BPSC · Polity

संविधान संशोधन और मूल संरचना सिद्धांत

35 min read · Updated 5 Oct 2026

1. BPSC के लिए मूल बात

अनुच्छेद 368, विशेष बहुमत, राज्य-अनुसमर्थन, मूल संरचना सिद्धांत और प्रमुख मामले महत्त्वपूर्ण हैं। संशोधन विधेयक संसद के किसी भी सदन में आता है, राज्य विधानमंडल में नहीं। प्रत्येक सदन में कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों का कम-से-कम दो-तिहाई चाहिए। संयुक्त बैठक नहीं होती; राष्ट्रपति को स्वीकृति देनी होती है।

2. तीन रास्ते

रास्तानियम
साधारण बहुमतकुछ परिवर्तन अनु. 368 से बाहर, जैसे अनु. 2–4 के कानून; ये 368 के संशोधन नहीं माने जाते।
विशेष बहुमतदोनों सदनों में कुल सदस्यता बहुमत + उपस्थित/मतदान का 2/3।
विशेष बहुमत + राज्यनिर्दिष्ट संघीय विषयों में कम-से-कम आधे राज्य विधानमंडल का अनुसमर्थन।

3. राज्य-अनुसमर्थन

अनु. 54, 55, 73, 162, 241, 279A; संघ न्यायपालिका, उच्च न्यायालय, विधायी संबंध, सातवीं अनुसूची की सूचियाँ, संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व और अनु. 368 में बदलाव पर आधे राज्यों का अनुसमर्थन चाहिए। बिहार इनमें एक राज्य विधानमंडल के रूप में गिना जाता है; विधेयक बिहार विधानसभा में प्रस्तुत नहीं होता।

4. मूल संरचना: मामले

5. मूल संरचना क्या है?

संविधान में इसकी पूर्ण बंद सूची नहीं है; यह न्यायालय निर्मित सिद्धांत है। उदाहरण: संविधान की सर्वोच्चता, गणतांत्रिक/लोकतांत्रिक रूप, धर्मनिरपेक्षता, संघवाद, शक्तियों का पृथक्करण, न्यायिक समीक्षा, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव, विधि का शासन, सीमित संशोधन शक्ति तथा मौलिक अधिकार–नीति-निदेशक तत्त्व में सामंजस्य।

10. अभ्यास: 20 प्रश्न