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ऐतिहासिक स्रोत, प्रागैतिहासिक काल और पाषाण युग: BPSC प्रारंभिक परीक्षा नोट्स

26 min read · Updated 15 Sep 2026

ऐतिहासिक स्रोत, प्रागैतिहासिक काल और पाषाण युग: BPSC प्रारंभिक परीक्षा नोट्स

BPSC प्रारंभिक परीक्षा में क्या पढ़ें

BPSC में इस भाग से सीधे तथ्य और मिलान-आधारित प्रश्न आते हैं: स्रोत–अध्ययन-शाखा, युग–उपकरण, स्थल–राज्य और बिहार का स्थल–काल। अभिलेखशास्त्र, मुद्राशास्त्र, प्रागैतिहासिक काल/आद्य-ऐतिहासिक काल, पुरापाषाण, मध्यपाषाण, नवपाषाण, चिरांद, पैसरा और भीमबेटका अवश्य याद रखें। अलग-अलग क्षेत्रों में परिवर्तन एक ही समय पर नहीं हुआ था; इसलिए हर क्षेत्र के लिए एक ही निश्चित तिथि न मानें।

एक मिनट में सार

इतिहास केवल पुस्तकों से नहीं, साक्ष्यों से बनाया जाता है। पुरातत्त्ववेत्ता औज़ार, मिट्टी के बर्तन, अस्थियाँ, भवन, मुहरें और समाधियों जैसे भौतिक अवशेषों का अध्ययन करते हैं। इतिहासकार अभिलेख, मुद्राएँ, पांडुलिपियाँ और विदेशी यात्रियों के विवरण भी देखते हैं। मानव के आरंभिक अतीत के लिए भौतिक साक्ष्य सबसे महत्त्वपूर्ण हैं, क्योंकि उस समय के पठनीय लिखित अभिलेख नहीं मिलते। पाषाण युग का व्यापक क्रम है: पुरापाषाण, मध्यपाषाण और नवपाषाण। ताम्रपाषाण में ताँबा और पत्थर साथ-साथ प्रयुक्त हुए; इसे केवल पाषाण युग का दूसरा नाम न समझें।

ऐतिहासिक स्रोत एक नज़र में

स्रोतइससे क्या पता चलता हैअध्ययन-शाखा / परीक्षा संकेत
पुरातात्त्विक अवशेषऔज़ार, बर्तन, घर, समाधियाँ, अस्थियाँ, मनके, मुहरें और स्मारकउत्खनन और सर्वेक्षण; प्रागैतिहासिक काल में बहुत महत्त्वपूर्ण
अभिलेखआदेश, दान, उपाधियाँ, वंशावली और प्रशासनअभिलेखशास्त्र = अभिलेखों का अध्ययन
मुद्राएँशासक, चिह्न, अर्थव्यवस्था, व्यापार और कालक्रममुद्राशास्त्र = मुद्राओं का अध्ययन
पांडुलिपियाँ और साहित्यिक ग्रंथविचार, परंपराएँ, सामाजिक व्यवहार और घटनाएँस्रोत की आलोचनात्मक जाँच आवश्यक; ग्रंथ बाद में भी नकल हुआ हो सकता है
विदेशी विवरणबाहरी पर्यवेक्षकों द्वारा भारत का वर्णनइन्हें भारतीय और पुरातात्त्विक साक्ष्यों से मिलाकर पढ़ें

पाषाण युग का क्रम: यही याद रखें

काल–उपकरण–जीवन की तुलना

कालमुख्य पहचानपरीक्षा में सामान्य संबंधकिससे न मिलाएँ
पुरापाषाणहस्तकुठार, विदारणी, शल्क और अन्य पाषाण उपकरणआरंभिक शिकारी-संग्राहकनियमित खेती और चमकाए उपकरण
मध्यपाषाणलघु-पाषाण उपकरण / माइक्रोलिथशिकार, मछली पकड़ना, संग्रह और क्षेत्रीय शैलचित्रमध्यकालीन इतिहास का “मध्य युग”
नवपाषाणघिसे-चमकाए पाषाण उपकरण, कुल्हाड़ीखाद्य उत्पादन और कई क्षेत्रों में स्थायी ग्रामहड़प्पा की नगरीय सभ्यता
ताम्रपाषाणताँबा + पत्थरदोनों पदार्थों का उपयोग करने वाली ग्राम संस्कृतियाँकेवल पाषाण-उपकरण वाला काल

यहाँ पुरातत्त्व सबसे अधिक क्यों जरूरी है

प्रागैतिहासिक समुदायों ने हमारे लिए पठनीय ग्रंथ नहीं छोड़े। उनके जीवन का अनुमान उस संदर्भ से लगाया जाता है जिसमें वस्तुएँ मिलती हैं: उपकरण की सामग्री और घिसावट, पशु-अस्थियाँ, आग जलाने के स्थान, फर्श, शैलचित्र, समाधियाँ और मिट्टी की परतें। अकेली वस्तु से कम जानकारी मिलती है; उसका उत्खनन-संदर्भ अधिक महत्त्वपूर्ण होता है। रेडियोकार्बन तिथि-निर्धारण उपयुक्त जैविक अवशेषों के लिए उपयोगी है, हर पाषाण उपकरण के लिए नहीं।

बिहार विशेष दृष्टि

स्थल / क्षेत्रजिला / राज्य संबंधBPSC के लिए महत्त्व
चिरांदसारण, बिहारमहत्त्वपूर्ण नवपाषाण स्थल; बिहार पुरातत्त्व निदेशालय इसे उत्खनित नवपाषाण स्थलों में गिनता है।
तराडीहबिहारबिहार पुरातत्त्व निदेशालय द्वारा नवपाषाण स्थलों में उल्लिखित।
पैसरामुंगेर, बिहारनिदेशालय के अनुसार मध्यपाषाण आवासीय अवशेष मिले हैं।
कैमूर, नवादा और जमुई की पहाड़ियाँबिहारनिदेशालय ने इन क्षेत्रों में प्रागैतिहासिक शैलचित्रों का उल्लेख किया है।

20 BPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न