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मौर्योत्तर भारत: शुंग, कण्व, सातवाहन, हिंद-यूनानी, शक, पार्थियन और कुषाण

25 min read · Updated 15 Sep 2026

मौर्योत्तर भारत: शुंग, कण्व, सातवाहन, हिंद-यूनानी, शक, पार्थियन और कुषाण

BPSC प्रारंभिक परीक्षा में मांग

वंश–शासक–क्षेत्र–स्रोत और कला-शैली के युग्म याद रखें। प्रमुख जाल हैं: पुष्यमित्र–शुंग, गौतमीपुत्र–सातवाहन, मिनांडर–मिलिंदपन्ह, रुद्रदामन–जूनागढ़, कनिष्क–कुषाण, गांधार और मथुरा।

क्रम-स्मरण

शक्तिमुख्य संबंधस्रोत या स्थल
शुंगपुष्यमित्र ने मगध में मौर्यों का स्थान लियापाटलिपुत्र/विदिशा; साँची विस्तार
कण्ववासुदेव कण्व ने मगध में शुंगों का स्थान लियाछोटा मगधी उत्तराधिकार
सातवाहनदक्कन; गौतमीपुत्र सातकर्णिप्रतिष्ठान; गौतमी बालश्री का नासिक अभिलेख
हिंद-यूनानीमिनांडर (मिलिंद)मिलिंदपन्ह; द्विभाषी सिक्के
शकरुद्रदामन प्रथमजूनागढ़ अभिलेख; सुदर्शन झील की मरम्मत
कुषाणकनिष्कपुरुषपुर/पेशावर; गांधार और मथुरा केंद्र

कला की तुलना

शैलीसामग्री/दृश्य संकेतसुरक्षित तथ्य
गांधारधूसर शिस्ट; यूनानी-रोमन दृश्य प्रभावउत्तर-पश्चिम; बुद्ध प्रतिमाएँ महत्त्वपूर्ण
मथुरालाल चित्तीदार बलुआ पत्थरस्वदेशी शैली; कुषाणकाल में महत्त्वपूर्ण
साँचीस्तूप, वेदिका और तोरणशुंग विस्तार; सातवाहनकालीन तोरण-सज्जा

मुख्य तथ्य

पुष्यमित्र ने मौर्यों के बाद शुंग वंश चलाया; वासुदेव ने मगध में कण्व वंश की स्थापना की। सातवाहन दक्कन की शक्ति थे। गौतमीपुत्र सातकर्णि का मुख्य स्रोत उनकी माता गौतमी बालश्री का नासिक अभिलेख है। मिनांडर को मिलिंदपन्ह में मिलिंद कहा गया है। रुद्रदामन के जूनागढ़ अभिलेख में सुदर्शन झील की मरम्मत का वर्णन है। कनिष्क प्रमुख कुषाण शासक थे; कश्मीर में चौथी बौद्ध संगीति से उनका संबंध बौद्ध परंपरा में मिलता है, इसलिए इसे परंपरा के रूप में लिखें।

प्रारंभिक परीक्षा के जाल

  • कनिष्क को गुप्त और रुद्रदामन को सातवाहन न लिखें।
  • मिनांडर/मिलिंद हिंद-यूनानी; गोंडोफर्नीज़ पार्थियन है।
  • गांधार को “केवल यूनानी” न कहें; भारतीय परंपरा पर यूनानी-रोमन दृश्य प्रभाव है।
  • मथुरा का लाल चित्तीदार बलुआ पत्थर और गांधार का धूसर शिस्ट याद रखें।
  • कनिष्क की चौथी संगीति के लिए “परंपरा जोड़ती है” लिखें।

20 BPSC प्रारंभिक परीक्षा-स्तर के अभ्यास प्रश्न