BPSC में सातवीं अनुसूची, अवशिष्ट शक्ति, राज्य सूची पर संसद की अपवादस्वरूप शक्ति, समवर्ती सूची के कानूनों में टकराव, प्रशासनिक निर्देश, अखिल भारतीय सेवाएँ, GST परिषद, अंतर्राज्यीय परिषद और क्षेत्रीय परिषदें महत्त्वपूर्ण हैं। प्रश्नों में प्रायः एक अनुच्छेद के स्थान पर दूसरा अनुच्छेद रख दिया जाता है या संवैधानिक संस्था को वैधानिक निकाय बता दिया जाता है।
यह क्रम अपनाएँ: विषय किस सूची में है → सामान्यतः कानून कौन बनाएगा → कोई अपवाद लागू है या नहीं → टकराव का नियम क्या है। फिर बिहार से जोड़ें: बिहार राज्य सूची की शक्तियों का प्रयोग करता है, साझा संस्थाओं में भाग लेता है, संवैधानिक वित्तीय अंतरण पाता है और पूर्वी क्षेत्रीय परिषद का सदस्य है।
2. भारत किस प्रकार का संघ है?
अनुच्छेद 1 कहता है—“भारत, अर्थात् इंडिया, राज्यों का संघ होगा।” संविधान ने अपने औपचारिक वर्णन में “संघीय” शब्द नहीं अपनाया है। फिर भी यहाँ सरकार के दो संवैधानिक स्तर, विधायी और वित्तीय शक्तियों का विभाजन, संविधान की सर्वोच्चता, स्वतंत्र न्यायपालिका और द्विसदनीय संसद है। ये संघीय विशेषताएँ हैं।
दूसरी ओर अवशिष्ट शक्ति संसद को मिली है; संसद निश्चित संवैधानिक परिस्थितियों में राज्य सूची पर कानून बना सकती है; अनुच्छेद 3–4 के अंतर्गत राज्यों के क्षेत्र या सीमाएँ बदल सकती है; और आपातकाल में संघ की शक्ति बढ़ती है। एकल नागरिकता, एकीकृत न्यायिक व्यवस्था और अखिल भारतीय सेवाएँ भी राष्ट्रीय एकता को बल देती हैं। इसलिए परीक्षा के लिए संतुलित निष्कर्ष है: भारत की संवैधानिक रचना संघीय है, किंतु उसमें महत्त्वपूर्ण एकात्मक अथवा केंद्रीकरणकारी विशेषताएँ भी हैं।
3. संघीय और केंद्रीकरणकारी विशेषताओं की तुलना
शक्ति-विभाजन वाली संघीय विशेषता
एकीकरण या केंद्रीकरण वाली विशेषता
संघ और राज्य—दोनों को अधिकार संविधान से मिलता है।
अनुच्छेद 1 भारत को राज्यों का संघ कहता है; किसी राज्य को अलग होने का संवैधानिक अधिकार नहीं है।
सातवीं अनुसूची विधायी विषय बाँटती है।
अनुच्छेद 248 और संघ सूची की प्रविष्टि 97 के अनुसार अवशिष्ट शक्ति संसद के पास है।
लिखित और सर्वोच्च संविधान सरकार के दोनों स्तरों को बाँधता है।
अनुच्छेद 249, 250, 252 और 253 के मार्ग से संसद राज्य विषयों पर कानून बना सकती है।
स्वतंत्र न्यायपालिका विधायी क्षमता और संघीय विवादों का निर्णय करती है।
आपात उपबंध संघ की विधायी, कार्यपालिका या वित्तीय शक्ति बढ़ा सकते हैं।
राज्यसभा संघ के स्तर पर राज्यों को प्रतिनिधित्व देती है।
हर राज्य को बराबर सीटें नहीं मिलतीं; प्रतिनिधित्व मुख्यतः जनसंख्या के अनुसार बदलता है।
राजस्व शक्तियाँ और अंतरण संविधान से व्यवस्थित हैं।
संघ के कराधार व्यापक हैं और संविधान निर्देश तथा अनुदान के साधन देता है।
राज्यों की निर्वाचित सरकारें और विधानमंडल हैं।
एकल नागरिकता, एकीकृत न्यायपालिका और अखिल भारतीय सेवाएँ प्रशासनों को जोड़ती हैं।
4. केंद्र-राज्य संबंधों का अनुच्छेद मानचित्र
क्षेत्र
मुख्य उपबंध
मूल प्रश्न
विधायी संबंध
अनुच्छेद 245–255; सातवीं अनुसूची
किस विधानमंडल को अधिकार है और टकराव होने पर क्या होगा?
प्रशासनिक संबंध
अनुच्छेद 256–263
कानून कैसे लागू होंगे, कार्य कैसे सौंपे जाएँगे और साझा विषयों में समन्वय कैसे होगा?
वित्तीय संबंध
अनुच्छेद 268–293; अनुच्छेद 280
कर कौन लगाता, वसूलता, बाँटता, अनुदान देता या ऋण लेता है?
GST संघवाद
अनुच्छेद 246A, 269A और 279A
साझा कर पर संघ और राज्यों की भूमिका क्या है?
अंतर्राज्यीय व्यापार
अनुच्छेद 301–307
आर्थिक एकता और अनुमत प्रतिबंधों में संतुलन कैसे है?
अखिल भारतीय सेवाएँ
अनुच्छेद 312
राष्ट्रीय हित में साझा सेवा कैसे बनाई जाती है?
संघीय विवाद-निर्णय
अनुच्छेद 131 और 262
कौन-सा विवाद उच्चतम न्यायालय जाएगा और जल विवाद के लिए विशेष मार्ग कब होगा?
5. सातवीं अनुसूची की तीन सूचियाँ
सूची
सामान्य विधायी अधिकार
उदाहरण
परीक्षा सावधानी
सूची I—संघ सूची
संसद को अनन्य शक्ति।
रक्षा, विदेश मामले, नागरिकता, रेल, मुद्रा, अंतर्राज्यीय व्यापार और निर्दिष्ट संघ कर।
अनुच्छेद 246 में क्षेत्र टकराने पर संघ सूची को प्राथमिकता मिलती है।
सूची II—राज्य सूची
संवैधानिक अपवादों के अधीन राज्य विधानमंडल को अनन्य शक्ति।
लोक व्यवस्था, पुलिस, जन-स्वास्थ्य, कृषि, स्थानीय शासन, भूमि और सूची में दिए राज्य कर।
राज्य सूची का अर्थ यह नहीं कि संसद कभी भी कानून नहीं बना सकती।
सूची III—समवर्ती सूची
संसद और राज्य विधानमंडल—दोनों कानून बना सकते हैं।
दंड विधि और प्रक्रिया, विवाह-विच्छेद, वन, शिक्षा और श्रम कल्याण।
टकराव अनुच्छेद 254 से सुलझता है; हर राज्य कानून अपने-आप अमान्य नहीं हो जाता।
6. GST ने विशेष साझा विधायी क्षेत्र बनाया
अनुच्छेद 246A संसद और राज्य विधानमंडलों—दोनों को GST कानून बनाने की शक्ति देता है। किंतु अंतर्राज्यीय व्यापार या वाणिज्य के दौरान होने वाली आपूर्ति पर GST के संबंध में संसद को अनन्य शक्ति है। अनुच्छेद 269A के अनुसार अंतर्राज्यीय आपूर्ति पर GST संघ लगाता और वसूलता है तथा उसका बँटवारा संघ और राज्यों के बीच होता है।
यह केवल तीन सूचियों में जोड़ी गई कोई सामान्य प्रविष्टि नहीं है, बल्कि साझा कर-विधान की विशेष संवैधानिक व्यवस्था है। अनुच्छेद 279A की GST परिषद दरों, छूटों, आदर्श कानून, सीमा और अन्य निर्धारित विषयों पर अनुशंसाओं के माध्यम से समन्वय करती है।
7. संसद राज्य सूची पर कब कानून बना सकती है?
अनुच्छेद
आरंभ करने वाली शर्त
अवधि या विस्तार
विशेष बात
249
राज्यसभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से राष्ट्रीय हित में आवश्यकता घोषित करे।
संकल्प की अवधि एक बार में अधिकतम एक वर्ष; हर बार अधिकतम एक वर्ष के लिए नवीकरण संभव। संकल्प समाप्त होने के छह माह बाद कानून प्रभावहीन, पर पूर्व कार्य सुरक्षित।
राज्यसभा संघीय सदन की भूमिका निभाती है; राष्ट्रीय आपातकाल आवश्यक नहीं।
250
राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा लागू हो।
आपातकाल समाप्त होने के छह माह बाद कानून प्रभावहीन, पर पूर्व कार्य सुरक्षित।
राज्य की विधायी शक्ति मिटती नहीं; अनुच्छेद 251 के अनुसार सक्रिय असंगत संघ कानून प्रधान होता है।
252
दो या अधिक राज्यों के विधानमंडल संसद से कानून बनाने का अनुरोध करने वाला संकल्प पारित करें।
आरंभ में अनुरोध करने वाले राज्यों पर; दूसरा राज्य बाद में विधायी संकल्प से अपना सकता है।
उन राज्यों के लिए ऐसा कानून उसी प्रकार केवल संसद संशोधित या निरस्त कर सकती है।
253
संधि, करार, अभिसमय या अंतरराष्ट्रीय निर्णय का कार्यान्वयन।
संसद पूरे भारत या किसी भाग के लिए कानून बना सकती है।
विषय राज्य सूची में हो तो भी राज्यों के पूर्व संकल्प की संवैधानिक आवश्यकता नहीं।
9. प्रशासनिक संबंध: अनुच्छेद 256–258A
अनुच्छेद
नियम
याद रखने का अंतर
256
राज्य की कार्यपालिका संसद के कानूनों और राज्य में लागू विद्यमान कानूनों का पालन सुनिश्चित करेगी; संघ आवश्यक निर्देश दे सकता है।
संघ कानून का पालन।
257
राज्य की कार्यपालिका संघ की कार्यपालिका में बाधा नहीं डालेगी; संघ राष्ट्रीय या सैन्य महत्त्व के संचार साधनों तथा रेल-सुरक्षा जैसे निर्दिष्ट मामलों में निर्देश दे सकता है।
संघीय कार्य में बाधा न होना।
258
राष्ट्रपति राज्य सरकार की सहमति से संघीय कार्य राज्य सरकार या उसके अधिकारियों को सशर्त या बिना शर्त सौंप सकता है।
संघ → राज्य; राष्ट्रपति और राज्य की सहमति।
258A
राज्यपाल भारत सरकार की सहमति से राज्य के कार्य संघ सरकार या उसके अधिकारियों को सौंप सकता है।
राज्य → संघ; राज्यपाल और संघ की सहमति।
10. अखिल भारतीय सेवाएँ: साझा प्रशासन
अनुच्छेद 312 के अंतर्गत राज्यसभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से घोषित कर सकती है कि राष्ट्रीय हित में संघ और राज्यों के लिए साझा एक या अधिक अखिल भारतीय सेवाएँ बनाना आवश्यक या समीचीन है। उसके बाद संसद सेवा के निर्माण और सेवा-शर्तों का कानून बना सकती है। भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय पुलिस सेवा को इसी अनुच्छेद के अधीन संसद द्वारा बनाई गई सेवाएँ माना गया है।
अखिल भारतीय सेवाएँ सहयोगी प्रशासन का उदाहरण हैं। अधिकारी संघ और राज्य—दोनों व्यवस्थाओं में सेवा देते हैं, जबकि भर्ती और सेवा-प्रबंध राष्ट्रीय संवर्ग व्यवस्था बनाए रखते हैं। अनुच्छेद 312 को अनुच्छेद 249 से न मिलाएँ: दोनों में राज्यसभा का दो-तिहाई उपस्थित-और-मतदान बहुमत है, पर एक सेवा के लिए और दूसरा राज्य सूची पर कानून के लिए है।
11. वित्तीय संबंधों का आधार मानचित्र
उपबंध
कार्य
स्मृति-संकेत
अनुच्छेद 268–270
निर्दिष्ट करों और शुल्कों को संघ द्वारा लगाने/वसूलने, राज्यों को सौंपने या संघ-राज्य में बाँटने के संवैधानिक मार्ग।
लगाना, वसूलना, सौंपना और बाँटना अलग क्रियाएँ हैं।
अनुच्छेद 269A
अंतर्राज्यीय GST संघ लगाता-वसूलता और संघ-राज्यों में बाँटता है।
अंतर्राज्यीय आपूर्ति।
अनुच्छेद 271
संवैधानिक पाठ के अधीन संसद संघ के प्रयोजन के लिए निर्दिष्ट करों पर अधिभार लगा सकती है।
अधिभार की आय संघ को।
अनुच्छेद 275
संसद सहायता की आवश्यकता वाले राज्यों के राजस्व के लिए सहायक अनुदान देती है; अनुच्छेद में विशेष व्यवस्थाएँ भी हैं।
संवैधानिक अनुदान।
अनुच्छेद 280
राष्ट्रपति वित्त आयोग गठित करता है, जो कर-वितरण, अनुदान-सिद्धांत और भेजे गए अन्य वित्तीय विषयों पर अनुशंसा देता है।
संघ-राज्य और राज्यों के बीच वितरण।
अनुच्छेद 282
संघ या राज्य किसी सार्वजनिक प्रयोजन के लिए अनुदान दे सकता है, भले वह उसके सामान्य विधायी क्षेत्र से बाहर हो।
विवेकाधीन सार्वजनिक-प्रयोजन अनुदान।
अनुच्छेद 292–293
संघ और राज्य का उधार; निर्दिष्ट संघ ऋण या प्रत्याभूति बकाया रहने पर राज्य को नए ऋण के लिए संघ की सहमति चाहिए।
राज्य ऋण पर सहमति की शर्त संभव।
12. GST परिषद: गठन और मतदान
तत्त्व
संवैधानिक नियम
अध्यक्ष
संघ वित्त मंत्री।
दूसरा संघ सदस्य
राजस्व या वित्त का प्रभार रखने वाला संघ राज्य मंत्री।
राज्य प्रतिनिधित्व
प्रत्येक राज्य का वित्त या कराधान मंत्री अथवा राज्य सरकार द्वारा नामित कोई अन्य मंत्री।
गणपूर्ति
कुल सदस्यों का आधा।
निर्णय की सीमा
उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के भारित मतों का कम-से-कम तीन-चौथाई।
मत-भार
संघ सरकार—डाले गए कुल मतों का एक-तिहाई; सभी राज्य सरकारें मिलकर—दो-तिहाई।
स्वरूप
अनुच्छेद 279A परिषद के निर्णयों को बार-बार “अनुशंसाएँ” कहता है।
13. अंतर्राज्यीय संबंधों के संवैधानिक साधन
अनुच्छेद
व्यवस्था
स्वरूप
131
संवैधानिक सीमाओं के अधीन संघ और एक या अधिक राज्यों अथवा राज्यों के बीच विधिक अधिकार वाले निर्दिष्ट विवादों में उच्चतम न्यायालय की मूल अधिकारिता।
विधिक विवाद का न्यायिक निर्णय।
261
पूरे भारत में सार्वजनिक कृत्यों, अभिलेखों और न्यायिक कार्यवाहियों को पूर्ण विश्वास तथा मान्यता; अंतिम दीवानी निर्णय कानून के अनुसार भारत में कहीं लागू हो सकते हैं।
राज्य-सीमाओं के पार विधिक निरंतरता।
262
संसद अंतर्राज्यीय नदी/नदी-घाटी के जल विवादों के निर्णय का कानून बना सकती है और उच्चतम न्यायालय सहित न्यायालयों की अधिकारिता रोक सकती है।
विशेष जल-विवाद मार्ग।
263
लोकहित में राष्ट्रपति परिषद स्थापित कर सकता है और उसके कर्तव्य, संगठन तथा प्रक्रिया तय कर सकता है।
सौंपे गए अनुसार जाँच/सलाह, चर्चा और अनुशंसा।
14. अंतर्राज्यीय परिषद, क्षेत्रीय परिषदें और पूर्वोत्तर परिषद
मंच
स्रोत
स्वरूप और उद्देश्य
बिहार से संबंध
अंतर्राज्यीय परिषद
अनुच्छेद 263; 28 मई 1990 के राष्ट्रपति आदेश से स्थापित।
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाला संवैधानिक, अनुशंसात्मक और सहमति-आधारित मंच। 1990 की परिषद को साझा विषयों पर चर्चा और समन्वय का कार्य मिला; गृह मंत्रालय के अनुसार अनुच्छेद 263(a) की विवाद-जाँच का कार्य इसे नहीं सौंपा गया।
बिहार के मुख्यमंत्री राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में भाग लेते हैं।
पाँच क्षेत्रीय परिषदें
राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 का भाग III।
संघ गृह मंत्री की अध्यक्षता वाले वैधानिक और सलाहकारी क्षेत्रीय मंच; केंद्र-राज्य तथा अंतर्राज्यीय विषयों पर चर्चा।
वर्तमान गृह मंत्रालय सूची में बिहार, झारखंड, ओडिशा, सिक्किम और पश्चिम बंगाल के साथ पूर्वी क्षेत्रीय परिषद में है।
पूर्वोत्तर परिषद
पूर्वोत्तर परिषद अधिनियम, 1971; 1972 में स्थापना।
पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए अलग वैधानिक निकाय; यह “छठी क्षेत्रीय परिषद” नहीं है।
बिहार इसका सदस्य नहीं है।
15. अंतर्राज्यीय परिषद: अनुच्छेद 263 का पाठ और वास्तविक परिषद
अनुच्छेद 263 राष्ट्रपति को तीन प्रकार के कर्तव्यों में से एक या अधिक के लिए परिषद बनाने की अनुमति देता है: (a) राज्यों के बीच विवाद की जाँच और सलाह; (b) साझा रुचि के विषयों की जाँच और चर्चा; तथा (c) नीति और कार्रवाई के बेहतर समन्वय की अनुशंसा। उसके वास्तविक कर्तव्य, संगठन और प्रक्रिया राष्ट्रपति तय करता है।
1990 में बनी स्थायी अंतर्राज्यीय परिषद की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं और उसके आदेश के अनुसार मुख्यमंत्री तथा अन्य निर्दिष्ट संघ/राज्य-क्षेत्र प्रतिनिधि शामिल होते हैं। यह चर्चा और अनुशंसा का मंच है, न्यायालय नहीं। अनुच्छेद 263 में उपलब्ध कार्यों की सूची, 1990 की परिषद को वास्तव में सौंपे गए कार्यों से व्यापक है—वक्तव्य-आधारित प्रश्नों के लिए यह महत्त्वपूर्ण अंतर है।
16. क्षेत्रीय परिषदें: क्षेत्रीय स्तर पर सहयोगी संघवाद
उत्तर, मध्य, पूर्व, पश्चिम और दक्षिण—पाँच क्षेत्रीय परिषदें राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 से बनीं। ये क्षेत्र के राज्यों और संघ को सीमा, भाषायी अल्पसंख्यक, परिवहन, आर्थिक योजना, सुरक्षा और अन्य साझा विषयों पर चर्चा का मंच देती हैं। इनका प्रभाव विचार-विमर्श से आता है, न्यायालय जैसे बाध्यकारी आदेश से नहीं।
संघ गृह मंत्री प्रत्येक क्षेत्रीय परिषद के अध्यक्ष होते हैं। संबंधित क्षेत्र के राज्यों के मुख्यमंत्री बारी-बारी से एक वर्ष के लिए उपाध्यक्ष होते हैं। यह न लिखें कि क्षेत्रीय परिषदें सीधे अनुच्छेद 263 ने बनाई हैं; उनका प्रत्यक्ष विधिक स्रोत संसद का अधिनियम है।
17. अंतर्राज्यीय व्यापार की स्वतंत्रता और अनुमत प्रतिबंध
अनुच्छेद
नियम
परीक्षा संकेत
301
भाग XIII के अन्य उपबंधों के अधीन पूरे भारत में व्यापार, वाणिज्य और आवागमन स्वतंत्र होगा।
स्वतंत्रता पूर्ण नहीं; पाठ में ही शर्त है।
302
संसद लोकहित में प्रतिबंध लगा सकती है।
संसदीय प्रतिबंध।
303
संघ या राज्य विधानमंडल सामान्यतः राज्यों में पक्षपात या भेदभाव नहीं कर सकता; संसद को वस्तुओं की कमी से संबंधित अपवाद है।
आर्थिक अभेद।
304(a)
राज्य दूसरे राज्यों/संघ राज्य-क्षेत्रों से आने वाली वस्तुओं पर कर लगा सकता है, यदि समान स्थानीय वस्तुओं पर समान कर हो और भेदभाव न हो।
समान कर-व्यवहार।
304(b)
राज्य विधानमंडल लोकहित में युक्तियुक्त प्रतिबंध लगा सकता है, किंतु विधेयक/संशोधन के लिए राष्ट्रपति की पूर्व स्वीकृति चाहिए।
युक्तियुक्तता + लोकहित + पूर्व स्वीकृति।
18. आपातकाल और संघीय संतुलन
19. बिहार के लिए महत्त्व
21. प्रारंभिक परीक्षा के जाल
22. आधिकारिक पूर्व प्रश्न की स्थिति
इस विषय के लिए किसी प्रश्न का पूरा पाठ और सभी विकल्प आधिकारिक प्रश्न-पुस्तिका से सत्यापित नहीं हुए, इसलिए यहाँ किसी प्रश्न को आधिकारिक BPSC पूर्व प्रश्न नहीं कहा गया है। नीचे दिए गए प्रश्न मौलिक BPSC-शैली अभ्यास प्रश्न हैं।