औपनिवेशिक प्रशासन, न्यायपालिका, पुलिस और सिविल सेवाएँ: BPSC प्रारंभिक परीक्षा नोट्स
BPSC प्रारंभिक परीक्षा की माँग
अधिनियम–वर्ष–प्रावधान, न्यायालय–कार्य, पुलिस–कानून, सेवा–भर्ती और बिहार की संस्थाओं का संबंध तैयार करें। अधिनियमों को अलग-अलग तिथि के रूप में न पढ़ें; हर अधिनियम द्वारा हुए प्रशासनिक परिवर्तन का मिलान करें। प्रश्नों में रेगुलेटिंग एक्ट 1773, पिट्स इंडिया एक्ट 1784, 1858 में क्राउन को हस्तांतरण, उच्च न्यायालय अधिनियम 1861, पुलिस अधिनियम 1861 और भारतीय सिविल सेवा अक्सर पूछी जाती है।
महत्त्वपूर्ण कालक्रम
| वर्ष | कदम / घटना | परीक्षा के लिए महत्त्व |
|---|---|---|
| 1772 | वॉरेन हेस्टिंग्स ने बंगाल में न्यायिक योजना लागू की। | कंपनी शासन में दीवानी और फौजदारी न्याय की व्यवस्था संगठित हुई। |
| 1773 | रेगुलेटिंग एक्ट (विनियामक अधिनियम)। | बंगाल का गवर्नर, बंगाल का गवर्नर-जनरल बना; वॉरेन हेस्टिंग्स पहले थे। 1774 में कलकत्ता में सुप्रीम कोर्ट बना। |
| 1784 | पिट्स इंडिया एक्ट। | बोर्ड ऑफ कंट्रोल बना; कंपनी के कार्यों पर ब्रिटिश सरकार का नियंत्रण बढ़ा। |
| 1793 | कॉर्नवालिस कोड / सुधार। | न्यायिक पुनर्गठन और सिविल सेवा सुधारों से संबंधित। |
| 1833 | चार्टर एक्ट। | बंगाल का गवर्नर-जनरल, भारत का गवर्नर-जनरल बना; विलियम बेंटिक पहले थे। |
| 1853–1855 | चार्टर एक्ट 1853 और प्रतियोगी भर्ती। | कंपनी का संरक्षण-तंत्र समाप्त हुआ; 1855 में लंदन में खुली प्रतियोगी परीक्षा आरंभ हुई। |
| 1858 | गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट। | कंपनी से ब्रिटिश क्राउन को शासन हस्तांतरित हुआ; लॉर्ड कैनिंग पहले वायसराय बने। |
| 1860 | भारतीय दंड संहिता अधिनियमित की गई। | सामान्य दंड संहिता; प्रथम विधि आयोग और मैकाले के प्रारूप से जुड़ी। |
| 1861 | भारतीय उच्च न्यायालय अधिनियम और पुलिस अधिनियम। | उच्च न्यायालय का ढाँचा और पुलिस पुनर्गठन का कानून। |
| 1862 | कलकत्ता, बंबई और मद्रास में उच्च न्यायालय शुरू हुए। | इन प्रेसिडेंसियों में पुराने सुप्रीम कोर्ट और सदर अदालतों का स्थान लिया। |
| 1916 | पटना उच्च न्यायालय अस्तित्व में आया। | बिहार की महत्त्वपूर्ण संस्थागत जानकारी; 1916 में काम शुरू हुआ। |
| 1926 | पहला लोक सेवा आयोग स्थापित हुआ। | लोक सेवा भर्ती के विकास की बाद की महत्त्वपूर्ण अवस्था। |
प्रशासनिक अधिनियम: परिवर्तन से मिलान करें
| कदम | क्या बदला | याद रखने का सूत्र |
|---|---|---|
| रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 | संसद का पहला बड़ा हस्तक्षेप; बंगाल के गवर्नर-जनरल और सुप्रीम कोर्ट का ढाँचा। | 1773 = केंद्रीय नियंत्रण का पहला बड़ा कदम। |
| पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 | बोर्ड ऑफ कंट्रोल ने राजनीतिक मामलों की देखरेख की; कंपनी का तंत्र चलता रहा। | 1784 = द्वैध नियंत्रण। |
| चार्टर एक्ट, 1833 | केंद्रीकरण; भारत का गवर्नर-जनरल; पहले विलियम बेंटिक। | 1833 = “भारत का”, केवल बंगाल का नहीं। |
| गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट, 1858 | कंपनी का शासन क्राउन को गया; ब्रिटेन में भारत सचिव का पद महत्त्वपूर्ण हुआ। | 1858 = क्राउन शासन, पहले वायसराय कैनिंग। |
| इंडियन काउंसिल्स एक्ट, 1861 | क्राउन शासन के बाद विधायी परिषदों की व्यवस्था से जुड़ा। | इसे उसी वर्ष के पुलिस अधिनियम से न मिलाएँ। |
जिला प्रशासन: केंद्र में कलेक्टर
औपनिवेशिक जिले में कलेक्टर का मुख्य काम राजस्व वसूलना था। NCERT कलेक्टर को राजस्व और कर वसूलने तथा न्यायाधीशों, पुलिस अधिकारियों और दारोगाओं की सहायता से कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाला प्रमुख व्यक्ति बताता है। कलेक्टरेट सत्ता का केंद्र बन गया। कार्यों का यही केंद्रीकरण बताता है कि औपनिवेशिक जिला इतना शक्तिशाली प्रशासनिक इकाई क्यों था।
कंपनी शासन की शुरुआती देखरेख ब्रिटेन में कंपनी के निदेशक करते थे। पिट्स इंडिया एक्ट ने बोर्ड ऑफ कंट्रोल जोड़ा, जिसे द्वैध नियंत्रण कहा जाता है। 1858 के बाद ब्रिटिश क्राउन ने शासन संभाला और भारत सचिव ने इंडिया ऑफिस के माध्यम से ब्रिटेन से अधिकार चलाया।
औपनिवेशिक न्यायपालिका: शब्दावली स्पष्ट करें
| संस्था / शब्द | मुख्य संबंध | किससे न मिलाएँ |
|---|---|---|
| दीवानी | नागरिक और राजस्व मामले। | फौजदारी न्याय नहीं। |
| निजामत / फौजदारी | आपराधिक न्याय। | भूमि-राजस्व के दीवानी मुकदमे नहीं। |
| कलकत्ता का सुप्रीम कोर्ट | रेगुलेटिंग एक्ट की व्यवस्था के अंतर्गत 1774 में स्थापित। | बाद के उच्च न्यायालय से अलग। |
| सदर दीवानी अदालत / सदर निजामत अदालत | कंपनी-कालीन न्याय में उच्च अपीलीय व्यवस्था। | प्रेसिडेंसी व्यवस्था में इनके स्थान पर उच्च न्यायालय आए। |
| भारतीय उच्च न्यायालय अधिनियम, 1861 | उच्च न्यायालयों का आधार; 1862 में कलकत्ता, बंबई, मद्रास में आरंभ। | यह पुलिस कानून नहीं है। |
| भारतीय दंड संहिता, 1860 | सामान्य दंड संहिता, 1860 का अधिनियम 45। | इसे पुलिस अधिनियम से न मिलाएँ। |
पुलिस और सिविल सेवाएँ
1857 के विद्रोह के बाद पुलिस अधिनियम, 1861 (अधिनियम 5, 1861) बनाया गया। इसका घोषित उद्देश्य पुलिस को पुनर्गठित करना और अपराध की रोकथाम व पता लगाने में उसे अधिक प्रभावी बनाना था। इसने ऐसा ढाँचा दिया जिसमें प्रांतीय सरकार के पास अधीक्षण था और पुलिस महानिरीक्षक महत्त्वपूर्ण पद था। उत्तर में “औपनिवेशिक पुलिस पुनर्गठन” लिखें; यह न लिखें कि इस अधिनियम ने आज की संपूर्ण पुलिस-व्यवस्था बना दी।
लॉर्ड कॉर्नवालिस को कंपनी-कालीन सेवा सुधारों के कारण परंपरागत रूप से भारतीय सिविल सेवा का जनक कहा जाता है, यद्यपि उच्च सेवाएँ अधिकतर यूरोपियों तक सीमित थीं। चार्टर एक्ट 1853 ने संरक्षण-तंत्र समाप्त किया; 1854 की मैकाले समिति के बाद 1855 में लंदन में सिविल सेवा की खुली प्रतियोगी परीक्षा शुरू हुई। सत्येन्द्रनाथ टैगोर ICS के लिए अर्हता पाने वाले पहले भारतीय थे। भर्ती प्रक्रिया और भारतीय प्रतिनिधित्व बाद में बदले; आधुनिक UPSC व्यवस्था को औपनिवेशिक समय पर पीछे से न थोपें।
प्रारंभिक परीक्षा के जाल
- 1773: बंगाल का गवर्नर-जनरल; 1833: भारत का गवर्नर-जनरल।
- वॉरेन हेस्टिंग्स बंगाल के पहले गवर्नर-जनरल, विलियम बेंटिक भारत के पहले गवर्नर-जनरल और कैनिंग पहले वायसराय थे।
- 1858 में कंपनी से क्राउन को शासन गया। इससे 1600 का कंपनी चार्टर क्राउन शासन का कानून नहीं बनता।
- कलकत्ता का सुप्रीम कोर्ट 1774/रेगुलेटिंग एक्ट के संदर्भ में है; उच्च न्यायालय अधिनियम 1861 का है और उच्च न्यायालय 1862 में शुरू हुए।
- दीवानी = नागरिक/राजस्व; निजामत = आपराधिक।
- पुलिस अधिनियम 1861 और भारतीय दंड संहिता 1860 अलग कानून हैं।
- ICS की प्रतियोगी परीक्षा 1855 में लंदन में शुरू हुई; सत्येन्द्रनाथ टैगोर पहले भारतीय अर्हताप्राप्त व्यक्ति थे।