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दिल्ली सल्तनत, मुगलों और अठारहवीं शताब्दी के संक्रमण में बिहार

8 min read · Updated 15 Sep 2026

दिल्ली सल्तनत, मुगलों और अठारहवीं शताब्दी के संक्रमण में बिहार

BPSC की मांग

बिहार को केंद्र में रखें: विजय, अफगान पुनरुत्थान, मुगल प्रांतीय व्यवस्था और बंगाल के प्रभाव की ओर संक्रमण। बहुत व्यापक दावों के बजाय प्रमाणित बिंदु उपयोग करें: बख्तियार खिलजी, तिरहुत/मिथिला, सासाराम, पटना, अकबर का बिहार सूबा और बक्सर।

कालक्रम

बिहार के मुख्य युग्म

व्यक्ति/घटनासुरक्षित संकेत
बख्तियार खिलजीबिहार में आरंभिक तुर्की विजय; क्षेत्र के प्रमुख बौद्ध महाविहारों पर हमलों से संबंध।
गयासुद्दीन तुगलकतिरहुत में अभियान; सरकारी जिला-इतिहास इसे कर्नाट सत्ता के अंत से जोड़ता है।
बाबर / घाघरा1529 का घाघरा युद्ध; बिहार में मुगल प्रभाव स्थापित।
शेरशाह सूरीसासाराम; अफगान शासक, 1540–1545; प्रशासनिक विरासत।
अकबरदाऊद खाँ की अफगान चुनौती को हराया; बिहार अलग सूबा और मुगल सूबेदार के अधीन।
अज़ीम-उश-शान1703 में बंगाल के साथ बिहार का सूबा मिला।

प्रशासनिक और राजनीतिक क्रम

चरणबिहार संबंध
दिल्ली सल्तनत / बंगाल के सूबेदारबिहार और तिरहुत पर प्रतिस्पर्धी प्रभाव।
लोदी–अफगान चरणनुहानी/लोहानी अफगान सरदार बिहार में शक्तिशाली हुए।
सूर चरणशेरशाह का सासाराम आधार और सुधार।
मुगल चरणदाऊद खाँ पर अकबर की विजय के बाद बिहार अलग सूबा।
अठारहवीं शताब्दी का आरंभबिहार फिर बंगाल के साथ शासित; क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ी।

20 अभ्यास प्रश्न