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नालंदा और विक्रमशिला: BPSC प्रारंभिक परीक्षा नोट्स

8 min read · Updated 13 Sep 2026

नालंदा और विक्रमशिला: BPSC प्रारंभिक परीक्षा नोट्स

BPSC प्रारंभिक परीक्षा की माँग

संस्थापक या संरक्षक, वंश, स्थान, वास्तुकला, बौद्ध परंपरा, यात्रियों और बिहार के मानचित्र पर ध्यान दें। सबसे उपयोगी युग्म हैं—नालंदा–नालंदा जिला, विक्रमशिला–अंतिचक (भागलपुर), विक्रमशिला–पाल शासक धर्मपाल, और विक्रमशिला–तंत्रयान/वज्रयान परंपरा।

सरल परिचय

नालंदा और विक्रमशिला वर्तमान बिहार में बौद्ध शिक्षा के प्रमुख केंद्र थे। नालंदा की पुरातात्त्विक परतें लगभग तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व से मिलती हैं और पाँचवीं से तेरहवीं शताब्दी ईस्वी तक यह एक प्रमुख मठीय-शैक्षणिक संस्था के रूप में सक्रिय रहा। विक्रमशिला का विकास आठवीं शताब्दी ईस्वी के उत्तरार्ध में पाल वंश के अधीन हुआ। दोनों स्थल बौद्ध धर्म, शिक्षा, कला, वास्तुकला और बिहार की विरासत के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।

नालंदा और विक्रमशिला: एक नज़र में

बिंदुनालंदाविक्रमशिला
स्थाननालंदा जिला, बिहारअंतिचक, भागलपुर जिला, बिहार
प्रमुख ऐतिहासिक चरणपाँचवीं–तेरहवीं शताब्दी ईस्वी: प्रमुख मठीय-शैक्षणिक केंद्रपाल काल; आठवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में धर्मपाल द्वारा स्थापना
मुख्य संबंधदीर्घ मठीय और शैक्षणिक परंपरातंत्रयान/वज्रयान बौद्ध शिक्षा
वास्तुकलाविहार, मंदिर, स्तूप, श्राइन; उत्तर-दक्षिण अक्षीय विन्यास208 कक्षों वाला वर्गाकार विहार और क्रूसाकार स्तूप

कालक्रम

साक्ष्य और उनका सही उपयोग

स्रोतसुरक्षित परीक्षा उपयोगजाल
UNESCO का नालंदा विवरणपुरातात्त्विक अवशेष; लंबी मठीय-शैक्षणिक परंपरा; संरक्षित स्थल में 11 विहार और 14 मंदिर।संरक्षित पुरातात्त्विक स्थल को आधुनिक परिसर न समझें।
ASI पटना सर्कल, विक्रमशिलाधर्मपाल; तंत्रयान; वर्गाकार विहार, 208 कक्ष, क्रूसाकार स्तूप।विक्रमशिला को नालंदा जिले में न रखें।
बिहार पर्यटनभागलपुर के कहलगाँव उपखंड में अंतिचक; पालकालीन शिक्षा केंद्र।इसे बोधगया से न मिलाएँ।
चीनी यात्रियों के विवरणह्वेनसांग और इत्सिंग नालंदा के अध्ययन के महत्त्वपूर्ण स्रोत हैं।वे नालंदा के संस्थापक नहीं थे।

नालंदा: मुख्य तथ्य

UNESCO नालंदा को बिहार में स्थित ऐसे पुरातात्त्विक स्थल के रूप में दर्ज करता है जहाँ तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व से तेरहवीं शताब्दी ईस्वी तक की मठीय और शैक्षणिक संस्था के अवशेष हैं। इसका प्रमुख संस्थागत चरण पाँचवीं से तेरहवीं शताब्दी ईस्वी तक रहा। संरक्षित क्षेत्र में उत्तर-दक्षिण अक्षीय योजना, विहार, मंदिर, स्तूप, श्राइन तथा स्टुको, पत्थर और धातु की कलाकृतियाँ हैं। कुमारगुप्त प्रथम को नालंदा की आरंभिक स्थापना से परंपरा द्वारा जोड़ा जाता है; “परंपरा” शब्द जरूरी है क्योंकि संस्था का विकास कई चरणों और संरक्षकों से हुआ।

विक्रमशिला: मुख्य तथ्य

विक्रमशिला की स्थापना आठवीं शताब्दी ईस्वी के उत्तरार्ध में पाल शासक धर्मपाल ने वर्तमान भागलपुर जिले के अंतिचक में की। ASI इसे प्राचीन शिक्षा केंद्र और तंत्रयान बौद्ध परंपरा से जुड़ा स्थल बताता है। उत्खनित योजना में 208 कक्षों वाला वर्गाकार विहार और क्रूसाकार स्तूप शामिल हैं। यह ASI पटना सर्कल के अंतर्गत केंद्रीय संरक्षित स्मारक है।

प्रारंभिक परीक्षा के जाल

  • विक्रमशिला भागलपुर जिले में है, नालंदा जिले में नहीं।
  • धर्मपाल पाल वंश से थे, गुप्त वंश से नहीं।
  • नालंदा का प्रमुख संस्थागत जीवन किसी एक शासक तक सीमित नहीं था।
  • ह्वेनसांग और इत्सिंग नालंदा के यात्री/स्रोत हैं, संस्थापक नहीं।
  • विक्रमशिला विशेष रूप से तंत्रयान/वज्रयान से जुड़ा है; नालंदा की बौद्ध विद्या परंपरा व्यापक और दीर्घ थी।
  • “208 कक्ष” और “क्रूसाकार स्तूप” विक्रमशिला की पहचान हैं।

20 BPSC प्रारंभिक परीक्षा MCQ