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मिथिला चित्रकला, मंजूषा कला और बिहार की लोक दृश्य परंपराएँ

8 min read · Updated 15 Sep 2026

मिथिला चित्रकला, मंजूषा कला और बिहार की लोक दृश्य परंपराएँ

BPSC प्रारंभिक परीक्षा की मांग

कला रूप–क्षेत्र–माध्यम–रूपांकन का मिलान पढ़ें। सबसे महत्वपूर्ण अंतर है मिथिला/मधुबनी कला का मिथिला क्षेत्र से संबंध और मंजूषा कला का अंग/भागलपुर क्षेत्र से संबंध। जीवित परंपरा के लिए एक निश्चित उत्पत्ति-वर्ष या एक ही अपरिवर्तित शैली का दावा न करें।

परंपरा से आधुनिक माध्यम तक

मुख्य तुलना

विशेषतामिथिला / मधुबनी चित्रकलामंजूषा कला
क्षेत्रमिथिला क्षेत्र; विशेषकर मधुबनी और दरभंगा।अंग क्षेत्र, विशेषकर भागलपुर; बांका भी जुड़ा है।
विषयप्रकृति, पौराणिक कथाएँ, पर्व और दैनिक जीवन; अनुष्ठानिक चित्र भी।बिहुला-बिशहरी लोककथा, आस्था, भक्ति और धैर्य।
माध्यम/प्रक्रियापरंपरागत दीवार/फर्श; अब कागज, कपड़ा और कैनवास; उंगली, टहनी, ब्रश, निब-पेन और माचिस का उपयोग हो सकता है।कथात्मक स्क्रॉल या डिब्बा-जैसी संरचना; गहरी रेखाएँ और सजावटी किनारे।
रंग संकेतप्राकृतिक रंग और रंजक महत्वपूर्ण पारंपरिक संकेत।गुलाबी, हरा और पीला महत्वपूर्ण पारंपरिक रंग-संकेत।
परीक्षा भ्रमयह भागलपुर की कला नहीं है।यह मधुबनी/दरभंगा की कला नहीं है।

मंजूषा का दृश्य-संकेत

संकेतसही संबंध
बिहुला-बिशहरीमंजूषा कला की मुख्य लोककथा।
बिशहरी/मनसा देवीकथा में सर्प-देवी परंपरा का संदर्भ।
तीन रंगगुलाबी, हरा और पीला।
मानव आकृतिविशिष्ट X-आकार की आकृतियाँ महत्वपूर्ण संकेत हैं।
पर्वआधिकारिक सांस्कृतिक सामग्री में बिशहरी पूजा से संबंध।

बिहार की अन्य लोक दृश्य परंपराएँ

परंपरासुरक्षित परीक्षा टिप्पणी
टिकुली चित्रकलाहस्तनिर्मित कागज या कपड़े पर बिहार की दृश्य कला; प्रकृति, लोककथा और दैनिक जीवन के रंगीन रूपांकन।
सिक्की शिल्पघास से बनने वाला शिल्प; इसे चित्रकला शैली न कहें।
सुजनीकपड़ा/कढ़ाई शिल्प; इसे मंजूषा चित्रकला न कहें।
कागज की लुगदी शिल्पबिहार की प्रोत्साहित कला परंपराओं में सूचीबद्ध शिल्प।
बावन बूटी और ओबरा कालीनबिहारिका में सूचीबद्ध वस्त्र/बुनाई परंपराएँ; इन्हें मिथिला चित्रकला में न मिलाएँ।

20 BPSC-स्तरीय बहुविकल्पीय प्रश्न