दिल्ली सल्तनत, मुगलों और अठारहवीं शताब्दी के संक्रमण में बिहार
BPSC की मांग
बिहार को केंद्र में रखें: विजय, अफगान पुनरुत्थान, मुगल प्रांतीय व्यवस्था और बंगाल के प्रभाव की ओर संक्रमण। बहुत व्यापक दावों के बजाय प्रमाणित बिंदु उपयोग करें: बख्तियार खिलजी, तिरहुत/मिथिला, सासाराम, पटना, अकबर का बिहार सूबा और बक्सर।
कालक्रम
बिहार के मुख्य युग्म
व्यक्ति/घटना
सुरक्षित संकेत
बख्तियार खिलजी
बिहार में आरंभिक तुर्की विजय; क्षेत्र के प्रमुख बौद्ध महाविहारों पर हमलों से संबंध।
गयासुद्दीन तुगलक
तिरहुत में अभियान; सरकारी जिला-इतिहास इसे कर्नाट सत्ता के अंत से जोड़ता है।
बाबर / घाघरा
1529 का घाघरा युद्ध; बिहार में मुगल प्रभाव स्थापित।
शेरशाह सूरी
सासाराम; अफगान शासक, 1540–1545; प्रशासनिक विरासत।
अकबर
दाऊद खाँ की अफगान चुनौती को हराया; बिहार अलग सूबा और मुगल सूबेदार के अधीन।
अज़ीम-उश-शान
1703 में बंगाल के साथ बिहार का सूबा मिला।
प्रशासनिक और राजनीतिक क्रम
चरण
बिहार संबंध
दिल्ली सल्तनत / बंगाल के सूबेदार
बिहार और तिरहुत पर प्रतिस्पर्धी प्रभाव।
लोदी–अफगान चरण
नुहानी/लोहानी अफगान सरदार बिहार में शक्तिशाली हुए।
सूर चरण
शेरशाह का सासाराम आधार और सुधार।
मुगल चरण
दाऊद खाँ पर अकबर की विजय के बाद बिहार अलग सूबा।
अठारहवीं शताब्दी का आरंभ
बिहार फिर बंगाल के साथ शासित; क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ी।