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सिंधु / हड़प्पा सभ्यता: BPSC प्रारंभिक परीक्षा नोट्स

30 min read · Updated 15 Sep 2026

सिंधु / हड़प्पा सभ्यता: BPSC प्रारंभिक परीक्षा नोट्स

BPSC प्रारंभिक परीक्षा में क्या पढ़ें

यह बहुत उपयोगी मिलान-आधारित विषय है। इसे स्थल–नदी/राज्य, स्थल–विशेषता, सामग्री–उपयोग, लिपि–स्थिति और व्यापार–पद के रूप में पढ़ें। हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, धोलावीरा, लोथल, कालीबंगा, राखीगढ़ी, विशाल स्नानागार, जलाशय, मुहरें, मानकीकृत ईंटें, कांसा और अपठित लिपि सबसे आवश्यक आधार हैं।

एक मिनट में सार

हड़प्पा सभ्यता उत्तर-पश्चिमी दक्षिण एशिया की कांस्य-युगीन नगरीय संस्कृति थी। विद्यालयी इतिहास में प्रयुक्त मानक कालक्रम के अनुसार इसका परिपक्व चरण लगभग 2600–1900 ईसा पूर्व रखा जाता है। उत्खनन से नियोजित नगर, नालियाँ, कुएँ, शिल्प-उत्पादन, बाट, मुहरें और दूरस्थ व्यापार के साक्ष्य मिलते हैं। मुहरों और अन्य वस्तुओं पर मिली लिपि अब तक अपठित है; इसलिए इसकी भाषा या राजनीतिक व्यवस्था के बारे में असिद्ध दावे नहीं करने चाहिए।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए सुरक्षित कालक्रम

प्रमुख स्थल और उनके परीक्षा-संकेत

स्थलवर्तमान स्थितिमहत्त्वपूर्ण संबंध
हड़प्पापंजाब, पाकिस्तान; रावी नदी परनामकरण-स्थल; 1921 में दयाराम साहनी के निर्देशन में उत्खनन
मोहनजोदड़ोसिंध, पाकिस्तान; सिंधु नदी परविशाल स्नानागार; 1922 में आर. डी. बनर्जी के निर्देशन में उत्खनन आरंभ
धोलावीराखडीर बेट, कच्छ, गुजरातपत्थर से बना नगर, जलाशय, जल-प्रबंधन और तीन-भागीय विन्यास
लोथलगुजरातबंदरगाह-गोदी के रूप में पहचाना गया जलाशय; मनका-निर्माण और व्यापार संबंध
कालीबंगाराजस्थानजुते हुए खेत का साक्ष्य; हड़प्पाई बसावट
राखीगढ़ीहरियाणाभारत का प्रमुख हड़प्पाई स्थल
चन्हूदड़ोसिंध, पाकिस्तानविशेषतः मनका-निर्माण सहित शिल्प-उत्पादन; पाठ्यपुस्तक विवरणों में दुर्ग का अभाव बताया जाता है

नगरीय विशेषताएँ और सही व्याख्या

विशेषतासाक्ष्य से क्या सिद्ध होता हैप्रारंभिक परीक्षा का फंदा
ईंटेंकई परिपक्व हड़प्पाई नगरों में ईंटों का मानकीकृत अनुपात, प्रायः 1:2:4, मिलता है।हर स्थल की हर ईंट के लिए इसे कठोर नियम न मानें।
जल-निकासकई बस्तियों में नियोजित नालियाँ, कुएँ और जल-संबंधी संरचनाएँ मिली हैं।विशाल स्नानागार मोहनजोदड़ो में है, हड़प्पा में नहीं।
दुर्ग और निचला नगरकई स्थलों में अलग-अलग भाग दिखाई देते हैं; विन्यास स्थलानुसार बदलता है।धोलावीरा तीन मुख्य भागों के लिए प्रसिद्ध है, केवल दो के लिए नहीं।
मुहरेंअक्सर आयताकार और सेलखड़ी की; पशु-चिह्न और लघु लेख मिलते हैं।लिपि अभी अपठित है।
बाटमाप-तौल के मानकीकृत व्यवहार का संकेत।इन्हें मुद्राओं से न मिलाएँ; हड़प्पा की सिक्के-प्रथा ज्ञात नहीं है।

अर्थव्यवस्था, शिल्प और व्यापार

हड़प्पाई लोगों ने कई क्षेत्रों में गेहूँ और जौ जैसी फसलें उगाईं; कपास इसका महत्त्वपूर्ण पाठ्यपुस्तकीय संबंध है। उत्खनन में ताँबा, कांसा, सोना, चाँदी, शंख, पत्थर और फैयेंस की वस्तुएँ मिली हैं। कांसा ताँबा और राँगा का मिश्रधातु है। मनके, मुहरें, बाट, बर्तन और तकलियाँ विशिष्ट शिल्पों का संकेत देती हैं। मेसोपोटामियाई अभिलेखों में मेलुह्हा नाम आता है, जिसे व्यापक रूप से हड़प्पाई क्षेत्र से जोड़ा जाता है; यह व्यापार का महत्त्वपूर्ण मिलान-बिंदु है।

सामग्री–उपयोग सारणी

सामग्री / वस्तुसही संबंधकिस भूल से बचें
कांसाताँबा और राँगा की मिश्रधातु; औज़ार, पात्र और अन्य वस्तुओं में उपयोगइसे लोहा न कहें
सेलखड़ी की मुहरमुहरों की सामान्य सामग्री; पशु-चिह्न और छोटे लेख मिल सकते हैंहर मुहर को कांसे की न कहें
फैयेंसकृत्रिम/चमकीली सामग्री; मनकों और आभूषणों में उपयोगयह प्राकृतिक पत्थर के समान नहीं है
तकलीसूत्र कातने से जुड़ा साक्ष्ययह तौलने का बाट नहीं है
मानकीकृत बाटमाप-तौल और विनिमयइन्हें ढाले हुए सिक्कों का प्रमाण न समझें

20 BPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न