चोल और दक्षिणी राज्य
BPSC प्रारंभिक परीक्षा की माँग
चोलों का उदय, शासक, कावेरी डेल्टा का मानचित्र, ग्राम-प्रशासन, भूमि-श्रेणियाँ, सिंचाई, मंदिर-संरक्षण और कांस्य परंपरा पढ़ें। BPSC प्रकार के प्रश्न प्रायः शासक–मंदिर, शब्द–अर्थ, भूमि-प्रकार–लाभार्थी, नगर–नदी घाटी और कालक्रम पर होते हैं।
सरल परिचय
चोल कावेरी डेल्टा की उपजाऊ भूमि से उठकर दक्षिण भारत की बड़ी शक्ति बने। नौवीं शताब्दी के मध्य में विजयालय ने मुत्तरैयारों से डेल्टा जीता और तंजावुर बसाया। राजराज प्रथम और राजेंद्र प्रथम ने चोल शक्ति का विस्तार तथा प्रशासन का पुनर्गठन किया। चोलों का पांड्यों, चेरों, पल्लवों और चालुक्यों जैसी पड़ोसी दक्षिणी शक्तियों से संपर्क व प्रतिस्पर्धा रही; इसलिए “दक्षिण भारत” को एक राज्य न मानकर शासक को उसके क्षेत्र और काल से जोड़ें।
याद रखने योग्य कालक्रम
शासक, स्थल और सही संबंध
| नाम | क्या याद रखें |
|---|---|
| विजयालय | नौवीं शताब्दी के मध्य मुत्तरैयारों से कावेरी डेल्टा जीता; तंजावुर और देवी निषुंभसूदिनी का मंदिर बनवाया। |
| राजराज प्रथम (985–1014) | शक्तिशाली चोल शासक; विस्तार और प्रशासनिक पुनर्गठन; तंजावुर का बृहदीश्वर। |
| राजेंद्र प्रथम (1012–1044) | नीतियाँ जारी रखीं; गंगा घाटी और श्रीलंका में आक्रमण; गंगैकोंडचोलपुरम का बृहदीश्वर। |
| राजराज द्वितीय (1143–1173) | दारासुरम का ऐरावतेश्वर मंदिर। |
कावेरी डेल्टा और सिंचाई
कावेरी डेल्टा में गहन खेती होती थी। NCERT बताता है कि कहीं कुएँ खोदे गए और कहीं वर्षाजल एकत्र करने के लिए बड़े तालाब बनाए गए; सिंचाई में योजना, श्रम, रखरखाव और जल-वितरण का निर्णय आवश्यक था। NCERT में दिखाया नौवीं शताब्दी का जल-द्वार तालाब से नहरों में जल का बहाव नियंत्रित करता था। MCQ में तालाब या जल-द्वार को सिंचाई प्रबंधन से जोड़ें, राजस्व कर से नहीं।
चोल प्रशासन: अलग-अलग शब्द
| शब्द | NCERT के संदर्भ में अर्थ |
|---|---|
| उर | किसानों की बस्ती; सिंचित कृषि के फैलाव से समृद्ध हुई। |
| नाडु | ग्रामों के समूह से बनी बड़ी इकाई; ग्राम परिषद और नाडु ने प्रशासन, न्याय और कर-संग्रह जैसे कार्य किए। |
| सभा | ब्रह्मदेय ग्राम की संस्था; उत्तरमेरूर जैसे अभिलेख समितियों के चयन का वर्णन करते हैं। |
| नगरम् | व्यापारियों का संघ, जिसका संबंध प्रायः नगरों से था। |
| वेल्लाल | NCERT के अनुसार समृद्ध कृषक समूह, जिनका नाडु के कार्यों पर पर्याप्त प्रभाव था। |
चोल अभिलेखों में भूमि-श्रेणियाँ
| शब्द | सही संबंध |
|---|---|
| वेल्लनवगै | गैर-ब्राह्मण कृषक स्वामियों की भूमि |
| ब्रह्मदेय | ब्राह्मणों को दी गई भूमि |
| शलाभोग | विद्यालय के रखरखाव की भूमि |
| देवदान / तिरुनामत्तुक्कानि | मंदिरों को दी गई भूमि |
| पल्लीच्छंदम | जैन संस्थाओं को दान की गई भूमि |
मंदिर, कला और समाज
चोल मंदिर केवल पूजा-स्थल नहीं थे। वे भूमि, संरक्षकों, शिल्पियों, उत्सवों और अभिलेखों से जुड़े थे। UNESCO के अनुसार ग्रेट लिविंग चोल टेम्पल्स में तंजावुर का बृहदीश्वर, गंगैकोंडचोलपुरम का बृहदीश्वर और दारासुरम का ऐरावतेश्वर शामिल हैं। ये स्थापत्य, मूर्तिकला, चित्रकला और कांस्य ढलाई में चोल उपलब्धियाँ दिखाते हैं। प्रारंभिक परीक्षा में पहले संरक्षक याद करें, केवल नगर के आधार पर मंदिर न पहचानें।
दक्षिणी राज्य: भ्रम से बचें
| शक्ति / स्थल | त्वरित पहचान |
|---|---|
| चोल | कावेरी डेल्टा; तंजावुर; राजराज प्रथम और राजेंद्र प्रथम |
| पल्लव | कांचीपुरम प्रमुख संबंध; क्षेत्र की पूर्व-चोल शक्ति |
| पांड्य | दक्षिणी तमिल क्षेत्र; मदुरै मुख्य संबंध |
| चेर | दक्षिणी प्रायद्वीप का पश्चिमी भाग; चोलों से न मिलाएँ |
| राष्ट्रकूट | पश्चिमी दक्कन, कावेरी डेल्टा नहीं |
प्रारंभिक परीक्षा के जाल
- विजयालय ने मुत्तरैयारों से कावेरी डेल्टा जीता; उन्होंने दिल्ली सल्तनत स्थापित नहीं की।
- तंजावुर का बृहदीश्वर राजराज प्रथम का है, जबकि गंगैकोंडचोलपुरम का बृहदीश्वर राजेंद्र प्रथम का है।
- दारासुरम का ऐरावतेश्वर राजराज द्वितीय से जुड़ा है, राजराज प्रथम से नहीं।
- ब्रह्मदेय ब्राह्मणों के लिए, देवदान मंदिरों के लिए और पल्लीच्छंदम जैन संस्थाओं के लिए है।
- उर किसानों की बस्ती है और नाडु ग्रामों की बड़ी इकाई—इन्हें उलटें नहीं।
- चोल कावेरी डेल्टा की शक्ति थे; राष्ट्रकूट दक्कन से जुड़े थे।