भारत में ब्रिटिश विस्तार: BPSC प्रारंभिक परीक्षा नोट्स
BPSC प्रारंभिक परीक्षा की माँग
कंपनी के व्यापार से क्षेत्रीय शक्ति बनने की प्रक्रिया; युद्ध और संधि; दीवानी; सहायक संधि; हड़प नीति; प्रमुख विलय; तथा बक्सर, बंगाल-बिहार दीवानी और मीर कासिम के मुंगेर से जुड़े बिहार कोण पर ध्यान दें।
सरल परिचय
अंग्रेज़ ईस्ट इंडिया कंपनी व्यापारिक संस्था के रूप में आई, पर अठारहवीं और उन्नीसवीं शताब्दी में क्षेत्रीय शक्ति बन गई। प्लासी (1757) ने बंगाल में रास्ता खोला; बक्सर (1764) ने कंपनी की शक्ति मजबूत की; 1765 की दीवानी ने उसे बंगाल, बिहार और उड़ीसा के राजस्व अधिकार दिए। बाद का विस्तार वेलेजली की सहायक संधि, युद्धों और डलहौजी की हड़प नीति से हुआ।
कालक्रम
विस्तार के तरीके
| तरीका | अर्थ | मुख्य संबंध |
|---|---|---|
| युद्ध और संधि | सैन्य विजय के बाद राजनीतिक या राजस्व लाभ। | प्लासी, बक्सर, आंग्ल-मैसूर, आंग्ल-मराठा, आंग्ल-सिख युद्ध। |
| दीवानी | 1765 में बंगाल, बिहार और उड़ीसा में राजस्व वसूलने का अधिकार। | कंपनी का राजस्व आधार बहुत बढ़ा। |
| सहायक संधि | शासक कंपनी सेना रखता, खर्च देता या भू-भाग छोड़ता और स्वतंत्र विदेश संबंध खोता। | वेलेजली, औपचारिक रूप से 1798। |
| हड़प नीति | पुरुष उत्तराधिकारी न होने पर कंपनी ने राज्य को मिला लिया। | डलहौजी; सतारा, संबलपुर, उदयपुर, नागपुर और झाँसी। |
| “कुशासन” के आधार पर विलय | अलग घोषित तर्क। | अवध, 1856। |
नीतियाँ: किसे किससे न मिलाएँ
| नीति | सही तथ्य | सामान्य गलत कथन |
|---|---|---|
| सहायक संधि | भारतीय शासक कंपनी सेना रखता और विदेश नीति की स्वतंत्रता खोता। | “हर मामले में यह प्रत्यक्ष विलय नीति थी।” |
| हड़प नीति | पुरुष उत्तराधिकारी न होने पर डलहौजी की उत्तराधिकार नीति। | “अवध इसी नीति में मिला था।” |
| दीवानी | राजस्व वसूली का अधिकार। | “सारी भारतीय भूमि का पूर्ण स्वामित्व।” |
| रेजिडेंट | देशी दरबार में कंपनी का प्रतिनिधि। | “कंपनी प्रभाव से स्वतंत्र शासक।” |
सहायक संधि
इंडियन कल्चर सामग्री के अनुसार लॉर्ड वेलेजली ने 1798 में इस नीति को औपचारिक रूप से शुरू किया। इसे स्वीकार करने वाले राज्य को कंपनी की सेना रखनी पड़ती थी, खर्च नकद या भूमि से देना पड़ता था और कंपनी रेजिडेंट के माध्यम से विदेशी संबंध चलाने पड़ते थे। इससे हर राज्य तुरंत नहीं मिला, पर उसकी राजनीतिक स्वायत्तता बहुत घट गई। अवध ने 1801 में इसे स्वीकार कर बड़ा लाभकारी भू-भाग खो दिया।
हड़प नीति और अवध
डलहौजी 1848 से 1856 तक गवर्नर-जनरल रहे। उन्होंने उन मामलों में हड़प नीति लागू की जहाँ कंपनी ने पुरुष उत्तराधिकारी के बिना उत्तराधिकार स्वीकार नहीं किया। NCERT सतारा (1848), संबलपुर (1850), उदयपुर (1852), नागपुर (1853) और झाँसी (1854) का उल्लेख करता है। अवध को 1856 में कंपनी के कथित कुशासन के आरोप पर अलग आधार से मिलाया गया। यह अंतर BPSC का महत्त्वपूर्ण जाल है।
प्रारंभिक परीक्षा के जाल
- दीवानी राजस्व अधिकार है; इसे आपराधिक न्याय के अधिकार से न मिलाएँ।
- सहायक संधि = वेलेजली; हड़प नीति = डलहौजी।
- अवध का विलय कथित कुशासन के आधार पर हुआ, हड़प नीति से नहीं।
- झाँसी हड़प नीति का उदाहरण है।
- पंजाब 1849 में और सिंध 1843 में मिला।
- मीर कासिम ने राजधानी वर्तमान बिहार के मुंगेर में की, कोलकाता में नहीं।