BPSC · Polity

बिहार पंचायती राज और नगरीय स्थानीय निकाय

90 min read · Updated 5 Oct 2026

1. BPSC की मांग

चार स्तरों पर तैयारी करें: (1) संवैधानिक आधार, (2) बिहार के अधिनियम और नियम, (3) निर्वाचन-पद्धति और आरक्षण तथा (4) धरातल पर काम करने वाली संस्थाएँ। ग्राम सभा–ग्राम पंचायत–ग्राम कचहरी; मुखिया–सरपंच; प्रत्यक्ष–अप्रत्यक्ष पद; पंचायत समिति–जिला परिषद; नगर पंचायत–नगर परिषद–नगर निगम; और भारत निर्वाचन आयोग–राज्य निर्वाचन आयोग के अंतर अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।

स्थानीय निकायों की सही संख्या, रिक्त पद और चुनावी आरक्षण-सूची अधिसूचनाओं से बदल सकती है। इसलिए इस अध्याय में टिकाऊ वैधानिक नियम दिए गए हैं और चुनाव-विशेष आँकड़ों को वर्तमान आधिकारिक स्रोत से जाँचने योग्य बताया गया है।

2. वैधानिक आधार और समयरेखा

3. बिहार की ग्रामीण संस्थागत रूपरेखा

स्तर या संस्थाक्षेत्रप्रमुख निर्वाचित पदमुख्य भूमिका
ग्राम सभागाँव/ग्राम पंचायत क्षेत्र के पंजीकृत मतदाताबैठक की अध्यक्षता मुखिया; अनुपस्थिति में उप-मुखियाभागीदारी, खातों और योजनाओं पर चर्चा, लाभार्थी चयन तथा निगरानी
ग्राम पंचायतसामान्यतः अधिसूचित पंचायत क्षेत्र बनाने वाला गाँव या पास-पास के गाँवमुखियाग्राम स्वशासन और विकास
ग्राम कचहरीप्रत्येक ग्राम पंचायत क्षेत्रसरपंचराज्य अधिनियम के अधीन सीमित स्थानीय सुलह और न्यायिक कार्य
पंचायत समितिनगरपालिका और छावनी क्षेत्र को छोड़कर प्रखंडप्रमुखमध्यवर्ती स्तर पर योजना, समन्वय और विकास
जिला परिषदनगरपालिका और छावनी क्षेत्र को छोड़कर जिलाअध्यक्षजिला-स्तरीय ग्रामीण योजना, समन्वय और विकास

4. वर्ष 2006 के अधिनियम के अंतर्गत ग्राम सभा

नियमबिहार का प्रावधान
बैठक की आवृत्तिदो बैठकों के बीच तीन माह से अधिक अंतर नहीं हो सकता।
कौन बुलाता हैमुखिया उत्तरदायी है; मुखिया के विफल रहने की सूचना मिलने पर पंचायत समिति का कार्यपालक पदाधिकारी बैठक बुला सकता है।
गणपूर्तिग्राम सभा के कुल सदस्यों का एक-बीसवाँ; अधिनियम में वर्णित स्थगित बैठक के लिए एक-चालीसवाँ।
अध्यक्षतामुखिया; मुखिया की अनुपस्थिति में उप-मुखिया।
विकास संबंधी भूमिकायोजनाओं में सहायता, लाभार्थियों की पहचान, स्वैच्छिक श्रम/अंशदान को प्रोत्साहन तथा जनशिक्षा, कल्याण, एकता और सद्भाव को बढ़ावा।
जवाबदेही की भूमिकामुखिया, उप-मुखिया और ग्राम पंचायत सदस्यों से गतिविधियों, योजनाओं, आय और व्यय पर स्पष्टीकरण माँग सकती है।
सतर्कता समितिग्राम सभा कार्यों की निगरानी और उसे प्रतिवेदन देने के लिए ऐसे व्यक्तियों की एक या अधिक समितियाँ बना सकती है जो ग्राम पंचायत के सदस्य न हों।

5. ग्राम पंचायत: क्षेत्र, वार्ड और पद

विशेषतावैधानिक नियम
पंचायत क्षेत्र की सामान्य जनसंख्याजिलाधिकारी सरकारी आदेश और वैधानिक पुनरीक्षण के अधीन, यथासंभव 7,000 जनसंख्या वाले गाँव, पास-पास के गाँवों या उनके भाग को पंचायत क्षेत्र के रूप में अधिसूचित कर सकता है।
निगमित स्वरूपग्राम पंचायत शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुहर वाला निगमित निकाय है; वह संपत्ति रख सकती है, संविदा कर सकती है और उसके नाम से वाद हो सकता है।
संरचनाप्रत्यक्ष निर्वाचित मुखिया तथा प्रत्येक प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्र से एक प्रत्यक्ष निर्वाचित सदस्य।
वार्ड का मानदंडप्रत्येक ग्राम पंचायत सदस्य यथासंभव 500 जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करता है।
मुखियाउस ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष चुनाव।
उप-मुखियापहली बैठक में निर्वाचित वार्ड सदस्यों में से चुनाव; इस चुनाव में मुखिया भी मत देता है।
सामान्य कार्यकालपहली बैठक के लिए नियत तिथि से पाँच वर्ष, अधिनियम की विघटन संबंधी व्यवस्था के अधीन।

6. किसका चुनाव प्रत्यक्ष और किसका अप्रत्यक्ष?

संस्थामतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष चुनावनिर्वाचित सदस्यों में से अप्रत्यक्ष चुनाव
ग्राम पंचायतमुखिया और वार्ड सदस्यउप-मुखिया
ग्राम कचहरीसरपंच और पंचउप-सरपंच
पंचायत समितिप्रादेशिक सदस्यप्रत्यक्ष निर्वाचित समिति सदस्यों द्वारा प्रमुख और उप-प्रमुख
जिला परिषदप्रादेशिक सदस्यप्रत्यक्ष निर्वाचित परिषद सदस्यों द्वारा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष
2022 के संशोधन के बाद बिहार की नगरपालिकावार्ड पार्षद, मुख्य पार्षद और उप-मुख्य पार्षदअंतिम दो पदों की पुरानी अप्रत्यक्ष पद्धति के स्थान पर अब मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष चुनाव

7. ग्रामीण निर्वाचन-क्षेत्रों के जनसंख्या मानदंड

प्रत्यक्ष निर्वाचित निर्वाचन-क्षेत्र2006 के अधिनियम/आधिकारिक आयोग विवरण में जनसंख्या मानदंड
ग्राम पंचायत वार्ड सदस्ययथासंभव 500
ग्राम कचहरी पंचयथासंभव 500; प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्र ग्राम पंचायत सदस्य के क्षेत्र के अनुरूप
पंचायत समिति सदस्ययथासंभव 5,000
जिला परिषद सदस्ययथासाध्य 50,000; निर्वाचन-क्षेत्र प्रखंड की सीमा से बाहर नहीं जाना चाहिए

8. बिहार पंचायतों में आरक्षण की रूपरेखा

घटक2006 के आधिकारिक अधिनियम-पाठ का नियम
अनुसूचित जाति/जनजातिसंबंधित क्षेत्र में उनकी जनसंख्या के लगभग उसी अनुपात में सीटों का आरक्षण और चक्रानुक्रम से आवंटन।
पिछड़ा वर्गअनुसूचित जाति/जनजाति आरक्षण के बाद, कुल सीटों का यथासंभव किंतु 20% से अधिक नहीं; साथ ही अनुसूचित जाति/जनजाति/पिछड़ा वर्ग का कुल आरक्षण 50% की सीमा के भीतर।
आरक्षित वर्गों में महिलाएँवर्ग-आरक्षित सीटों का यथासंभव किंतु 50% से अधिक नहीं।
अनारक्षित वर्ग में महिलाएँअनुसूचित जाति/जनजाति/पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित न होने वाली सीटों का यथासंभव किंतु 50% से अधिक नहीं।
चक्रानुक्रमराज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशन, नियंत्रण और पर्यवेक्षण में निर्वाचन-क्षेत्रों/पदों को बारी-बारी आरक्षण।
विस्तारअधिनियम में दिए अनुसार यह व्यवस्था ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद और ग्राम कचहरी की सीटों तथा निर्दिष्ट अध्यक्षीय पदों तक लागू होती है।

9. पंचायत समिति: प्रखंड स्तर

विशेषताबिहार का नियम
क्षेत्रनगरपालिका या छावनी बोर्ड के क्षेत्र को छोड़कर प्रत्येक प्रखंड के लिए एक पंचायत समिति।
सदस्यप्रत्यक्ष निर्वाचित प्रादेशिक सदस्य; संबंधित लोकसभा/विधानसभा सदस्य; पंजीकृत राज्यसभा/विधान परिषद सदस्य; और समिति क्षेत्र के सभी मुखिया।
सामान्य मतदानसमिति की बैठकों में प्रत्येक सदस्य मत दे सकता है।
प्रमुख और उप-प्रमुख का चुनाव/हटानाकेवल प्रत्यक्ष निर्वाचित प्रादेशिक सदस्य मत देते हैं।
प्रमुख और उप-प्रमुखआयोग के पर्यवेक्षण में प्रत्यक्ष निर्वाचित समिति सदस्यों द्वारा और उन्हीं में से चुने जाते हैं।
बैठकअधिनियम में कम-से-कम प्रत्येक दो माह में एक सामान्य बैठक अपेक्षित है।
कार्यपालक पदाधिकारी2006 के मूल पाठ में सरकार द्वारा नियुक्त, उप-समाहर्ता पद से नीचे न होने वाला अधिकारी।

10. जिला परिषद: जिला ग्रामीण स्तर

विशेषताबिहार का नियम
क्षेत्रनगरपालिका और छावनी क्षेत्र को छोड़कर प्रत्येक जिले के लिए एक।
सदस्यप्रत्यक्ष निर्वाचित प्रादेशिक सदस्य; सभी प्रमुख; संबंधित लोकसभा/विधानसभा सदस्य; और पंजीकृत राज्यसभा/विधान परिषद सदस्य।
अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव/हटानाकेवल प्रत्यक्ष निर्वाचित प्रादेशिक सदस्य मत देते हैं।
अध्यक्ष और उपाध्यक्षप्रत्यक्ष निर्वाचित परिषद सदस्यों द्वारा और उन्हीं में से चुने जाते हैं।
कार्यकालपहली बैठक के लिए नियत तिथि से पाँच वर्ष, विघटन के नियमों के अधीन।
प्रशासनमुख्य कार्यपालक पदाधिकारी नीतियों/निर्देशों को लागू करता और क्रियान्वयन की निगरानी करता है; 2021 के संशोधन ने अधिकारी संबंधी विवरण बदला, इसलिए वर्तमान विवरण के लिए संशोधित पाठ पढ़ना चाहिए।
योजनाअधिनियम अपनी योजना-व्यवस्था द्वारा जिला आर्थिक विकास, सामाजिक न्याय और वार्षिक योजना का कार्य देता है।

11. ग्राम कचहरी: बिहार की विशिष्ट वैधानिक संस्था

बिंदुनियम
कानूनी स्रोतबिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 का अध्याय VI; यह संविधान के भाग IX द्वारा अनिवार्य अलग निकाय नहीं है।
गठनप्रत्येक ग्राम पंचायत क्षेत्र में।
संरचनाएक प्रत्यक्ष निर्वाचित सरपंच और प्रत्यक्ष निर्वाचित पंच; प्रत्येक पंच का क्षेत्र लगभग 500 जनसंख्या के अनुरूप।
उप-सरपंचपहली बैठक में निर्वाचित पंचों में से चुनाव; सरपंच भी मत देता है।
सहायतासचिव और न्याय मित्र; अधिनियम के अनुसार न्याय मित्र के पास मान्यताप्राप्त संस्था/विश्वविद्यालय से कम-से-कम तीन वर्षीय विधि उपाधि होनी चाहिए।
कार्यकालपहली बैठक से पाँच वर्ष; समय पर चुनाव और शेष अवधि संबंधी अधिनियम के व्यापक सिद्धांत लागू।
उद्देश्यराज्य कानून द्वारा सौंपे गए सीमित दीवानी और दांडिक मामलों का सुलभ ग्राम-स्तरीय समझौता और निर्णय।

12. ग्राम कचहरी का न्यायपीठ कैसे काम करता है?

चरणवैधानिक व्यवस्था
न्यायपीठ का गठनसामान्यतः सरपंच, दोनों पक्षों द्वारा नामित एक-एक पंच और सरपंच द्वारा चुने गए दो अन्य पंच; किसी के अनुपलब्ध या हितबद्ध होने पर अधिनियम के अनुसार प्रतिस्थापन।
गणपूर्तिधारा 101 के अनुसार कम-से-कम तीन, जिनमें सरपंच और पक्षों द्वारा नामित दोनों पंच शामिल हों।
पहला प्रयासन्यायपीठ बिना विलंब निष्पक्ष और सौहार्दपूर्ण समझौता कराने का प्रयास करे।
समझौता न होने परजाँच करता, आवश्यक साक्ष्य लेता और लिखित निर्णय देता है; बहुमत का निर्णय मान्य होता है तथा असहमति लिखी जा सकती है।
आधिकारिक रूप से प्रकाशित मूल पाठ में दांडिक शक्तिधारा 107 में ₹1,000 तक जुर्माना, पर कारावास की सजा नहीं।
आधिकारिक मूल पाठ में दीवानी क्षेत्रधारा 110 में ₹10,000 तक के निर्दिष्ट धन/चल संपत्ति/किराया/पशु-अतिचार दावे और कुछ बँटवारा वाद; अपवर्जन लागू और जटिल स्वत्व-प्रश्न पर अंतरण संभव।
अपीलन्यायपीठ के निर्णय के विरुद्ध पहले 30 दिन में पूर्ण पीठ; पूर्ण पीठ के दीवानी निर्णय के विरुद्ध अवर न्यायाधीश और दांडिक निर्णय के विरुद्ध जिला एवं सत्र न्यायाधीश के यहाँ वैधानिक अवधि में अपील।

13. बिहार राज्य निर्वाचन आयोग

बिंदुसत्यापित स्थिति
स्वरूपस्थानीय निकाय चुनावों की संवैधानिक संस्था; भारत निर्वाचन आयोग की शाखा नहीं।
संवैधानिक आधारपंचायतों के लिए अनुच्छेद 243K और नगरपालिकाओं के लिए अनुच्छेद 243ZA।
स्थापना73वें/74वें संशोधन के बाद की व्यवस्था के अंतर्गत बिहार अधिसूचना द्वारा 30 मार्च 1994।
संरचनाआधिकारिक सामान्य प्रश्न पृष्ठ इसे राज्य निर्वाचन आयुक्त वाला एक-सदस्यीय निकाय बताता है।
नियुक्तिराज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल करता है।
सेवा-नियम वाला कार्यकालआधिकारिक सामान्य प्रश्न पृष्ठ के अनुसार पदग्रहण से पाँच वर्ष, पर पहले 66 वर्ष की आयु होने पर पद रिक्त।
निर्वाचन-क्षेत्राधिकारपंचायत, ग्राम कचहरी और नगरीय स्थानीय निकाय; अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण में मतदाता सूची बनाना और चुनाव कराना शामिल।
जिला तंत्रधारा 125 के तहत आयोग जिलाधिकारी को जिला निर्वाचन पदाधिकारी (पंचायत) के रूप में नामित करता है; अधिकृत जिला तंत्र निर्वाची और मतदान कर्मियों की नियुक्ति करता है।

14. मतदाता सूची और परिसीमन

प्रक्रियाआधिकारिक आयोग द्वारा बताई गई बिहार की पद्धति
पंचायत मतदाता सूचीसंबंधित क्षेत्र में लागू विधानसभा मतदाता सूची को बाँटकर वार्डवार/समिति निर्वाचन-क्षेत्रवार/परिषद निर्वाचन-क्षेत्रवार तैयार।
ग्राम पंचायत परिसीमनआयोग के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण में जिलाधिकारी वार्ड निर्धारित करता है; प्रत्येक में लगभग 500 जनसंख्या।
पंचायत समिति परिसीमनलगभग 5,000 जनसंख्या; ग्राम पंचायत का प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्र विभाजित नहीं किया जाता।
जिला परिषद परिसीमनलगभग 50,000 जनसंख्या; पंचायत समिति निर्वाचन-क्षेत्र को विभाजित नहीं किया जाता और क्षेत्र प्रखंड से बाहर नहीं जाना चाहिए।
जनसंख्या का आधारप्रकाशित दशकीय जनगणना के आँकड़े।
निर्वाचन प्राधिकारप्रशासनिक अधिकारी सौंपे गए कार्य करते हैं, पर संवैधानिक अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण आयोग का रहता है।

15. बिहार में नगरीय निकायों का वर्गीकरण

बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 के अधीन क्षेत्रअधिनियम/आयोग विवरण में जनसंख्या-शर्तनगरपालिका का रूप
संक्रमणशील या छोटा नगरीय क्षेत्र12,000 या अधिक और 40,000 से अधिक नहींनगर पंचायत
मध्यम नगरीय क्षेत्र40,000 या अधिक किंतु 2,00,000 से कमनगर परिषद; अधिनियम मध्यम क्षेत्र को जनसंख्या के आधार पर A, B और C वर्गों में भी बाँटता है
वृहत्तर नगरीय क्षेत्रवर्गीकरण धारा में 2,00,000 या अधिक/2,00,000 से ऊपरनगर निगम

16. बिहार की नगरपालिका संस्थाएँ और प्रशासन

निकायराजनीतिक अध्यक्षीय पदमुख्य नगरपालिका पदाधिकारी
नगर निगममहापौर; उप-महापौर समकक्ष उप-पदनगर आयुक्त
नगर परिषदनगरपालिका अध्यक्ष और उपाध्यक्षनगर कार्यपालक पदाधिकारी
नगर पंचायतनगरपालिका अध्यक्ष और उपाध्यक्षनगर कार्यपालक पदाधिकारी

17. बिहार नगरपालिका निर्वाचन और आरक्षण

विशेषतावर्तमान सत्यापित नियम
वार्ड पार्षदवार्डों से प्रत्यक्ष निर्वाचित।
मुख्य/उप-मुख्य पार्षद2022 के संशोधन के बाद नगरपालिका मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष चुनाव; 2022 से पहले पार्षद इन्हें अप्रत्यक्ष रूप से चुनते थे।
अनुसूचित जाति/जनजाति सीटेंलगभग जनसंख्या-अनुपात में और चक्रानुक्रम से।
पिछड़ा वर्गअनुसूचित जाति/जनजाति आरक्षण के बाद कुल पदों का यथासंभव किंतु 20% से अधिक नहीं, और तीनों वर्गों की कुल 50% सीमा के भीतर।
महिलाएँआरक्षित और अनारक्षित वर्गों में वैधानिक आवंटन यथासंभव किंतु 50% से अधिक नहीं; वास्तविक संख्या गणना और आरक्षण-सूची पर निर्भर।
आरक्षण प्राधिकार/प्रक्रियाआयोग के निर्देशन, नियंत्रण और पर्यवेक्षण में जिलाधिकारी वार्ड-सीटों की गणना/आवंटन करता है; मुख्य पदों का चक्रानुक्रम वैधानिक/आयोगीय प्रक्रिया से होता है।
बदलने वाले आँकड़ेनिकायों की संख्या, वार्ड संख्या और किसी पद का आरक्षण वर्तमान आयोग अधिसूचना से लें, पुरानी चुनाव रिपोर्ट से याद न करें।

18. बिहार में ग्रामीण–नगरीय तुलना

आधारग्रामीण स्थानीय निकायनगरीय स्थानीय निकाय
संविधानभाग IX; अनुच्छेद 243–243Oभाग IXA; अनुच्छेद 243P–243ZG
मुख्य राज्य कानूनसंशोधित बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006संशोधित बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007
स्तर/प्रकारग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषदनगर पंचायत, नगर परिषद, नगर निगम
जनसभाग्राम सभानगर भर की ठीक वैसी संवैधानिक सभा नहीं; वार्ड संबंधी व्यवस्थाएँ पड़ोस की भागीदारी में सहायक
अलग न्याय संस्थाराज्य अधिनियम के अधीन ग्राम कचहरीउद्धृत नगरपालिका अधिनियम में ग्राम कचहरी जैसी संस्था नहीं
निर्वाचन प्राधिकारअनुच्छेद 243K के अधीन राज्य निर्वाचन आयोगअनुच्छेद 243ZA के अधीन वही आयोग
कार्य-सूचीग्यारहवीं अनुसूची: 29 विषय, वास्तविक हस्तांतरण के अधीनबारहवीं अनुसूची: 18 विषय, वास्तविक हस्तांतरण के अधीन

19. वित्त, प्रशासन और जवाबदेही

केवल चुनाव से विकेंद्रीकरण पूरा नहीं होता। बिहार के अधिनियम पंचायत और नगरपालिका निधि, बजट, लेखा, लेखा-परीक्षा, कर्मचारी और प्रशासनिक पदाधिकारियों की व्यवस्था करते हैं। ग्राम सभा स्पष्टीकरण माँग सकती और सतर्कता समितियाँ बना सकती है। पंचायत खातों की निर्धारित प्राधिकारी से लेखा-परीक्षा होती है; नगरपालिकाएँ नगरपालिका निधि रखती हैं और राज्य वित्त आयोग तथा वैधानिक वित्त-प्रबंधन व्यवस्था के भीतर काम करती हैं।

विश्लेषण के लिए यह शृंखला याद रखें: निर्वाचित जनादेश → हस्तांतरित विषय → बजट/राजस्व → प्रशिक्षित कर्मचारी → पारदर्शी क्रियान्वयन → ग्राम सभा/वार्ड निगरानी → लेखा-परीक्षा और सुधार। किसी भी कड़ी की कमजोरी “अधिकार–क्षमता अंतर” पैदा करती है।

22. आधिकारिक पिछले प्रश्नों की स्थिति

नीचे किसी प्रश्न को BPSC का आधिकारिक पिछला प्रश्न नहीं कहा गया है, क्योंकि उसका पूरा कथन और विकल्प आयोग की आधिकारिक प्रश्न-पुस्तिका से सत्यापित नहीं किया गया। ये संवैधानिक, बिहार के वैधानिक और आयोग के आधिकारिक स्रोतों पर आधारित मौलिक BPSC-शैली अभ्यास प्रश्न हैं।

24. BPSC-शैली अभ्यास: ठीक 20 बहुविकल्पीय प्रश्न