सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन और उन्नीसवीं शताब्दी का नवजागरण
BPSC की मांग
सुधारक–संगठन–वर्ष–उद्देश्य के युग्म पढ़ें। अलग-अलग आंदोलनों को एक ही “सुधार” कार्यक्रम न मानें: शिक्षा, जाति, स्त्री-अधिकार, धार्मिक व्याख्या और समुदाय-उत्थान के अलग उद्देश्य थे।
मुख्य युग्म
सुधारक/आंदोलन
सुरक्षित संकेत
राजा राममोहन राय
ब्रह्म सभा (1828); सती प्रथा के विरोध का अभियान।
विद्यासागर
विधवा पुनर्विवाह के समर्थक; हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम, 1856।
ज्योतिबा फुले
सत्यशोधक समाज, 1873; जाति-विरोध और सामाजिक समानता।