चार स्तरों पर तैयारी करें: (1) संवैधानिक आधार, (2) बिहार के अधिनियम और नियम, (3) निर्वाचन-पद्धति और आरक्षण तथा (4) धरातल पर काम करने वाली संस्थाएँ। ग्राम सभा–ग्राम पंचायत–ग्राम कचहरी; मुखिया–सरपंच; प्रत्यक्ष–अप्रत्यक्ष पद; पंचायत समिति–जिला परिषद; नगर पंचायत–नगर परिषद–नगर निगम; और भारत निर्वाचन आयोग–राज्य निर्वाचन आयोग के अंतर अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।
स्थानीय निकायों की सही संख्या, रिक्त पद और चुनावी आरक्षण-सूची अधिसूचनाओं से बदल सकती है। इसलिए इस अध्याय में टिकाऊ वैधानिक नियम दिए गए हैं और चुनाव-विशेष आँकड़ों को वर्तमान आधिकारिक स्रोत से जाँचने योग्य बताया गया है।
2. वैधानिक आधार और समयरेखा
3. बिहार की ग्रामीण संस्थागत रूपरेखा
स्तर या संस्था
क्षेत्र
प्रमुख निर्वाचित पद
मुख्य भूमिका
ग्राम सभा
गाँव/ग्राम पंचायत क्षेत्र के पंजीकृत मतदाता
बैठक की अध्यक्षता मुखिया; अनुपस्थिति में उप-मुखिया
भागीदारी, खातों और योजनाओं पर चर्चा, लाभार्थी चयन तथा निगरानी
ग्राम पंचायत
सामान्यतः अधिसूचित पंचायत क्षेत्र बनाने वाला गाँव या पास-पास के गाँव
मुखिया
ग्राम स्वशासन और विकास
ग्राम कचहरी
प्रत्येक ग्राम पंचायत क्षेत्र
सरपंच
राज्य अधिनियम के अधीन सीमित स्थानीय सुलह और न्यायिक कार्य
पंचायत समिति
नगरपालिका और छावनी क्षेत्र को छोड़कर प्रखंड
प्रमुख
मध्यवर्ती स्तर पर योजना, समन्वय और विकास
जिला परिषद
नगरपालिका और छावनी क्षेत्र को छोड़कर जिला
अध्यक्ष
जिला-स्तरीय ग्रामीण योजना, समन्वय और विकास
4. वर्ष 2006 के अधिनियम के अंतर्गत ग्राम सभा
नियम
बिहार का प्रावधान
बैठक की आवृत्ति
दो बैठकों के बीच तीन माह से अधिक अंतर नहीं हो सकता।
कौन बुलाता है
मुखिया उत्तरदायी है; मुखिया के विफल रहने की सूचना मिलने पर पंचायत समिति का कार्यपालक पदाधिकारी बैठक बुला सकता है।
गणपूर्ति
ग्राम सभा के कुल सदस्यों का एक-बीसवाँ; अधिनियम में वर्णित स्थगित बैठक के लिए एक-चालीसवाँ।
अध्यक्षता
मुखिया; मुखिया की अनुपस्थिति में उप-मुखिया।
विकास संबंधी भूमिका
योजनाओं में सहायता, लाभार्थियों की पहचान, स्वैच्छिक श्रम/अंशदान को प्रोत्साहन तथा जनशिक्षा, कल्याण, एकता और सद्भाव को बढ़ावा।
जवाबदेही की भूमिका
मुखिया, उप-मुखिया और ग्राम पंचायत सदस्यों से गतिविधियों, योजनाओं, आय और व्यय पर स्पष्टीकरण माँग सकती है।
सतर्कता समिति
ग्राम सभा कार्यों की निगरानी और उसे प्रतिवेदन देने के लिए ऐसे व्यक्तियों की एक या अधिक समितियाँ बना सकती है जो ग्राम पंचायत के सदस्य न हों।
5. ग्राम पंचायत: क्षेत्र, वार्ड और पद
विशेषता
वैधानिक नियम
पंचायत क्षेत्र की सामान्य जनसंख्या
जिलाधिकारी सरकारी आदेश और वैधानिक पुनरीक्षण के अधीन, यथासंभव 7,000 जनसंख्या वाले गाँव, पास-पास के गाँवों या उनके भाग को पंचायत क्षेत्र के रूप में अधिसूचित कर सकता है।
निगमित स्वरूप
ग्राम पंचायत शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुहर वाला निगमित निकाय है; वह संपत्ति रख सकती है, संविदा कर सकती है और उसके नाम से वाद हो सकता है।
संरचना
प्रत्यक्ष निर्वाचित मुखिया तथा प्रत्येक प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्र से एक प्रत्यक्ष निर्वाचित सदस्य।
वार्ड का मानदंड
प्रत्येक ग्राम पंचायत सदस्य यथासंभव 500 जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करता है।
मुखिया
उस ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष चुनाव।
उप-मुखिया
पहली बैठक में निर्वाचित वार्ड सदस्यों में से चुनाव; इस चुनाव में मुखिया भी मत देता है।
सामान्य कार्यकाल
पहली बैठक के लिए नियत तिथि से पाँच वर्ष, अधिनियम की विघटन संबंधी व्यवस्था के अधीन।
6. किसका चुनाव प्रत्यक्ष और किसका अप्रत्यक्ष?
संस्था
मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष चुनाव
निर्वाचित सदस्यों में से अप्रत्यक्ष चुनाव
ग्राम पंचायत
मुखिया और वार्ड सदस्य
उप-मुखिया
ग्राम कचहरी
सरपंच और पंच
उप-सरपंच
पंचायत समिति
प्रादेशिक सदस्य
प्रत्यक्ष निर्वाचित समिति सदस्यों द्वारा प्रमुख और उप-प्रमुख
जिला परिषद
प्रादेशिक सदस्य
प्रत्यक्ष निर्वाचित परिषद सदस्यों द्वारा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष
2022 के संशोधन के बाद बिहार की नगरपालिका
वार्ड पार्षद, मुख्य पार्षद और उप-मुख्य पार्षद
अंतिम दो पदों की पुरानी अप्रत्यक्ष पद्धति के स्थान पर अब मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष चुनाव
7. ग्रामीण निर्वाचन-क्षेत्रों के जनसंख्या मानदंड
प्रत्यक्ष निर्वाचित निर्वाचन-क्षेत्र
2006 के अधिनियम/आधिकारिक आयोग विवरण में जनसंख्या मानदंड
ग्राम पंचायत वार्ड सदस्य
यथासंभव 500
ग्राम कचहरी पंच
यथासंभव 500; प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्र ग्राम पंचायत सदस्य के क्षेत्र के अनुरूप
पंचायत समिति सदस्य
यथासंभव 5,000
जिला परिषद सदस्य
यथासाध्य 50,000; निर्वाचन-क्षेत्र प्रखंड की सीमा से बाहर नहीं जाना चाहिए
8. बिहार पंचायतों में आरक्षण की रूपरेखा
घटक
2006 के आधिकारिक अधिनियम-पाठ का नियम
अनुसूचित जाति/जनजाति
संबंधित क्षेत्र में उनकी जनसंख्या के लगभग उसी अनुपात में सीटों का आरक्षण और चक्रानुक्रम से आवंटन।
पिछड़ा वर्ग
अनुसूचित जाति/जनजाति आरक्षण के बाद, कुल सीटों का यथासंभव किंतु 20% से अधिक नहीं; साथ ही अनुसूचित जाति/जनजाति/पिछड़ा वर्ग का कुल आरक्षण 50% की सीमा के भीतर।
आरक्षित वर्गों में महिलाएँ
वर्ग-आरक्षित सीटों का यथासंभव किंतु 50% से अधिक नहीं।
अनारक्षित वर्ग में महिलाएँ
अनुसूचित जाति/जनजाति/पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित न होने वाली सीटों का यथासंभव किंतु 50% से अधिक नहीं।
चक्रानुक्रम
राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशन, नियंत्रण और पर्यवेक्षण में निर्वाचन-क्षेत्रों/पदों को बारी-बारी आरक्षण।
विस्तार
अधिनियम में दिए अनुसार यह व्यवस्था ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद और ग्राम कचहरी की सीटों तथा निर्दिष्ट अध्यक्षीय पदों तक लागू होती है।
9. पंचायत समिति: प्रखंड स्तर
विशेषता
बिहार का नियम
क्षेत्र
नगरपालिका या छावनी बोर्ड के क्षेत्र को छोड़कर प्रत्येक प्रखंड के लिए एक पंचायत समिति।
सदस्य
प्रत्यक्ष निर्वाचित प्रादेशिक सदस्य; संबंधित लोकसभा/विधानसभा सदस्य; पंजीकृत राज्यसभा/विधान परिषद सदस्य; और समिति क्षेत्र के सभी मुखिया।
सामान्य मतदान
समिति की बैठकों में प्रत्येक सदस्य मत दे सकता है।
प्रमुख और उप-प्रमुख का चुनाव/हटाना
केवल प्रत्यक्ष निर्वाचित प्रादेशिक सदस्य मत देते हैं।
प्रमुख और उप-प्रमुख
आयोग के पर्यवेक्षण में प्रत्यक्ष निर्वाचित समिति सदस्यों द्वारा और उन्हीं में से चुने जाते हैं।
बैठक
अधिनियम में कम-से-कम प्रत्येक दो माह में एक सामान्य बैठक अपेक्षित है।
कार्यपालक पदाधिकारी
2006 के मूल पाठ में सरकार द्वारा नियुक्त, उप-समाहर्ता पद से नीचे न होने वाला अधिकारी।
10. जिला परिषद: जिला ग्रामीण स्तर
विशेषता
बिहार का नियम
क्षेत्र
नगरपालिका और छावनी क्षेत्र को छोड़कर प्रत्येक जिले के लिए एक।
सदस्य
प्रत्यक्ष निर्वाचित प्रादेशिक सदस्य; सभी प्रमुख; संबंधित लोकसभा/विधानसभा सदस्य; और पंजीकृत राज्यसभा/विधान परिषद सदस्य।
अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव/हटाना
केवल प्रत्यक्ष निर्वाचित प्रादेशिक सदस्य मत देते हैं।
अध्यक्ष और उपाध्यक्ष
प्रत्यक्ष निर्वाचित परिषद सदस्यों द्वारा और उन्हीं में से चुने जाते हैं।
कार्यकाल
पहली बैठक के लिए नियत तिथि से पाँच वर्ष, विघटन के नियमों के अधीन।
प्रशासन
मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी नीतियों/निर्देशों को लागू करता और क्रियान्वयन की निगरानी करता है; 2021 के संशोधन ने अधिकारी संबंधी विवरण बदला, इसलिए वर्तमान विवरण के लिए संशोधित पाठ पढ़ना चाहिए।
योजना
अधिनियम अपनी योजना-व्यवस्था द्वारा जिला आर्थिक विकास, सामाजिक न्याय और वार्षिक योजना का कार्य देता है।
11. ग्राम कचहरी: बिहार की विशिष्ट वैधानिक संस्था
बिंदु
नियम
कानूनी स्रोत
बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 का अध्याय VI; यह संविधान के भाग IX द्वारा अनिवार्य अलग निकाय नहीं है।
गठन
प्रत्येक ग्राम पंचायत क्षेत्र में।
संरचना
एक प्रत्यक्ष निर्वाचित सरपंच और प्रत्यक्ष निर्वाचित पंच; प्रत्येक पंच का क्षेत्र लगभग 500 जनसंख्या के अनुरूप।
उप-सरपंच
पहली बैठक में निर्वाचित पंचों में से चुनाव; सरपंच भी मत देता है।
सहायता
सचिव और न्याय मित्र; अधिनियम के अनुसार न्याय मित्र के पास मान्यताप्राप्त संस्था/विश्वविद्यालय से कम-से-कम तीन वर्षीय विधि उपाधि होनी चाहिए।
कार्यकाल
पहली बैठक से पाँच वर्ष; समय पर चुनाव और शेष अवधि संबंधी अधिनियम के व्यापक सिद्धांत लागू।
उद्देश्य
राज्य कानून द्वारा सौंपे गए सीमित दीवानी और दांडिक मामलों का सुलभ ग्राम-स्तरीय समझौता और निर्णय।
12. ग्राम कचहरी का न्यायपीठ कैसे काम करता है?
चरण
वैधानिक व्यवस्था
न्यायपीठ का गठन
सामान्यतः सरपंच, दोनों पक्षों द्वारा नामित एक-एक पंच और सरपंच द्वारा चुने गए दो अन्य पंच; किसी के अनुपलब्ध या हितबद्ध होने पर अधिनियम के अनुसार प्रतिस्थापन।
गणपूर्ति
धारा 101 के अनुसार कम-से-कम तीन, जिनमें सरपंच और पक्षों द्वारा नामित दोनों पंच शामिल हों।
पहला प्रयास
न्यायपीठ बिना विलंब निष्पक्ष और सौहार्दपूर्ण समझौता कराने का प्रयास करे।
समझौता न होने पर
जाँच करता, आवश्यक साक्ष्य लेता और लिखित निर्णय देता है; बहुमत का निर्णय मान्य होता है तथा असहमति लिखी जा सकती है।
आधिकारिक रूप से प्रकाशित मूल पाठ में दांडिक शक्ति
धारा 107 में ₹1,000 तक जुर्माना, पर कारावास की सजा नहीं।
आधिकारिक मूल पाठ में दीवानी क्षेत्र
धारा 110 में ₹10,000 तक के निर्दिष्ट धन/चल संपत्ति/किराया/पशु-अतिचार दावे और कुछ बँटवारा वाद; अपवर्जन लागू और जटिल स्वत्व-प्रश्न पर अंतरण संभव।
अपील
न्यायपीठ के निर्णय के विरुद्ध पहले 30 दिन में पूर्ण पीठ; पूर्ण पीठ के दीवानी निर्णय के विरुद्ध अवर न्यायाधीश और दांडिक निर्णय के विरुद्ध जिला एवं सत्र न्यायाधीश के यहाँ वैधानिक अवधि में अपील।
13. बिहार राज्य निर्वाचन आयोग
बिंदु
सत्यापित स्थिति
स्वरूप
स्थानीय निकाय चुनावों की संवैधानिक संस्था; भारत निर्वाचन आयोग की शाखा नहीं।
संवैधानिक आधार
पंचायतों के लिए अनुच्छेद 243K और नगरपालिकाओं के लिए अनुच्छेद 243ZA।
स्थापना
73वें/74वें संशोधन के बाद की व्यवस्था के अंतर्गत बिहार अधिसूचना द्वारा 30 मार्च 1994।
संरचना
आधिकारिक सामान्य प्रश्न पृष्ठ इसे राज्य निर्वाचन आयुक्त वाला एक-सदस्यीय निकाय बताता है।
नियुक्ति
राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल करता है।
सेवा-नियम वाला कार्यकाल
आधिकारिक सामान्य प्रश्न पृष्ठ के अनुसार पदग्रहण से पाँच वर्ष, पर पहले 66 वर्ष की आयु होने पर पद रिक्त।
निर्वाचन-क्षेत्राधिकार
पंचायत, ग्राम कचहरी और नगरीय स्थानीय निकाय; अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण में मतदाता सूची बनाना और चुनाव कराना शामिल।
जिला तंत्र
धारा 125 के तहत आयोग जिलाधिकारी को जिला निर्वाचन पदाधिकारी (पंचायत) के रूप में नामित करता है; अधिकृत जिला तंत्र निर्वाची और मतदान कर्मियों की नियुक्ति करता है।
14. मतदाता सूची और परिसीमन
प्रक्रिया
आधिकारिक आयोग द्वारा बताई गई बिहार की पद्धति
पंचायत मतदाता सूची
संबंधित क्षेत्र में लागू विधानसभा मतदाता सूची को बाँटकर वार्डवार/समिति निर्वाचन-क्षेत्रवार/परिषद निर्वाचन-क्षेत्रवार तैयार।
ग्राम पंचायत परिसीमन
आयोग के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण में जिलाधिकारी वार्ड निर्धारित करता है; प्रत्येक में लगभग 500 जनसंख्या।
पंचायत समिति परिसीमन
लगभग 5,000 जनसंख्या; ग्राम पंचायत का प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्र विभाजित नहीं किया जाता।
जिला परिषद परिसीमन
लगभग 50,000 जनसंख्या; पंचायत समिति निर्वाचन-क्षेत्र को विभाजित नहीं किया जाता और क्षेत्र प्रखंड से बाहर नहीं जाना चाहिए।
जनसंख्या का आधार
प्रकाशित दशकीय जनगणना के आँकड़े।
निर्वाचन प्राधिकार
प्रशासनिक अधिकारी सौंपे गए कार्य करते हैं, पर संवैधानिक अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण आयोग का रहता है।
15. बिहार में नगरीय निकायों का वर्गीकरण
बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 के अधीन क्षेत्र
अधिनियम/आयोग विवरण में जनसंख्या-शर्त
नगरपालिका का रूप
संक्रमणशील या छोटा नगरीय क्षेत्र
12,000 या अधिक और 40,000 से अधिक नहीं
नगर पंचायत
मध्यम नगरीय क्षेत्र
40,000 या अधिक किंतु 2,00,000 से कम
नगर परिषद; अधिनियम मध्यम क्षेत्र को जनसंख्या के आधार पर A, B और C वर्गों में भी बाँटता है
वृहत्तर नगरीय क्षेत्र
वर्गीकरण धारा में 2,00,000 या अधिक/2,00,000 से ऊपर
नगर निगम
16. बिहार की नगरपालिका संस्थाएँ और प्रशासन
निकाय
राजनीतिक अध्यक्षीय पद
मुख्य नगरपालिका पदाधिकारी
नगर निगम
महापौर; उप-महापौर समकक्ष उप-पद
नगर आयुक्त
नगर परिषद
नगरपालिका अध्यक्ष और उपाध्यक्ष
नगर कार्यपालक पदाधिकारी
नगर पंचायत
नगरपालिका अध्यक्ष और उपाध्यक्ष
नगर कार्यपालक पदाधिकारी
17. बिहार नगरपालिका निर्वाचन और आरक्षण
विशेषता
वर्तमान सत्यापित नियम
वार्ड पार्षद
वार्डों से प्रत्यक्ष निर्वाचित।
मुख्य/उप-मुख्य पार्षद
2022 के संशोधन के बाद नगरपालिका मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष चुनाव; 2022 से पहले पार्षद इन्हें अप्रत्यक्ष रूप से चुनते थे।
अनुसूचित जाति/जनजाति सीटें
लगभग जनसंख्या-अनुपात में और चक्रानुक्रम से।
पिछड़ा वर्ग
अनुसूचित जाति/जनजाति आरक्षण के बाद कुल पदों का यथासंभव किंतु 20% से अधिक नहीं, और तीनों वर्गों की कुल 50% सीमा के भीतर।
महिलाएँ
आरक्षित और अनारक्षित वर्गों में वैधानिक आवंटन यथासंभव किंतु 50% से अधिक नहीं; वास्तविक संख्या गणना और आरक्षण-सूची पर निर्भर।
आरक्षण प्राधिकार/प्रक्रिया
आयोग के निर्देशन, नियंत्रण और पर्यवेक्षण में जिलाधिकारी वार्ड-सीटों की गणना/आवंटन करता है; मुख्य पदों का चक्रानुक्रम वैधानिक/आयोगीय प्रक्रिया से होता है।
बदलने वाले आँकड़े
निकायों की संख्या, वार्ड संख्या और किसी पद का आरक्षण वर्तमान आयोग अधिसूचना से लें, पुरानी चुनाव रिपोर्ट से याद न करें।
18. बिहार में ग्रामीण–नगरीय तुलना
आधार
ग्रामीण स्थानीय निकाय
नगरीय स्थानीय निकाय
संविधान
भाग IX; अनुच्छेद 243–243O
भाग IXA; अनुच्छेद 243P–243ZG
मुख्य राज्य कानून
संशोधित बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006
संशोधित बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007
स्तर/प्रकार
ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद
नगर पंचायत, नगर परिषद, नगर निगम
जनसभा
ग्राम सभा
नगर भर की ठीक वैसी संवैधानिक सभा नहीं; वार्ड संबंधी व्यवस्थाएँ पड़ोस की भागीदारी में सहायक
अलग न्याय संस्था
राज्य अधिनियम के अधीन ग्राम कचहरी
उद्धृत नगरपालिका अधिनियम में ग्राम कचहरी जैसी संस्था नहीं
निर्वाचन प्राधिकार
अनुच्छेद 243K के अधीन राज्य निर्वाचन आयोग
अनुच्छेद 243ZA के अधीन वही आयोग
कार्य-सूची
ग्यारहवीं अनुसूची: 29 विषय, वास्तविक हस्तांतरण के अधीन
बारहवीं अनुसूची: 18 विषय, वास्तविक हस्तांतरण के अधीन
19. वित्त, प्रशासन और जवाबदेही
केवल चुनाव से विकेंद्रीकरण पूरा नहीं होता। बिहार के अधिनियम पंचायत और नगरपालिका निधि, बजट, लेखा, लेखा-परीक्षा, कर्मचारी और प्रशासनिक पदाधिकारियों की व्यवस्था करते हैं। ग्राम सभा स्पष्टीकरण माँग सकती और सतर्कता समितियाँ बना सकती है। पंचायत खातों की निर्धारित प्राधिकारी से लेखा-परीक्षा होती है; नगरपालिकाएँ नगरपालिका निधि रखती हैं और राज्य वित्त आयोग तथा वैधानिक वित्त-प्रबंधन व्यवस्था के भीतर काम करती हैं।
विश्लेषण के लिए यह शृंखला याद रखें: निर्वाचित जनादेश → हस्तांतरित विषय → बजट/राजस्व → प्रशिक्षित कर्मचारी → पारदर्शी क्रियान्वयन → ग्राम सभा/वार्ड निगरानी → लेखा-परीक्षा और सुधार। किसी भी कड़ी की कमजोरी “अधिकार–क्षमता अंतर” पैदा करती है।
22. आधिकारिक पिछले प्रश्नों की स्थिति
नीचे किसी प्रश्न को BPSC का आधिकारिक पिछला प्रश्न नहीं कहा गया है, क्योंकि उसका पूरा कथन और विकल्प आयोग की आधिकारिक प्रश्न-पुस्तिका से सत्यापित नहीं किया गया। ये संवैधानिक, बिहार के वैधानिक और आयोग के आधिकारिक स्रोतों पर आधारित मौलिक BPSC-शैली अभ्यास प्रश्न हैं।