मौर्योत्तर भारत: शुंग, कण्व, सातवाहन, हिंद-यूनानी, शक, पार्थियन और कुषाण
BPSC प्रारंभिक परीक्षा में मांग
वंश–शासक–क्षेत्र–स्रोत और कला-शैली के युग्म याद रखें। प्रमुख जाल हैं: पुष्यमित्र–शुंग, गौतमीपुत्र–सातवाहन, मिनांडर–मिलिंदपन्ह, रुद्रदामन–जूनागढ़, कनिष्क–कुषाण, गांधार और मथुरा।
क्रम-स्मरण
| शक्ति | मुख्य संबंध | स्रोत या स्थल |
|---|---|---|
| शुंग | पुष्यमित्र ने मगध में मौर्यों का स्थान लिया | पाटलिपुत्र/विदिशा; साँची विस्तार |
| कण्व | वासुदेव कण्व ने मगध में शुंगों का स्थान लिया | छोटा मगधी उत्तराधिकार |
| सातवाहन | दक्कन; गौतमीपुत्र सातकर्णि | प्रतिष्ठान; गौतमी बालश्री का नासिक अभिलेख |
| हिंद-यूनानी | मिनांडर (मिलिंद) | मिलिंदपन्ह; द्विभाषी सिक्के |
| शक | रुद्रदामन प्रथम | जूनागढ़ अभिलेख; सुदर्शन झील की मरम्मत |
| कुषाण | कनिष्क | पुरुषपुर/पेशावर; गांधार और मथुरा केंद्र |
कला की तुलना
| शैली | सामग्री/दृश्य संकेत | सुरक्षित तथ्य |
|---|---|---|
| गांधार | धूसर शिस्ट; यूनानी-रोमन दृश्य प्रभाव | उत्तर-पश्चिम; बुद्ध प्रतिमाएँ महत्त्वपूर्ण |
| मथुरा | लाल चित्तीदार बलुआ पत्थर | स्वदेशी शैली; कुषाणकाल में महत्त्वपूर्ण |
| साँची | स्तूप, वेदिका और तोरण | शुंग विस्तार; सातवाहनकालीन तोरण-सज्जा |
मुख्य तथ्य
पुष्यमित्र ने मौर्यों के बाद शुंग वंश चलाया; वासुदेव ने मगध में कण्व वंश की स्थापना की। सातवाहन दक्कन की शक्ति थे। गौतमीपुत्र सातकर्णि का मुख्य स्रोत उनकी माता गौतमी बालश्री का नासिक अभिलेख है। मिनांडर को मिलिंदपन्ह में मिलिंद कहा गया है। रुद्रदामन के जूनागढ़ अभिलेख में सुदर्शन झील की मरम्मत का वर्णन है। कनिष्क प्रमुख कुषाण शासक थे; कश्मीर में चौथी बौद्ध संगीति से उनका संबंध बौद्ध परंपरा में मिलता है, इसलिए इसे परंपरा के रूप में लिखें।
प्रारंभिक परीक्षा के जाल
- कनिष्क को गुप्त और रुद्रदामन को सातवाहन न लिखें।
- मिनांडर/मिलिंद हिंद-यूनानी; गोंडोफर्नीज़ पार्थियन है।
- गांधार को “केवल यूनानी” न कहें; भारतीय परंपरा पर यूनानी-रोमन दृश्य प्रभाव है।
- मथुरा का लाल चित्तीदार बलुआ पत्थर और गांधार का धूसर शिस्ट याद रखें।
- कनिष्क की चौथी संगीति के लिए “परंपरा जोड़ती है” लिखें।