचित निधि पर भारित
नियुक्ति के बाद सेवा-शर्तसदस्य के अहित में नहीं बदली जा सकती।
वार्षिक प्रतिवेदनराष्ट्रपति कोराज्यपाल को
विधानमंडल के समक्ष रखनाराष्ट्रपति संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखता हैराज्यपाल राज्य विधानमंडल के समक्ष रखता है
सलाह न मानी गई होउन मामलों और कारणों का स्पष्टीकरण ज्ञापन प्रतिवेदन के साथ रखा जाता है।
हटाने का प्राधिकारीराष्ट्रपति; कदाचार के लिए सर्वोच्च न्यायालय की जाँच वाली सुरक्षा।

15. अनुच्छेद 319: आयोग पद के बाद अनुमत मार्ग

छोड़ा गया पदआगे क्या हो सकता है
UPSC अध्यक्षसंघ या राज्य सरकार के अधीन आगे कोई रोजगार नहीं।
SPSC अध्यक्षUPSC अध्यक्ष/सदस्य या किसी अन्य SPSC का अध्यक्ष बन सकता है; अन्य सरकारी रोजगार नहीं।
UPSC का अध्यक्ष से अलग सदस्यUPSC अध्यक्ष या किसी SPSC का अध्यक्ष बन सकता है; अन्य सरकारी रोजगार नहीं।
SPSC का अध्यक्ष से अलग सदस्यUPSC अध्यक्ष/सदस्य या उसी/किसी अन्य SPSC का अध्यक्ष बन सकता है; अन्य सरकारी रोजगार नहीं।

16. वित्त आयोग: संरचना और कार्य

विशेषताअनुच्छेद 280 का नियम
स्वरूपसमय-समय पर गठित संवैधानिक आयोग; स्थायी रूप से बैठा निकाय नहीं।
गठनराष्ट्रपति हर पाँचवें वर्ष या आवश्यकता हो तो पहले गठित करता है।
संरचनाराष्ट्रपति द्वारा नियुक्त एक अध्यक्ष और चार अन्य सदस्य।
ऊर्ध्वाधर वितरणविभाज्य शुद्ध कर-आय को संघ और राज्यों में बाँटने की अनुशंसा।
क्षैतिज वितरणराज्यों के हिस्से को अलग-अलग राज्यों में बाँटने की अनुशंसा।
अनुदानभारत की संचित निधि से राज्यों के राजस्व को सहायता-अनुदान देने वाले सिद्धांतों की अनुशंसा।
स्थानीय निकायराज्य वित्त आयोग की अनुशंसाओं के आधार पर पंचायतों और नगरपालिकाओं के संसाधन बढ़ाने हेतु राज्य की संचित निधि बढ़ाने के उपाय।
अन्य विषयसुदृढ़ वित्त के हित में राष्ट्रपति द्वारा भेजा गया कोई अन्य विषय।

17. वित्त आयोग: योग्यता, शक्ति और प्रतिवेदन

बिंदुसत्यापित नियम
अध्यक्ष की योग्यतालोक कार्यों का अनुभव।
चार सदस्यों की योग्यता का समूहउच्च न्यायालय का न्यायाधीश/उसके लिए योग्य; सरकारी वित्त और लेखों का विशेष ज्ञान; वित्त और प्रशासन का व्यापक अनुभव; या अर्थशास्त्र का विशेष ज्ञान।
अपात्रता1951 का अधिनियम विकृतचित्तता, अनुन्मोचित दिवालियापन, नैतिक अधमता वाले अपराध में दोषसिद्धि और कार्य को हानिकारक ढंग से प्रभावित करने वाले हित को समेटता है।
प्रक्रियाआयोग अपनी प्रक्रिया निर्धारित करता है।
दीवानी न्यायालय जैसी शक्तियाँगवाह बुलाने, दस्तावेज प्रस्तुत कराने और सार्वजनिक अभिलेख मँगाने जैसे निर्दिष्ट विषयों में।
अनुच्छेद 281राष्ट्रपति हर अनुशंसा और उस पर की गई कार्रवाई का स्पष्टीकरण ज्ञापन संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखता है।
प्रभावअनुशंसाएँ अपने-आप धन-विनियोग नहीं बनतीं; प्रतिवेदन और कार्रवाई ज्ञापन संवैधानिक पारदर्शिता देते हैं।

18. चार निकायों की परीक्षोपयोगी तुलना

आधारनिर्वाचन आयोगCAGUPSC/SPSCवित्त आयोग
मुख्य परिणामचुनाव पर्यवेक्षण/निर्देशलेखापरीक्षा प्रतिवेदनपरीक्षा और परामर्शराजकोषीय अनुशंसाएँ
निरंतर या आवधिकनिरंतर संस्थानिरंतर पदनिरंतर आयोगहर पाँच वर्ष या पहले गठित
हटाने का आधारमुख्य आयुक्त: सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश जैसी रीति/आधार; अन्य आयुक्त: मुख्य आयुक्त की अनुशंसासर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश जैसी रीति/आधारराष्ट्रपति; कदाचार में सर्वोच्च न्यायालय जाँच1951 के अधिनियम की सदस्यता/अपात्रता व्यवस्था, सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश वाला सूत्र नहीं
प्रतिवेदन-पथअनुच्छेद 151/323/281 जैसा वार्षिक प्रतिवेदन-पथ निर्दिष्ट नहींराष्ट्रपति/राज्यपाल → विधानमंडलराष्ट्रपति/राज्यपाल → विधानमंडलराष्ट्रपति → कार्रवाई ज्ञापन सहित संसद के दोनों सदन
बिहार में भूमिकालोकसभा/विधानमंडल/राष्ट्रपति–उपराष्ट्रपति चुनाव प्रक्रियाबिहार सरकार के लेखापरीक्षा प्रतिवेदनBPSC भर्ती/परामर्शबिहार को प्रभावित करने वाला कर-वितरण और अनुदान

19. बिहार के लिए प्रासंगिकता

संस्थाबिहार से संबंध
भारत निर्वाचन आयोग बनाम बिहार राज्य निर्वाचन आयोगभारत निर्वाचन आयोग लोकसभा और बिहार विधानमंडल चुनाव करता है; बिहार राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत, ग्राम कचहरी और नगरीय स्थानीय निकाय चुनाव कराता है।
CAGबिहार के लेखों से संबंधित प्रतिवेदन अनुच्छेद 151(2) के अंतर्गत राज्यपाल को दिए और बिहार विधानमंडल के समक्ष रखे जाते हैं।
BPSCपूर्व संयुक्त व्यवस्था से अलग होने पर बिहार लोक सेवा आयोग 1 अप्रैल 1949 को अस्तित्व में आया; 26 जनवरी 1950 से अनुच्छेद 315 का संवैधानिक राज्य आयोग है।
BPSC के कार्यराज्य प्रतियोगिता परीक्षा, भर्ती-पद्धति पर सलाह, पदोन्नति/स्थानांतरण की उपयुक्तता और अनुच्छेद 320–321 के निर्दिष्ट अनुशासनिक परामर्श।
संघ वित्त आयोगउसका कर-वितरण और अनुदान बिहार के वित्त को प्रभावित करता है; किसी पुरस्कार-अवधि का सही हिस्सा वर्तमान आयोग प्रतिवेदन से जाँचें।
बिहार राज्य वित्त आयोगराज्य–स्थानीय निकाय वित्त की समीक्षा हेतु अनुच्छेद 243I के अंतर्गत राज्यपाल द्वारा गठित अलग निकाय; उसकी अनुशंसाएँ अनुच्छेद 280 के स्थानीय निकाय खंड के लिए आधार बनती हैं।

22. आधिकारिक पिछले प्रश्नों की स्थिति

नीचे किसी प्रश्न को BPSC का आधिकारिक पिछला प्रश्न नहीं कहा गया, क्योंकि उसका पूरा कथन और विकल्प आधिकारिक BPSC प्रश्न-पुस्तिका से सत्यापित नहीं हुए। ये संविधान, वर्तमान केंद्रीय अधिनियमों और आधिकारिक संस्थागत स्रोतों पर आधारित मौलिक BPSC-शैली अभ्यास प्रश्न हैं।

24. BPSC-शैली अभ्यास: ठीक 20 बहुविकल्पीय प्रश्न