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असहयोग, सविनय अवज्ञा और भारत छोड़ो आंदोलनों में बिहार

8 min read · Updated 15 Sep 2026

असहयोग, सविनय अवज्ञा और भारत छोड़ो आंदोलनों में बिहार

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हर आंदोलन को अलग तिथि–नेता–स्थान–तरीके के रूप में पढ़ें। बिहार से जुड़े प्रश्नों में असहयोग के साथ बिहार विद्यापीठ और राजेंद्र प्रसाद; सविनय अवज्ञा में नमक कार्रवाई व राजेंद्र प्रसाद की गिरफ्तारी; तथा भारत छोड़ो में पटना सचिवालय के सात शहीद और जयप्रकाश नारायण आते हैं।

तीन आंदोलनों का कालक्रम

बिहार का तुलनात्मक पक्ष

आंदोलनराष्ट्रीय संकेतबिहार के मुख्य तथ्य
असहयोग1920–22; बहिष्कार और असहयोगभागलपुर प्रांतीय सम्मेलन, राजेंद्र प्रसाद; बिहार विद्यापीठ; नेशनल कॉलेज।
सविनय अवज्ञा1930; नमक सत्याग्रह6 अप्रैल से सारण; सारण और चंपारण शुरुआती जिले; 5 जुलाई 1930 को राजेंद्र प्रसाद की गिरफ्तारी; बाद में दीप नारायण सिंह।
भारत छोड़ो1942; अगस्त क्रांति; “करो या मरो”पटना सचिवालय के सात शहीद; शहीद स्मारक; हजारीबाग से निकलने के बाद जेपी की भूमिगत भूमिका।

व्यक्ति और स्थान

नाम/स्थानसही संबंध
राजेंद्र प्रसादबिहार के नमक सत्याग्रह का नेतृत्व; 1920 भागलपुर प्रांतीय सम्मेलन की अध्यक्षता।
बिहार विद्यापीठअसहयोग आंदोलन में स्थापित; नेशनल कॉलेज व बिहार विद्यापीठ की आधारशिला गांधी ने रखी।
सारण6 अप्रैल 1930 से नमक सत्याग्रह; कई नमक-निर्माण केंद्र बने।
चंपारणसारण के साथ नमक सत्याग्रह शुरू करने वाले बिहार के शुरुआती जिलों में।
दीप नारायण सिंह1930 में राजेंद्र प्रसाद की गिरफ्तारी के बाद नेतृत्व-कार्य संभाला।
पटना सचिवालयअगस्त 1942 के सात विद्यार्थी शहीदों से संबंधित।
जयप्रकाश नारायण1942 के प्रमुख भूमिगत नेता; सारण के सिताब दियारा में जन्म।

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